हज़ारों हेक्टेयर पर सुरक्षा बलों का कब्ज़ा

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर की मौजूदा सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान बताया कि जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा बलों ने हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन पर नाजायज़ तौर पर क़ब्ज़ा किया है.
25 मार्च 2015 को राज्य विधान परिषद में जम्मू और कश्मीर सरकार के बागवानी विभाग के मंत्री अब्दुल रहमान वेरी ने विपक्षी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के एमएलसी डॉक्टर बशीर अहमद के सवाल का लिखित जवाब देते हुए ये जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि इस समय राज्य में सुरक्षा बलों ने 1,70,696 कनाल और सात मरला यानी लगभग 8,480 हेक्टेयर ज़मीन पर नाजायज़ तौर पर क़ब्ज़ा किया है.
करोड़ों खर्च

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मंत्री के अनुसार जम्मू और कश्मीर में इस समय 1,307 प्राइवेट बिल्डिंग्स, 287 सरकारी बिल्डिंग्स, 27 होटल, पांच सिनेमा हॉल, तीन हॉस्पिटल, 18 इंडस्ट्रियल यूनिट्स सुरक्षा बलों के क़ब्ज़े में हैं.
अब्दुल रहमान वेरी ने सदन को इस बात की भी सूचना दी कि साल 2001 से लेकर अब तक सरकार ने सुरक्षा बलों को दूसरी जगहों पर रखने के लिए 75 करोड़ की रक़म खर्च की है.
मंत्री ने विधान परिषद को सेना और अन्य सुरक्षा बलों को दी गई ज़मीन के बारे में बताया कि 1,171 कनाल 19 मरले यानी लगभग 59 हेक्टेयर ज़मीन लीज और लाइसेंस पर दी गई है.
पेचीदा मामला!

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सदन को इस बात से आगाह करते हुए अब्दुल रहमान वेरी ने बताया कि सेना और सुरक्षा बलों ने जम्मू और कश्मीर राज्य में कुल 2,36,738 कनाल और छह मरले यानी लगभग 11,760 हेक्टेयर ज़मीन को हासिल किया है.
बागवानी विभाग के मंत्री अब्दुल रहमान वेरी से बीबीसी हिंदी ने पूछा कि सरकार किस तरह से इस मामले को हल करेगी.
उनका कहना था, "ये मामला एक दिन में हल नहीं हो सकता है. इसमें समय लगेगा. इसमें ये भी होगा कि सिविल मिलिट्री कॉन्फ्रेंस के दौरान ये मुदा उठाया जाएगा."
बीबीसी ने पूछा कि आखिर सेना और सुरक्षा बलों की इतनी बड़ी तादाद कहाँ रखी जाएगी, तो उनका जवाब था, "ये मामला पेचीदा है. मैं इस मसले पर अभी ज्यादा बात नहीं कर सकता."
ज़मीन के मामले

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साल 1990 के बाद ये दूसरा मौक़ा है जब भारत सरकार या फिर जम्मू और कश्मीर सरकार ने सेना और सुरक्षा बलों के क़ब्ज़े में ज़मीन को वापस लेने की बात कही है.

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वर्ष 2007 में केंद्र ने उस ज़माने के रक्षा सचिव शेखर दत्त की अगुवाई में एक कमेटी बनाई गई थी जिसको ये काम सौंपा गया था कि वह राज्य में सुरक्षा बलों के क़ब्ज़े में गैर क़ानूनी तौर रखी गई ज़मीन के मामले को देखे.
ये क़दम उस समय केंद्र ने उठाया था जब गुलाम नबी आज़ाद की अगुवाई में जम्मू और कश्मीर सरकार चल रही थी. उस दौरान पीडीपी ने राज्य में सुरक्षा बलों की तादाद कम करने और प्राइवेट और सरकारी इमारतों से हटाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी.
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