एमएच370: सात साल पहले लापता हुआ मलेशियाई विमान क्या मिल सकेगा?

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- Author, साइमन ब्राउनिंग
- पदनाम, बीबीसी बिज़नेस रिपोर्टर
आज से सात साल पहले मलेशिया का एक यात्री विमान एमएच370 239 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के साथ लापता हो गया था. ये विमान अब तक नहीं मिल सका है. ये विमानन के इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है.
लेकिन एक ब्रितानी एयरोनॉटिकल इंजीनियर को लगता है कि उन्होंने अपनी गणना से इस बात का पता लगा लिया है कि एमएच370 कहां क्रैश हुआ होगा.
रिचर्ड गोडफ्रे ने एक साल से अधिक समय तक एमएच370 पर अध्य्यन किया है. उन्हें लगता है कि ये बोइंग 777 विमान पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पर्थ से क़रीब दो हज़ार किलोमीटर दूर समंदर में गिरा होगा.
एमएच370 मार्च 2014 में उड़ान के दौरान रडार से लापता हो गया था.
बीबीसी से बात करते हुए गोडफ्रे कहते हैं कि हो सकता है कि हम इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को जवाब दे सकें.
वो कहते हैं, उड़ान भरने वाले लोग, उड्डयन उद्योग और आम लोगों को हम ये बता सकेंगे कि आख़िरकार एमएच370 के साथ क्या हुआ था. इससे भविष्य के हादसों से भी बचा जा सकेगा.
अपनी गणना के लिए उन्होंने उस डेटा का इस्तेमाल किया जिसे पहले अलग-अलग रखा गया था. इसी के आधार पर वो दक्षिण हिंद महासागर की इस जगह पर पहुंचे हैं.
गोडफ्रे कहते हैं कि ये सब करना एक जटिल काम था. वो कहते हैं कि इससे पहले इसे लेकर सतही सोच तो थी लेकिन काम नहीं हुआ था.
वो कहते हैं, "इससे पहले किसी ने इमरसैट सेटेलाइट के डेटा, बोइंग के परफार्मेंस डेटा, समंदर में मिले मलबे के ओशिएनोग्राफ़िक डेटा और डब्ल्यूएसपीआर नेट डेटा का एक साध अध्य्यन नहीं किया था."
गोडफ्रे और उनकी टीम इस डेटा का एक साल से अधिक से अध्य्यन कर रही थी. वो कहते हैं, "हमने इस डेटा पर कई परीक्षण किए हैं और अब हमें विश्वास है कि हम इसे एमएच370 की तलाश के लिए हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं."

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डेटा की गणना के आधार पर टीम का आकलन है कि ये विमान हिंद महासागर में 33 डिग्री दक्षिण और 95 डिग्री पूर्व के आसपास गिरा होगा.
हिंदमहासागर में एमएच370 की तलाश के लिए दो बार व्यापक अभियान चलाया गया है लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं हो सका.
इन खोजी अभियानों पर करोड़ों डॉलर ख़र्च किए गए हैं. लेकिन, विमान कहां गया इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और परिजन अब भी लापता हुए अपनों के बारे में जवाब तलाश रहे हैं.

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'फिर शुरू हो सके खोज'
इस हादसे में ग्रेस नैथन ने अपनी मां एनी को खो दिया था. वो कहती हैं, "हमारे लिए ये बुरा सपना है जो ख़त्म नहीं हुआ है. इसका कोई अंत नहीं है. हमें लगता है कि हम एक चक्कर में घूम रहे हैं और बार-बार दीवार से टकरा रहे हैं."
"हम इतने लंबे समय से कुछ नया होने का इंतज़ार कर रहे हैं. कुछ ऐसा जिसके आधार पर खोज फिर से शुरू हो सके. अब कम से कम एक अधिक सटीक लोकेशन है जहां खोज की जा सकती है. इससे विमान के मिलने की संभावना बढ़ गई है."
नैथन क्वालालंपुर में अधिवक्ता हैं. वो चाहती हैं कि इस नए डेटा का वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण हो इस थ्योरी को परखा जाए.
वो कहती हैं, "हम नई जानकारियों का स्वागत करते हैं. ये सबूतों पर आधारित है. ये ऐसी चीज़ें हैं जिनकी गणना की जा सकती है. ये गूगल से ली गई तस्वीरों और कमज़ोर सबूतों पर आधारित नहीं है जिसका बचाव ना किया जा सके."
हिंद महासागर इतना विशाल है कि इससे पहले शुरू हुए खोजी अभियान नाकाम रहे क्योंकि सर्च एरिया बहुत बड़ा था.
गोडफ्रे कहते हैं, अब तक एक लाख बीस हज़ार वर्ग किलोमीटर से बड़े इलाक़े में खोजबीन हो चुकी है. वो भूसे के ढेर में सुई नहीं खोज रहे हैं, बल्कि ये ढेर में सूक्ष्म चीज़ खोजने जैसा है.

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4 हज़ार मीटर ग़हरा
गोडफ्रे ने अनुमान लगाया है कि ये विमान 40 नॉटिकल मील के दायरे में हो सकता है. ये पहले चले खोजी अभियान के दायरे के मुक़ाबले में बहुत छोटा है.
वो कहते हैं, विमान का मलबा या तो समंदर में किसी खाई में होगा या किसी चट्टान के पीछे होगा. विमान का मलबा समंदर में चार हज़ार मीटर की गहराई में हो सकता है.
अब तक इस विमान के मलबे के तीस से अधिक टुकड़े अफ़्रीका और हिंद महासागर के द्वीपों के तटों तक पहुंच चुके हैं.
2009 में गोडफ्रे को ब्राज़ील के रियो डे जेनेरियो से पेरिस के फ़्रांस तक यात्रा करनी थी लेकिन काम की वजह से उन्हें ब्राज़ील में ही रुकना पड़ा.
वो उड़ान कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंच सकी और अटलांटिक महासागर में समा गई. तब से ही वो समंदर में लापता हुए विमानों और उन्हें खोजने में रूची लेने लगे.
गोडफ्रे स्वतंत्र समूह एमएच370 ग्रुप के संस्थापक सदस्य हैं. वो पेशे से इंजीनियर हैं और विमान के ऑटो पायलट सिस्टम के विकास पर काम कर चुके हैं
वो कहते हैं, "मैंने इंफोर्मेशन सिस्टम और डेटा को संभालने में बहुत काम किया है. इस विश्लेषण में यही अहम है. यहां डेटा बहुत ज़्यादा है और ये भूसे के ढेर से सूई निकालने जैसा ही है."
डेविड ग्लीव एविएशन सेफ्टी कंसल्टेंट के चीफ़ इन्वेस्टिगेटर है. उन्होंने विमानों के लापता होने और क्रैश होने के मामलों पर दशकों तक काम किया है.
ग्लीव को लगता है कि एक नए खोजी अभियान के लिए पैसे जुटाना एक मुद्दा हो सकता है.
वो कहते हैं, "अब हमारे पास क्रैश साइट कहां हो सकती है इसे लेकर अतिरिक्त सटीक डेटा है. ये अन्य थ्योरी के हिसाब से सही है और विश्वस्नीय लग रहा है."
कोई नया खोजी अभियान समंदर की स्थिति और नए विकसित किए गए उपकरणों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

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सटीक सबूत
डेविड ग्लीव कहते हैं, "वास्तविकता में देखा जाए तो हमें दक्षिणी सागर में गर्मियों के दिनों में खोज करनी चाहिए, यानी वो समय अब है. मुझे लगता है कि नई खोज शुरू होने में 12 महीने तक का समय लग सकता है क्योंकि इतने कम समय में खोज की जगह तक उपकरण पहुंचाना आसान नहीं है."
"मुझे लगता है कि चीन अपने नागरिकों की खोज के लिए अभियान शुरू कर सकता है या फिर इंश्योंरेंस कंपनियां खोज करवा सकती हैं."
इस उड़ान पर 122 चीनी नागरिक सवार थे. ये उड़ान क्वालालंपुर से उड़ी थी और कभी बीजिंग नहीं पहुंच सकी. इस उड़ान के लापता होने के बाद विमान को लेकर कई थ्योरी दी गई.
एक थ्योरी ये भी थी कि हो सकता है कि विमान को पायलट ने ही हाईजैक किया हो और थाईलैंड की खाड़ी से पश्चिम की तरफ़ मुड़ने के बाद रडार बंद कर दिया हो.
ऑस्ट्रेलिया ट्रांस्पोर्ट सेफ्टी बोर्ड (एटीएसबी) ने अक्तूबर 2017 में पानी के नीचे अपना खोजी अभियान समाप्त कर दिया था.
एटीएसबी ने बीबीसी से कहा था, "अब एटीएसबी किसी खोजी अभियान में शामिल नहीं है. विमान मलेशिया में पंजीकृत था, विमान की खोज को लेकर कोई फ़ैसला मलेशिया को ही करना है."
इस पर प्रतिक्रिया के लिए मलेशियाई सरकार और चीन की सरकार से संपर्क किया गया है.
ग्रैस नैथन कहती हैं, "इस विमान का मिलना वैश्विक विमानन सेवाओं की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके."
"हमारे लिए भी ये अध्याय अब समाप्त होना चाहिए."
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