माओत्से तुंग का मज़ाक बनाने पर टीवी एंकर फंसे

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चीन की सरकार ने एक टीवी चैनल को आदेश दिए हैं कि वह चीन की सांस्कृतिक क्रांति के नेता माओत्से तुंग की मज़ाक उड़ाने वाले एक मशहूर टीवी एंकर को कड़ी सज़ा दे.
बी फूजिआन नाम के इस टीवी एंकर ने एक निजी आयोजन में एक गाने की पैरोडी करते हुए तीखे शब्दों में माओत्से तुंग का कथित अपमान किया था.
इस साल अप्रैल महीने में बी फूजिआन का एक वीडियो ऑनलाइन आया.
इसमें वे एक निजी डिनर पार्टी में माओ के दौर के एक गीत ''टेकिंग टाइगर माउंटेन बाय स्ट्रेटेजी'' की नकल कर रहे थे.
यह गीत चीन की सांस्कृतिक क्रांति के दौर के बारे में है.
निलंबन

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वीडियो में दिखाई दे रहा है कि फूजिआन इस गीत की नकल करते हुए उसमें माओ की आलोचना करती तीखी टिप्पणियां भी जोड़ रहे हैं और माओ के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं.
इस वीडियो के सामने आने के बाद से फूजिआन को चैनल से निलंबित कर दिया गया था.
लेकिन पीपल्स डेली अख़बार के मुताबिक, अधिकारियों ने फूजिआन के नियोक्ता, सीसीटीवी (चाइना सेंट्रल टीवी) को आदेश दिया है कि वे फूजिआन को राजनीतिक अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए और भी कड़ा दंड दे.
सीमारेखा का ध्यान

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बी फूजिआन को मिली सज़ा के बारे में सोशल नेटवर्किंग साइट वीबो में दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़ कर देख रहे हैं तो कुछ का कहना है कि उन्हें सज़ा दी जानी चाहिए.
यूरोप में रहने वाली चीनी लेखिका डिएने वी लिआंग ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है ''..जब तक आप उस सीमा रेखा को पार नहीं कर लेते तब तक आपको पता ही नहीं चलता कि ऐसी कोई सीमा भी थी."
"ये सीमा रेखा इधर उधर बदलती रहती है. क्योंकि कानून के हिसाब से अंतिम निर्णय कम्युनिस्ट पार्टी को लेना होता है और इसलिए ये किसी एक खास आदमी पर या फिर पार्टी के उस समय के मिजाज़ पर निर्भर करता है.. "
माफ़ी मांगी थी
हालांकि बी फूजिआन ने इस घटना के लिए अप्रेल में वीबो माइक्रोब्लाग के अपने एकाउंट में एक बयान डालकर माफी भी मांगी थी.
उन्होंने लिखा था कि इस घटना के बाद उन्होंने ये सबक सीखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के चलते उन्हें कुछ भी बोलने से पहले संयम बरतना चाहिए..
दुनियाभर के महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यक्तित्वों में शुमार माओत्से तुंग विवादित नेता रहे हैं.
एक तरफ उनकी सांस्कृतिक क्रांति के प्रसंशकों की काफी तादाद है तो दूसरी ओर इस क्रांति के आलोचकों की भी कमी नहीं है.
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