गो फर्स्ट एयरलाइंस कैसे दिवालिया होने के कगार तक पहुंची?

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- Author, अर्चना शुक्ला
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
देश के सभी एयरपोर्ट्स पर गो फर्स्ट एयरलाइंस के काउंटरों पर सन्नाटा है. एयरलाइंस के कस्टमर केयर की लाइंस परेशान यात्रियों के कॉल्स से लगातार व्यस्त जा रही हैं.
भारत की इस बजट एयरलाइंस ने दो, तीन और चार मई की अपनी सभी फ्लाइटों को रद्द कर दिया है, इतना ही नहीं कंपनी ने दिवालिया होने की प्रक्रिया के लिए आवेदन भी दिया है.
एयरलाइन की ओर से प्रभावित यात्रियों को पूरे पैसे लौटाने का भरोसा भी दिया जा रहा है. लेकिन देश के 34 स्थानों पर गो फर्स्ट एयरलाइंस के लिए टिकट बुक करने वाले यात्री काफ़ी नाराज़ हैं क्योंकि आख़िरी मिनट में वे एक तरह से फंस गए हैं.
इस पूरे वाक़ये ने एक तरह से 2019 की याद दिला दी है, जब उस वक्त की सबसे बड़ी एयरलाइंस जेट एयरवेज़ की उड़ानें अचानक बंद हो गई थीं.
2019 में उस वक्त गो फर्स्ट अपने विस्तार को देखते हुए आईपीओ लाने की तैयारी कर रहा था. लेकिन चार सालों के अंदर ही जेट एयरवेज़ के बाद गो फर्स्ट दिवालिया होने का दावा करने वाली पहली प्रमुख एयरलाइन कंपनी बन गई है. दिवालिया होने के लिए दिए गए कंपनी के आवेदन पर नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल चार मई को सुनवाई करेगा.
हालांकि, गो फर्स्ट की दिवालिया घोषित किए जाने संबंधित याचिका जेट एयरवेज से अलग है. यह वित्तीय गड़बड़ियों पर आधारित नहीं है, बल्कि कहा गया है कि इंजन संबंधी समस्याओं के चलते कंपनी की आमदनी प्रभावित हुई है. गो फर्स्ट की ओर से दी गई याचिका में यह भी कहा है कि कंपनी ने अब तक कर्ज़ अदायगी की किस्तों को समय से चुकाया है.
गो फर्स्ट ने अपने विमानों की उड़ान को बंद करने की वजह अमेरिकी इंजन निर्माता प्रैट एंड व्हिटनी की ओर से मिले इंजनों का नाकाम होना बताया है, कंपनी के मुताबिक़, इसके चलते एयरलाइन को नकदी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
गो फर्स्ट ने कहा कि इस समस्या के चलते उसे 25 विमानों को उड़ान से हटाना पड़ा. इसमें आधे एयरबस ए-320 नियो विमान हैं, इसके चलते कंपनी को 10,800 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है.
इंजन न मिलने से उड़ानों पर हुआ असर
एयरलाइन ने एक बयान में प्रैट एंड व्हिटनी पर यह भी आरोप लगाया है कि अंतरिम राहत के लिए हुए फ़ैसले के मुताबिक़, 27 अप्रैल, 2023 तक कम से कम दस चालू इंजन मिलने थे, जो नहीं मिले.
इसके जवाब में, प्रैट एंड व्हिटनी ने कहा कि वह मार्च 2023 में हुए अंतरिम राहत संबंधी फ़ैसले का अनुपालन कर रहा था और यह आगे टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि "यह अब अदालती मामला है."
गो फर्स्ट एयरलाइन के बेड़े में लगभग नब्बे प्रतिशत इंजन प्रैट एंड व्हिटनी के इंजन वाले ए320 नियो विमान हैं. स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता और इंजन निर्माता की ओर से रेट्रो फिटेड इंजनों की आपूर्ति में देरी के कारण कई विमानों को 2020 से सेवा से बाहर करना पड़ा था.
लगभग आधे विमानों की अनुपलब्ध के चलते कंपनी आए दिन उड़ानों को निरस्त करने लगी और इसने आर्थिक स्थिति को पटरी से उतार दिया और बार-बार उड़ान रद्द करने का कारण बना. गो फर्स्ट भारत की पांचवीं सबसे बड़ी एयरलाइन थी.
भारतीय विमानन क्षेत्र की तेज़ गति के विकास ने एयरलाइन कंपनियों को पर्याप्त अवसर मुहैया कराया है. लेकिन इसी दौरान बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अत्यधिक कर्ज़ जोख़िम और लगातार बढ़ते परिचालन लागतों से पैदा हुए वित्तीय संकट के कारण कई एयरलाइन कंपनियों का अपना काम समेटना पड़ा है.
जेट एयरवेज, किंगफिशर एयरलाइंस, डेक्कन एयर, पैरामाउंट एयरवेज, मोडिलुफ्ट, सहारा एयरलाइंस और एमडीएलआर एयरलाइंस जैसी कंपनियां इनमें शामिल हैं.
फिर से उड़ान सेवाएं शुरू करने की मंजूरी के बावजूद, दिवालिया घोषित होने संबंधी लंबी प्रक्रिया के चलते जेट एयरवेज अबतक संचालन शुरू नहीं कर सकी है.

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एयरलाइन की आर्थिक सेहत कैसे बिगड़ी?
एविएशन कंसल्टेंसी फर्म मार्टिन कंसल्टिंग के संस्थापक और सीईओ मार्क मार्टिन का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी एयरलाइन कंपनी को विमान संबंधी कंपोनेंट नहीं मिलने के चलते सेवा बंद करना पड़ा है.
धीरे-धीरे विस्तार की रणनीति पर काम करने वाली गो फर्स्ट का कहना है कि प्रैट एंड व्हिटनी इंजनों की नाकामी की समस्या से पहले यह 2020 तक लगातार लाभ वाली एयरलाइन रही है. हालांकि कंपनी ने अपनी याचिका में कहा है कि कोरोना संकट के दौरान भी कंपनी की आर्थिक सेहत पर असर पड़ा था.
हालांकि अब गो फर्स्ट को बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के चलते लीज़ पर लिए गए विमानों को भी वापस करना पड़ा है. ईंधन कंपनियों द्वारा एयरलाइन को कैश एंड कैरी वाले वर्ग में रखा गया था, यानी हर दिन उड़ान के लिए ईंधन का भुगतान करना भी कंपनी के लिए समस्या बन गया था.
हालांकि प्रमोटर कंपनी वाडिया समूह ने एयरलाइन में लगातार पैसा लगाया और करीब 6500 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसके अलावा सरकार की ओर आपातकालीन क्रेडिट लाइन (सरकार के नियमों के मुताबिक़ 1500 करोड़ की क्रेडिट सुविधा) की सुविधा भी थी.
इसके बावजूद एयरलाइन को दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन करना पड़ा क्योंकि इसका संचालन ठप हो गया है.
कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि गो फर्स्ट प्रबंधन कारोबार से बाहर नहीं हो रहा है बल्कि कंपनी को उबारने की योजना पर काम कर रहा है. गो फर्स्ट के मुख्य कार्यकारी कौशिक खोना ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि दिवालिया होने की याचिका का उद्देश्य एयरलाइन को पुनर्जीवित करना है, इसे बेचना नहीं है.

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भारतीय विमानन बाज़ार पर प्रभाव
गो फर्स्ट का पतन एक तरह से देश के अंदर एयरलाइन क्षेत्र में भयंकर प्रतिस्पर्धा को भी रेखांकित करता है, जिसने महामारी के बाद इस सेक्टर में बहुत अच्छा ग्रोथ भी देखा है. घरेलू एयरलाइंस ने 2023 के पहले तीन महीनों में 3.75 करोड़ से अधिक यात्रियों को ढोया, जो एक साल पहले की तुलना में 51.7% की वृद्धि है.
सीएपीए इंडिया एयरलाइन ट्रैफिक आउटलुक के अनुसार, भारत में 2023 में सालाना 13.7 करोड़ लोग हवाई सफ़र करते हैं जो 2030 तक 35 करोड़ यात्रियों तक पहुंच सकता है.
गो फर्स्ट की उड़ानों का बंद होना एक तरह से इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के सामने बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका है.
देश के शेयर बाज़ारों में सूचीबद्ध एविएशन शेयरों में मंगलवार को कारोबार में तेज़ी देखने को मिली है. गो फर्स्ट की नवंबर, 2022 में बाज़ार में 10.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी जो मार्च 2023 में लगभग सात प्रतिशत रह गई थी.
जिन रूटों पर गो फ़र्स्ट की उड़ानें थी, उनके हवाई किराए में अगले 3-4 महीनों में तेज़ी से वृद्धि देखने की उम्मीद है. मार्क मार्टिन का कहना है कि कई एयरलाइन रूटों पर टिकट के दाम 50-60% तक बढ़ सकते हैं.
उन्होंने बताया, "मांग के मुताबिक़ आपूर्ति नहीं होगी. अगर गो फर्स्ट बंद हो जाता है तो 50 से ज़्यादा विमान खड़े हो जाएंगे. अन्य एयरलाइंस भी फंसी हुई हैं. मांग काफ़ी अधिक है और मौजूदा एयरलाइंस के पास इसे पूरा करने की क्षमता भी नहीं है."
एविएशन एनॉलिटिक्स फर्म सिरियम के आंकड़ों के अनुसार, मई 2023 के दौरान, गो फर्स्ट को 6,225 उड़ानें संचालित करने के लिए निर्धारित किया गया था यानी कंपनी 11 लाख यात्रियों को सेवा देने वाली थी.

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और विमान कंपनियों पर भी संकट छाया
एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इंजन और एयरक्राफ्ट की आपूर्ति का मुद्दा सभी एयरलाइंस के लिए समस्या है.
गो फर्स्ट एकमात्र एयरलाइन नहीं है जो प्रैट और व्हिटनी की ओर से ख़राब इंजन की आपूर्ति से प्रभावित हुई है. एक और लो कॉस्ट विमानन सेवा इंडिगो भी फंसी हुई है. इन दो एयरलाइंस के करीब 60 विमान स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण उड़ान भरने की स्थिति में नहीं हैं.
हालांकि इंडिगो के पास 250 से ज़्यादा विमानों का बेड़ा है, जिसमें अभी भी पुराने लेकिन टिकाऊ इंजनों पर चलने वाले विमानों की एक बड़ी संख्या है. इससे इंडिगो को संकट को संभालने में मदद मिली है.
सीरियम शो के आंकड़ों के मुताबिक़, अन्य परिचालन कारणों के चलते 102 विमान उड़ान नहीं भर रहे हैं.
एविएशन एडवाइजरी एंड रिसर्च फर्म के एक विश्लेषक ने पहचान ज़ाहिर नहीं करने की शर्त के साथ कहा कि अगले कुछ महीनों में संकट बढ़ेगा क्योंकि नए विमानों की आपूर्ति धीमी है और इंजन आपूर्ति में भी संकट बना हुआ है.
वह नाम नहीं बताना चाहते क्योंकि मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं और उनकी फर्म उन बैंकों के साथ काम करती है जो एयरलाइनों को कर्ज़ देते हैं.
भारत के शीर्ष पांच घरेलू वाहकों में से एक, स्पाइसजेट भी वित्तीय संकट से जूझ रहा है. हर तिमाही में कंपनी को भारी घाटा हो रहा है. पिछले वर्ष अन्य एयरलाइनों की तुलना में कंपनी के ज़्यादा विमान पुराने पड़ने के चलते उड़ान के क़ाबिल नहीं रह गए हैं, इसके चलते एयरलाइन नियामक भी कंपनी पर नज़र रखे हुए हैं.
एविएशन एडवाइजरी एंड रिसर्च फर्म के एक विश्लेषक ने बताया, "कम लागत वाली विमानन कंपनियों के बीच तनाव बढ़ रहा है. स्पाइसजेट सरकार की आपातकालीन क्रेडिट लाइन (1500 करोड़ की क्रेडिट सुविधा) पर भी निर्भर है."
हालांकि, 2024 के बाद भारतीय विमानन बाज़ार की वृद्धि की कहानी अभी भी बनी हुई है, लेकिन इस विश्लेषक का दावा है कि बाज़ार में दो-तीन कंपनियों का ही दबदबा रहेगा.
बीते साल नवंबर में, देश की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी वाहक एयर इंडिया और विस्तारा ने घोषणा की कि वे विलय करने की योजना बना रहे हैं. इस साल फरवरी में एयर इंडिया ने बाज़ार की संभावनाओं को देखते हुए बोइंग इंक और एयरबस से 470 विमान ख़रीदने का ऐतिहासिक ऑर्डर दिया था.
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