कोलकाता में 100 से ज़्यादा कुत्तों की मौत

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- Author, पीएम तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम ने दुर्गापूजा से पहले आवारा कुत्तों को पकड़ने का व्यापक अभियान चलाया.
लेकिन इन कुत्तों को जिस डॉग पाउंड में रखा गया था, वहां दो हफ़्तों में सौ से ज़्यादा कुत्तों की मौत हो चुकी है.
पशु प्रेमियों ने इसके लिए कुत्तों को रखने की जगह की बदहाली और कर्मचारियों की लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराया है.
निगम के मेयर परिषद के सदस्य (स्वास्थ्य) अतीन घोष ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
यह पहला मौका है, जब एक साथ इतनी बड़ी तादाद में आवारा कुत्तों की मौत हुई है.
मौत की वजह

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निगम ने महानगर के पूर्वी छोर पर स्थित धापा में जो बाड़ा (डॉग पाउंड) बनवाया हैं, वहां ढाई सौ कुत्तों को रखा जा सकता है.
इसका उद्घाटन तीन साल पहले हुआ था. घोष का कहना है कि जांच रिपोर्ट से ही कुत्तों की मौत की वजह का पता चलेगा. वह कहते हैं, "मुझे बताया गया है कि 40 कुत्तों की मौत हुई है."
दूसरी ओर डॉग पाउंड के संचालक पशु चिकित्सक पी. के. सामंत का कहना है कि 100 से ज़्यादा कु्त्तों की मौत हो चुकी है.
उनका मानना है कि हड़बड़ी में किया गया बंध्याकरण ऑपरेशन और उसके बाद समुचित देख-रेख का अभाव ही इन मौतों की वजह है.

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सामंत कहते हैं, "आपरेशन के बाद कुत्तों को तीन दिनों तक तरल भोजन देना ज़रूरी है. ऐसा नहीं होने पर संक्रमण की वजह से उनकी मौत लाजिमी है."
दूसरी ओर, पशु प्रमियों ने इस मामले की जांच और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग उठाई है.
देखरेख की व्यवस्था
'लव एंड केयर' नामक ग़ैर-सरकारी संगठन चलाने वाली सुष्मिता राय कहती हैं, "सरकार को ग़ैर-सरकारी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल को कुत्तों के बाड़े का दौरा करने की इजाज़त देनी चाहिए ताकि पता चल सके कि वहां उनको किस हालात में रखा जाता है."
एक अन्य पशु प्रेमी दीपशिखा राय कहती हैं, "निगम आवारा कुत्तों को पकड़ कर धापा में मरने के लिए छोड़ देता है."

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उनका कहना है कि वहां कुत्तों की समुचित देख-रेख की कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए आवारा कुत्तों की मौत आम है.
पशु प्रेमी संगठनों का आरोप है कि धापा में कुत्तों का न तो ठीक से इलाज किया जाता है और न ही उनको खाना मिलता है.
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