इच्छा-मृत्यु हो क़ानूनी?: सुप्रीम कोर्ट

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भारत में सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा-मृत्यु को क़ानूनी मान्यता दिए जाने संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार और राज्यों को नोटिस भेजकर उनकी राय मांगी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि जब एक बीमार व्यक्ति ऐसी हालत में पहुंच जाए जहां उसके बचने की संभावना नहीं हो, तो उसे जीवन रक्षक उपकरणों की मदद लेने से मना करने का अधिकार होना चाहिए या नहीं?

हालांकि केंद्र की तरफ़ से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार को कहा था कि यह आत्महत्या के समान है और देश में इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती.

उन्होंने कहा कि इस मामले पर चर्चा और फ़ैसला संसद में ही होना चाहिए.

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'सिर्फ़ संविधान से जुड़ा नहीं'

पीठ में शामिल न्यायाधीशों ने पूछा है कि इस तरह के क़ानून का दुरुपयोग रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्यों की भी राय ली जानी चाहिए.

संवैधानिक पीठ ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ़ संविधान से ही जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह नैतिकता, धर्म और चिकित्सा विज्ञान से भी संबंधित है.

केंद्र और राज्यों को आठ हफ़्ते के भीतर नोटिस का जवाब देना है.

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