नोटों की माला पर आयोग की नजर

नोटों की माला (फ़ाइल फोटो)
इमेज कैप्शन, नया निगरानी तंत्र चुनावी दलों की ओर से किए जाने वाले बेतहाशा खर्चों पर निगरानी रखेगा.

नोटों की माला के मुद्दे ने चुनाव आयोग को चिंतित कर दिया है.

आयोग जल्दी ही राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले बेतहाशा खर्चों की निगरानी के लिए एक अलग विभाग का गठन करेगा.

चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने कहा, “खर्च निगरानी विभाग का गठन किया जा रहा है. इसमें आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रखे जाएंगे.”

उन्होंने कहा कि नए विभाग का गठन अगले कुछ महीनों में हो जाएगा.

क़ुरैशी ने संकेत दिए कि नया विभाग इस साल नवंबर में बिहार में होने वाले चुनावों के पहले ही गठित कर लिया जाएगा.

हाल ही में मायावती को नोटों की माला पहनाए जाने के मुद्दे पर क़ुरैशी ने कहा, “नोटों की माला में इस्तेमाल धन राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की श्रेणी में आएगा. नोटों की माला पहनाना पुरानी बात है लेकिन अब इसका स्वरुप बदलने लगा है.”

उन्होंने कहा, “चूंकि इस समय कोई चुनाव नहीं हो रहे हैं. इसलिए यह चुनावी क़ानूनों का उल्लंघन नहीं लगता है.”

धन बल को लेकर चिंता

चुनाव आयुक्त ने कहा कि धन बल के इस्तेमाल को लेकर वे चिंतित हैं और इस पर लगाम लगाए जाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि आजकल चुनावी दल शराब, साड़ी और धोती बांटकर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं और चुनावी आचार संहिता से इन सबको रोकने में मदद मिलती है.

बिहार में होने वाले विधान सभा चुनावों पर कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के पर्याप्त इंतजाम किए हैं.

क़ुरैशी ने कहा कि अब मतदाता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा जागरूक हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि इस साल बिहार में होने वाले चुनाव पिछले दो चुनावों से अलग नहीं होंगे और इस बार कुछ अलग चुनौतियों की उम्मीद हम नहीं कर रहे हैं.