प्रवासी भारतीय, देसी आंटियां और पॉप आर्ट

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- Author, ध्रुति शाह
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, टोरंटो
दक्षिण एशियाई मूल के कनाडाई लोगों में मारिया क़मर का इंस्टाग्राम अकाउंट खासा लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन इनके पॉप आर्ट में ऐसा क्या है जो लोगों में इतनी दिलचस्पी पैदा कर दी है?
साठ के दशक के मशहूर पॉप आर्टिस्ट रॉय लिखटेंस्टाइन की तर्ज पर 24 साल की पाकिस्तानी कनाडाई ने जब व्यंगात्मक कार्टून बनाने शुरू किए और अपने इंस्टाग्राम पर डाला तो उसे पता नहीं था ये भारतीय प्रवासियों में इतना लोकप्रिय हो जाएगा.
और अब तेज़ तर्रार और खुद को ‘ज़िद्दी’ आर्टिस्ट कहने वाली मारिया क़मर ‘आंटियों’ की ‘देसी दुनिया’ को अपने कार्टूनों के मार्फ़त मुख्यधारा में ला रही हैं.

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क़मर कहती हैं, “मैं उन्हीं चीजों को ला रही हूँ जो हमारी संस्कृति में मौजूद हैं और जिन पर हम अक्सर हंसते हैं.”
उनके कार्टूनों के क़िरदार इसी तरह की पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को इतना पसंद आ रहे हैं कि क़मर के पेज पर लोग ‘मेरी कहानी’, ‘मेरी मां की कहानी’ जैसी टिप्पणियां कर रहे हैं.
क़मर की ‘बर्न्ट रोटीज़’ शृंखला ‘देसी आंटियों’ में खासकर दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं को केंद्र में रखा गया है.

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वो कहती हैं, “परिवारों में ऐसी महिलाएं होती हैं, जो बेवजह ही गप्प लड़ाती रहती हैं. वो आपकी मां बनने का ढोंग करती हैं या आपके बारे में आपकी मां से बातें करेंगी.”
“वो आपकी निजी बातें जानना चाहती हैं जैसे पेट साफ होता है या नहीं या ब्लड ग्रुप क्या है. कभी कभी वो आपको परेशानी में डालने के लिए साजिश भी रचती हैं. इनमें से कुछ तो दावा करती हैं कि उन्हें काला जादू आता है...और वो अपकी ज़िंदगी को मुश्किल बनाने के लिए इससे भी आगे चली जाती हैं.”
मारिया क़मर बताती हैं, “मेरी अपनी आंटियां बुरी नहीं हैं. मैं अपने परिवार से करीब से जुड़ी हुई हूँ...ये जो क़िरदार उनके बारे में हैं, जिन्हें धारावाहिकों में मैं देखती हूँ और जो मुझे बहुत मजाकिया लगते हैं.”
वो कहती हैं, “मेरे परिवार में चार अलग अलग किस्म के लोग हैं- मेरी मां, मेरे पिता, मैं और मेरा भाई. मैं सोचती थी कि कुछ चीजें तो केवल मेरे ही परिवार में घटती होंगी.”

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उनके मुताबिक़, “एक कार्टून जो मैंने बनाया उसमें मां अपने पति से तुरंत पुलिस को फ़ोन करने के लिए कहती है क्योंकि उनकी बेटी उस समय घर पर नहीं थी और मां को लगा कि वो ख़तरे में है लेकिन यह मेरा निजी अनुभव है.”
क़मर बताती हैं, “एक दिन मैं अपना फ़ोन नहीं उठा पाई क्योंकि मैं अपनी क्लास में थी, लेकिन उन्होंने सोचा कि मैं गुम हो गई हूँ और इस दुनिया में नहीं रही.”
क़रीब एक साल पहले जब क़मर के पास अपनी एडवर्टाइजिंग की नौकरी नहीं रही तो उन्होंने ये प्रोजेक्ट शुरू किया.

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वो बताती हैं, “जब मैं बच्ची थी तभी पाकिस्तान से कनाडा चली आई और मैं कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे इन दोनों संस्कृतियों के एक साथ लाया जा सके. मैंने सोचा मुझे अपने काम में कुछ ‘देसीपन’ लाना चाहिए. मैंने चित्रकारी शुरू की लेकिन ये सभी कर रहे थे. ये अमूर्त भी था इसलिए मैंने ऐसा कुछ बनाने की सोची, जिसका संदेश सीधा लोगों तक पहुंच सके.”
“इसी खोज में मुझे लिखटेंस्टाइन के चित्र मिले, जिन्हें देख लगा कि यही मैं चाहती थी. मैंने इसकी नकल बनाने की कोशिश की और जो बना वो आंटी जैसा था. उन्होंने जो रेखाचित्र बनाया था उसमें एक गोरी महिला दिखती थी, लेकिन मेरा कैरिकेचर अलग दिखता है.”
“जब मैंने पहली बार बनाया तो मुझे लगा कि मेरी मां क्या कहेंगी लेकिन इस तरह शुरुआत हो गई.”

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वो कहती हैं, “मेरी मां ने भी मुझे आइडिया दिए. मैंने उनसे किसी भारतीय सीरियल के बारे में पूछा और इस तरह ‘आई पुट साल्ट इन हर चाय’ कार्टून का आइडिया आया. उन्होंने बताया था कि एक ऐसी ही महिला को वो जानती हैं जो किसी की चाय में नमक डाल देती थीं, यह सुनने में तो अजीब है लेकिन यह बहुत मजाहिया भी है.”
क़मर की एक सबसे लोकप्रिय पोस्ट को 3400 लोगों ने लाइक किया था, इसमें एक महिला को ये कहते हुए दिखाया गया कि, “नारियल का तेल भी अब इस शादी को बचा नहीं सकता.”
दक्षिण एशियाई परिवारों में नारियल का तेल एक ज़रूरी आइटम होता है, जिसका कई तरह से इस्तेमाल होता है और आम तौर पर इसके लाभकारी गुणों का प्रचार किया जाता है...हालांकि इस मामले में ऐसा नहीं था.

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वो कहती हैं कि पहले मैंने सोचा कि उत्तर अमरीका के लोग इसे पसंद करेंगे और भारतीय लोग नापसंद करेंगे, लेकिन यह बहुत हल्का फुल्का मज़ाक था.
वो बताती हैं, “सांस्कृतियों को सीधे सीधे मैंने नहीं मिलाया, जैसे कि मर्लिन मुनरो को ‘आंटी’ के रूप में दिखाना. मैं ऐसा नहीं करूंगी.”
क़मर ने अब अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगानी शुरू कर दी है और हेटकॉपी ब्रांड के नाम से इसी बिक्री भी शुरू कर दी है.
इसके लिए उन्होंने डिजिटल आर्ट में उपयोगी उपकरण पर निवेश किया और अब बड़े पैमाने पर ये काम करना चाहती हैं.
वो कहती हैं, “लेकिन मुझसे पूछा जाता है कि मैं अपने क़िरदारों को और चटख क्यों नहीं बनाती. लेकिन आप ये नहीं कह सकते ये कोई भारतीय आंटी है, ये मेरी समस्या नहीं है. मैं ऐसा सौंदर्य के लिए करती हूँ न कि राजनीतिक रूप से सही होने के लिए.”

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“सबसे राजनीतिक काम जो मैंने किया वो था दो अंकल को किस करते हुए दिखाना.”
क़मर कहती हैं कि उन्होंने सोचा कि शादी में बराबरी के अहम उसूल को सामने लाने का यह बहुत मजाकिया तरीका होगा, खासकर अमरीकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक जोड़ों को शादी की संवैधानिक इजाजत दिए जाने के बाद.
वो कहती हैं कि उनके काम को लेकर अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं.












