आवारा कुत्ते बन रहे हैं बाघों के लिए ख़तरा

इमेज स्रोत, Dr Yogesh Dudhpachare
- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
महाराष्ट्र में बाघों के लिए आवारा कुत्ते ख़तरा बन गए हैं. मामला महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले का है, जहाँ स्थित है ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प.
इस बाघ अभयारण्य में 40 से ज़्यादा बाघ रहते हैं.
दरअसल वन विभाग का कहना है कि चंद्रपुर महानगर पालिका शहर के आवारा कुत्तों को ले जाकर पास के जंगल में छोड़ रहा है. इससे इस जंगल के वन्य जीवों की जान खतरे में है.
महाराष्ट्र वन विभाग ने चंद्रपुर महानगर पालिका को इस पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है, हालाँकि महानगर पालिका ऐसा कोई नोटिस मिलने से इनकार कर रही है.
चंद्रपुर वन विभाग के विभागीय वन अधिकारी एनडी चौधरी ने बताया, ''चंद्रपुर महानगर पालिका की ओर से शहर के अवारा कुत्तों को लोहारा और घंटा चौकी के घने जंगलों में छोड़े जाने के मामले को ग्रीन प्लैनेट नाम की एक स्वयंसेवी संस्था ने उजागर किया.''
आवारा कुत्ते
उन्होंने बताया, "संस्था के कार्यकर्ताओं ने इस मामले की तह में जाकर हमें पूरी जानकारी मुहैया कराई. इसके आधार पर हमने चंद्रपुर महानगर पालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है."
चौधरी के मुताबिक, चंद्रपुर महानगर पालिका के अधिकारी रात के अंधेरे में शहर के आवारा कुत्तों को पकड़कर लोहारा और घंटा चौकी जंगल के पास छोड़ देते हैं. वह बताते हैं कि ग्रीन प्लैनेट संस्था के कार्यकर्ताओं ने इन गाड़ियों का पीछा कर उनकी फ़ोटो भी ली है.
चौधरी ने बताया कि वन्य जीवों के नज़रिए से यह बहुत ही ख़तरनाक़ बात है, क्योंकि कुत्तों की वजह से जंगल में 'डिस्टेंपर' वायरस वन्य जीवों में फैलता है. यह जानलेवा होता है.
कुछ साल पहले राज्य के अन्य अभयारण्यों में कुत्तों की वजह से कई हिरण और जंगली भैंसे मर गए. लोहारा और घंटा चौकी का जंगल ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प से जुड़ा है इसलिए इन कुत्तों की वजह से डिस्टेंपर वायरस वहां के वन्य जीवों में फैलने का खतरा है.
कारण बताओ नोटिस
चौधरी ने बताया कि जानकारी और सबूतों के आधार पर शनिवार को चंद्रपुर महानगर पालिका आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
ग्रीन प्लैनेट संस्था के संचालक योगेश दूधपाचारे ने कहा, ''चंद्रपुर महानगर पालिका हमेशा ही आवारा कुत्ते लोहारा के आस-पास छोड़ देते हैं. इस इलाक़े में पिछले कुछ वर्षों में लोगों पर तेंदुए के हमले की कई घटनाएं हुई हैं. इस घटना की वजह से मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ सकता है, क्योंकि कुत्ते तेंदुए का मनपसंद खाना हैं. इसकी वजह से वह इंसानों के इलाक़े की ओर आकर्षित होते हैं.''
उन्होंने कहा कि डिस्टेंपर वायरस जानलेवा है क्योंकि इसका कोई इलाज नहीं है. एक बार अगर कोई जानवर इससे संक्रमित हो गया तो उसकी मौत निश्चित हो जाती है. लेकिन इसका संक्रमण बाकी जानवरों में भी होता है.
चंद्रपुर महानगर पालिका के आयुक्त प्रकाश बोखड़ ने वन विभाग की ओर से किसी भी तरह का कारण बताओ नोटिस मिलने से इनकार किया है.
उन्होंने कहा, ''वह कारण बताओ नोटिस नहीं बल्कि एक पत्र है. शहर के आवारा कुत्तों को लोहारा जंगल में छोड़े जाने की मुझे कोई ख़बर नहीं है. मैं इस तरह की हर घटना की खबर नहीं रख सकता. स्वच्छता विभाग के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. अगर यह बात सच साबित हुई तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.''
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