कुत्ते कटवा रहे नाख़ून, करवा रहे फ़ेशियल

पालतू डॉग

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    • Author, प्रियंका मुखर्जी, चार्वी बंसल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

इंसानों के लिए पॉर्लर और स्पा तो हर किसी ने सुना होगा, लेकिन अब ऐसी सुविधाएं जानवरों के लिए उपलब्ध होने लगी हैं.

विदेशों में भले ही आम बात हो लेकिन भारत में पेट पॉर्लर्स या डॉग-पॉर्लर्स का कॉन्सेप्ट फिलहाल नया है.

कुत्तों के लिए अलग-अलग हेयरस्टाइल, मैनिक्योर, पैडिक्योर, स्पा ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं अब यहां भी उपलब्ध हैं.

रेड पॉज़, डॉग पार्लर

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देश की राजधानी दिल्ली जैसे शहर में पालतू कुत्तों की देखभाल के लिए ढेरों पॉर्लर मौजूद हैं.

अमूमन ऐसे पॉर्लरों में लोग अपने पालतू जानवर के बाल कटवाने आते हैं लेकिन धीरे धीरे सुविधाओं का दायरा बढ़ रहा है.

‘रेड पॉज़’ की मालिक साक्षी सोंधी बताती हैं कि, "आम तौर पर बाल काटना मुख्य काम होता है लेकिन यहां इनके लिए ऑयल मसाज, कंडीशनिंग ट्रीटमेंट और हॉट पैक जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं."

डॉग केयर

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एक अन्य पॉर्लर ‘कैनाइन इलीट’ की मालिक सोन्या कोचर का मानना है कि जैसे छोटे बच्चों का ध्यान रखा जाता है वैसे ही पालतू जानवरों की साफ़ सफाई भी ज़रूरी है.

उनके मुताबिक़, “सबसे ज़्यादा पॉपुलर है मैनिक्योर और पेडिक्योर. अब तो बाल को रंगने का चलन भी शुरू हो गया है. डॉग को भी थकावट होती है, इसलिए मसाज की भी व्यवस्था होती है.”

डॉग पार्लर

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सोन्या कहती हैं, “जैसे बच्चों को इनफ़ेक्शन हो जाता है वैसे पालतू कुत्तों और बिल्लियों को भी होता है. लोग अब समझने लगे हैं. लोग अपने पालतू जानवरों को वैसा ही प्यार और इज्ज़त देते हैं, जैसे अपने बच्चों को.”

दिल्ली की रहने वाली व्रिष्टी मुखर्जी के पास तीन कुत्ते हैं लेकिन वो उन्हें हर महीने डॉग पॉर्लर ले जाना नहीं भूलतीं.

वो कहती हैं, “मैं देखती हूँ की हर महीने उनका अच्छे से ग्रूमिंग हो, जिसमें उनका मैनिक्योर पेडिक्योर होता है, उनका फ़ेशियल होता है. यहां उनके आंख, कान और चेहर को साफ किया जाता है. उनके बाल कट जाते हैं. ऑयल मसाज और एरोमा थेरेपी से उनके शरीर की बदबू ख़त्म हो जाती है. पॉर्लर उनकी बहुत अच्छी तरीक़े से देखभाल की जाती है.”

डॉग पार्लर, रेड पॉज़

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इमेज कैप्शन, डॉग पार्लर, रेड पॉज़.

कुत्तों के लिए अब पॉर्लर के अलावा डे-बोर्डिंग का भी इंतज़ाम है. जब लोग अपने काम या छुट्टियों पर घर से बाहर जाते हैं, तो इन्हें बोर्डिंग में रख कर जाते हैं.

राजधानी के पॉश इलाक़े वसंत कुंज में रहने वाली पूजा के डॉग का नाम गब्बर है.

डॉग पॉर्लर

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वो कहती हैं कि जब भी वो बाहर जाती थीं तो उन्हें अपने गब्बर की चिंता लगी रहती थी. बोर्डिंग में रखने से अब वो चिंता नहीं रहती. समय समय पर उन्हें अपने प्यारे गब्बर की ख़बर मेल पर मिलती रहती है और उसका वीडियो भी आता है.

वो कहती हैं, “बोर्डिंग में मेरे दोस्त भी जाते हैं और मुझे बताते हैं कि गब्बर बहुत खुश है, तो मुझे भी अच्छा लगता है.”

इन डॉग पॉर्लर्स और डे-बोर्डिंग में कुत्तों के लिए बर्थडे पार्टी, थीम पार्टी, पूल पार्टी और फैशन शो भी आयोजित किए जाते हैं.

डॉग पार्लर

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सोन्या कोचर कहती हैं, “आप अपने डॉग का जन्मदिन मानना चाहते हैं, उसी तरह जैसे अपने बच्चे का बर्थडे मानते हैं तो आप केक आर्डर करते उनके दोस्तों को बुलाते हैं तो लोग अपने डॉग को लेकर आते हैं. साथ में पूल होता है, तो बच्चे और डॉग्स इकट्ठे होकर स्वीमिंग का आनंद लेते हैं. फ़ैशन शोज भी होता है. आपके सर्किल मे कोई फैशन डिज़ाइनर दोस्त हो तो आपका तो वो डॉग की ड्रेस बना सकते हैं. और फिर एक रैंप बनाया जाता है जहां लोग अपने डॉग के साथ वॉक करते हैं.”

डॉग पॉर्लर्स की ये दुनिया बहुत हसीन दिखती है लेकिन ये भी सच है कि इन सुविधाओं के दाम कम नहीं और कुछ ही लोग हैं जो इन्हें ख़रीद सकते हैं.

जो भी हो बॉडी स्पा और स्विमिंग का मज़ा उठाते कुत्तों को देखकर एकबारगी उनसे रश्क ज़रूर होता है.

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