एयर इंडिया की 470 विमान खरीदने की डील से क्या बदलेगा?

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मंगलवार को 470 यात्री विमान ख़रीदने के लिए बोइंग और एयरबस विमान बनाने वाली कंपनियों के साथ एयर इंडिया के ऐतिहासिक सौदे से तीन महाद्वीपों - एशिया, अमेरिका और यूरोप में खुशी ज़ाहिर की जा रही है.
दुनियाभर में अब तक के सब से बड़े विमान समझौते के साथ ही भारत की उड्डयन उद्योग ने एक ऊंची उड़ान भर ली है.
उड्डयन उद्योग के विशेषज्ञ कपिल काक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये आर्डर जियोपॉलिटिकल लिहाज़ से बेहद संतुलित है.
वो कहते हैं, "एक तरीक़े से देखें तो आधे विमान अमेरिका से ले रहे हैं और आधे फ्रांस से. ये जियोपॉलिटिकल बैलेंसिंग एक्ट है. इससे दुनिया में एक सिग्नल जा रहा है कि भारत को देखते हैं तो स्केल देखिये, कितने बड़े पैमाने पर भारत ऑर्डर दे रहा है."
बोइंग और एयरबस को दिया गया एयर इंडिया का ये ऑर्डर दुनिया का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा है.
इससे पहले 450 विमानों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा ऑर्डर 2011 में अमेरिकन एयरलाइन्स ने दिया था.
एयर इंडिया ने विमानों के साथ इनके सैकड़ों इंजन के ऑर्डर भी दिए जो अधिकतर जनरल इलेक्ट्रिक या रोल्स रॉयस जैसी कंपनियों की झोली में गिरे.
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हर तरफ़ जश्न का माहौल
एयर इंडिया ने जिन 470 बड़े विमानों का ऑर्डर किया है उनमें अमेरिकी कंपनी बोइंग का हिस्सा 220 विमानों का है. तो अमेरिका में ख़ुशी इस बात की है कि इस सौदे से देश के 50 राज्यों में से 44 में 10 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ख़ुद कहा है, "यह समझौता 44 राज्यों में 10 लाख से अधिक अमेरिकी नौकरियों को सपोर्ट करेगा. किसी को चार साल की कॉलेज की डिग्री की आवश्यकता नहीं होगी."
"यह घोषणा अमेरिका-भारत आर्थिक साझेदारी की ताक़त को भी दर्शाता है. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के साथ, मैं अपनी साझेदारी को और भी गहरा करने की आशा करता हूं क्योंकि हम साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना जारी रखना चाहते हैं ताकि हम अपने सभी नागरिकों के लिए एक अधिक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य बना सकें."
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ऑर्डर किए गए 470 विमानों में से 250 यूरोप की एयरबस कंपनी के हिस्से में आए हैं. इसलिए फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन में जश्न का माहौल है क्योंकि इस समझौते से 12-13 लाख नौकरियां पैदा होंगी.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने एक ट्वीट में कहा, "एयरबस और टाटा संस (एयर इंडिया की मालिक कंपनी) ने आज सुबह जिस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, वह भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी में एक नया चरण है."
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एयरबस, यूरोपीय विमान निर्माण कंपनी है. बोइंग के बाद वाणिज्यिक विमानों की दूसरी बड़ी कंपनी है. इस कंपनी में 80 फ़ीसदी हिस्सेदारी ईएडीएस की है 20 फ़ीसदी ब्रिटिश कंपनी बीएई की.
भारत में ख़ुशी इस बात कि है कि देश के उड्डयन क्षेत्र का तेज़ी से विस्तार होगा.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाबी ट्वीट में कहा, "मैं अपने मित्र इमैनुएल मैक्रों को एयर इंडिया और एयरबस के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी के शुभारंभ में शामिल होने के लिए धन्यवाद देता हूं जो भारतीय विमानन क्षेत्र को और मजबूत करेगा और दोनों देशों में अवसर पैदा करेगा. यह मजबूत भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है."
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अश्विनी फडनिस सालों से उड्डयन उद्योग पर नज़र रखे हुए हैं. उनका कहना है कि ये समझौता सभी पार्टीज़ के लिए गुड न्यूज़ है.
वो कहते हैं, "जहाँ तक सप्लाई चेन का सवाल है वो इतनी जल्दी पता नहीं लगेगा. इस ज़माने में सभी बड़े समझौते होते हैं. आपने राष्ट्रपति बाइडन का बयान देखा होगा. इस समझौते से 40 से अधिक राज्यों में 10 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी."
"अमेरिका की अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है इस समय और इतनी सारी नौकरियां एक ही ऑर्डर से पैदा हो रही हैं तो इसका महत्त्व तो होगा."
वो कहते हैं, "ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि रॉल्स रॉयस के इंजन इंग्लैंड में बनेंगे जिससे वेल्स और डर्बीशर में नौकरियां और अवसर पैदा होंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा है कि एयरबस जो भी जहाज़ बनाता है उसके कई पुर्ज़े भारत में बनते हैं, चाहे जहाज़ की असेंबली फ्रांस में होती हो लेकिन काफ़ी हद तक डिज़ाइन और पुर्ज़े भारत में बनते हैं. तो ये हर जगह के लिए एक जीत की स्थिति है."
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मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉल द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की और इस समझौते को एक लैंडमार्क समझौता बताया.
प्रधानमंत्री ने कहा, "अगले 15 वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने जा रहा है. अनुमान है कि भारत को 2,000 से अधिक विमानों की आवश्यकता होगी और आज की ऐतिहासिक घोषणा इस बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगी."

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एयर इंडिया के नए दौर का आग़ाज़?
एयर इंडिया ने एक ट्वीट में कहा, "एयर इंडिया के एक नए युग में आपका स्वागत है. हम हमेशा राष्ट्र के पंख रहे हैं और अब हम एक मिशन पर हैं. #रेडीफॉरमोर."
एयरबस के सीईओ गुइलौम फाउरी ने भारतीय प्रधानमंत्री से वीडियो कॉल में कहा, "आज भारत के लिए, एयर इंडिया के लिए और एयरबस के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. ऑर्डर का आकार भारतीय विमानन उद्योग में विकास की भूख को प्रदर्शित करता है. यह दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है."
एयर इंडिया को एक साल पहले टाटा संस ने भारत सरकार से खरीदा था. पिछले साल फरवरी में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि एयरलाइन का रणनीतिक विनिवेश पूरा हो गया है और सरकार को टाटा संस की सहायक कंपनी टैलेस प्राइवेट लिमिटेड से 2,700 करोड़ रुपये मिले हैं.
ख़बरों के मुताबिक़ केंद्र ने 61,000 करोड़ रुपये के क़र्ज में से 46,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने की ज़िम्मेदारी ली थी.
कपिल काक की राय में अगर "एयर इंडिया अब भी भारत सरकार के पास होता तो वो इस ख़रीदारी को अफ़ोर्ड नहीं कर सकता था."
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टाटा समूह ने 1932 में एयरलाइन शुरू करने के बाद भारत में वाणिज्यिक विमानन का बीड़ा उठाया. उसे 1953 में सरकार ने अपने नियंत्रण में लिया था.
सवाल ये है कि जो कंपनी पिछले साल तक क़र्ज़ों में डूबी थी आज वो 70 अरब डॉलर की लागत से 470 बड़े विमानों का सौदा कैसे कर सकती है?
इसके जवाब में कपिल काक कहते हैं, "एयर इंडिया की जो लीडरशिप है वो हिकमत अमली से काम लेती है, रणनीतिक तरीक़े से सोचती है और उनके पास पैसों की कमी नहीं है. उनका आत्मविश्वास का लेवल बहुत ऊंचा है. अगर एयर इंडिया अब भी भारत सरकार के पास होता तो वो इस ख़रीदारी को अफ़ोर्ड नहीं कर सकते थे."
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सारे 470 विमान कल ही भारत में आ जायेंगे. एयर इंडिया ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि नए विमानों में से पहली खेप 2023 के मध्य या अंत में सेवा में प्रवेश करेगी, जबकि अधिकांश विमान के 2025 के मध्य से आने की उम्मीद है.
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एयर इंडिया के पास इतने ढेर सारे विमान और इंजन ख़रीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे?
इसके जवाब में अश्विनी फडनिस कारों की ख़रीदारी से तुलना करते हैं. वो कहते हैं, "जैसे आप कोई गाड़ी ख़रीदने जाते हैं तो कुछ पैसे शोरूम को डाउन पेमेंट में अदा करते हैं और ज़्यादा बड़ी राशि आप बैंक से फ़ाइनेंस कराते हैं और हर महीने क़र्ज़ों की अदाएगी करते हैं."
"ठीक उसी तरह एयर इंडिया को एक विमान का पूरा दाम एयरबस या बोइंग को देने नहीं होगा, विमान लीज़ कंपनियां या बड़े बैंक एयरबस या बोईंग से जहाज़ ख़रीदते हैं और फिर एयरलाइन्स उनसे क़र्ज़ों पर ख़रीदती है और हर महीने इसकी क़िस्त अदा करती है."
अश्विनी फडनिस के मुताबिक़ एयर इंडिया सारे विमानों को एक बार नहीं ख़रीदेगा, विमानों की डिलीवरी अगले 7 ये 8 सालों में पूरी होगी.
टाटा एयर इंडिया को विस्तारा एयरलाइंस के साथ एकीकृत कर रहा है, जिसे वह सिंगापुर एयरलाइंस के साथ संयुक्त रूप से चलाता है, और एयर एशिया इंडिया के साथ, जिसे वह मलेशियाई डिस्काउंट ऑपरेटर एयर एशिया के साथ चलाता है.

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एयरबस और बोइंग की चुनौतियां
इस समय एयरबस को कई तरह की चुनौतियों का सामना है. इंजनों के अलावा, उसे वर्कर्स की कमी, हड़तालें और विमान के पुर्जों की उपलब्धता की समस्या है.
इस कारण विमानों की डिलीवरी में देरी हो रही है और विमान समय पर एयरलाइंस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
विशेषज्ञ कहते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े A320 ग्राहक, कम लागत वाले भारतीय एयरलाइंस इंडिगो को इंजन के प्रमुख पुर्जों की कमी के कारण अपने बेड़े का 10 फ़ीसदी, या लगभग 30 विमानों को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
कोरोना महामारी के दौरान विमानों के प्रोडक्शन का असर बोइंग कंपनी पर भी हुआ है.
अश्विनी फडनिस के मुताबिक़ टाटा संस के साथ हुई इस बड़ी डील से दोनों कंपनियों को फ़ायदा होगा और भारत को भी फ़ायदा होगा.
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