उमेश पाल हत्याकांड में अब तक 6 अभियुक्तों की मौत- प्रेस रिव्यू

अतीक़ अहमद

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शनिवार को अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ अहमद की गोली मारकर हत्या और उससे पहले बेटे असद की यूपी पुलिस के साथ मुठभेड़ में हुई मौत के बाद, इसी साल 24 फ़रवरी को हुई उमेश पाल की हत्या के मामले में अब तक छह अभियुक्तों की मौत हो गई है.

इनमें अतीक़ ख़ुद, उनके बेटे असद और उनके सहयोगी अरबाज़ और ग़ुलाम मोहम्मद, विजय चौधरी उर्फ़ उस्मान और ग़ुलाम हसन शामिल हैं.

उमेश पाल की दिनदहाड़े हत्या उस वक्त की गई थी जब को कचहरी से लौट रहे थे. इस हमले में दो पुलिसकर्मियों की भी जान गई थी.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार अतीक़ की पत्नी शाइस्ता परवीन, जिन पर 50 हज़ार का इनाम है वो फ़रार चल रही हैं. अतीक़ के दो बेटे उमर और अली जेल में बंद हैं. उनके दो नाबालिग़ बेटों को बाल सुरक्षा गृह में पुलिस की कड़ी निगरानी में रखा गया है.

ख़बर के अनुसार उमेश पाल की हत्या के बाद इस मामले में पहला एनकाउंटर 27 फ़रवरी को प्रयागराज में ही हुआ था. इसमें अरबाज़ की मौत हुई थी. 24 फ़रवरी को उमेश पाल पर गोली चलाने वाले हमलावर जिस गाड़ी से आए थे, उसे कथित तौर पर अरबाज़ ही चला रहे थे. इसके बाद 6 मार्च को पुलिस ने उस्मान को मुठभेड़ में मारने का दावा किया. असद और ग़ुलाम को 13 अप्रैल को झांसी में पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया. वहीं अतीक़ अहमद के बाकी सहयोगी गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर फ़रार चल रहे हैं और पुलिस ने इन पर 5-5 लाख़ रुपये का इनाम भी घोषित किया है.

अतीक़ और अशरफ़ अहमद प्रयागराज की निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक में ये कह चुके थे कि उनकी जान को ख़तरा है. बेटे असद की मौत से एक महीने पहले ही अतीक़ अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में जेल में अपनी सुरक्षा बढ़ाने की अर्ज़ी दी थी.

अतीक़ अहमद

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कौन हैं अतीक़ अहमद और उनके भाई की गोली मारकर हत्या करने वाले?

कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच प्रयागराज में शनिवार रात को अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ़ की मीडिया से बात करने दौरान कुछ हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी.

उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अब तक हत्या के पीछे का मक़सद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. हालांकि पुलिस ने हत्या की पुष्टि की है और कहा है कि इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

उत्तर प्रदेश के प्रमुख हिंदी अख़बारों में से एक दैनिक जागरण ने अपनी वेबसाइट पर दी गई ख़बर में हमलावरों का कथित 'कबूलनामा' छापा गया है. आज के प्रेस रिव्यू में सबसे पहले ये जानते हैं कि अतीक़ और अशरफ़ अहमद पर हमला करने वाले तीनों लोग कौन थे.

दैनिक जागरण के अनुसार, गोली चलाने वाले अभियुक्तों ने पुलिस के सामने कथित तौर पर दिए अपने बयान में कहा है, "माफ़िया अतीक़ का पाकिस्तान से संबंध था. उसने और उसके गैंग में शामिल सदस्यों ने तमाम निर्दोष लोगों का कत्ल किया था. अतीक़ ज़मीन हड़पने के लिए हत्या करता था और विरोध में गवाही देने वालों को भी नहीं छोड़ता था. उसका भाई अशरफ़ भी ऐसा करता था, इसलिए हमने दोनों को मार डाला."

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार, गोली चलाने वाले तीनों अभियुक्त अलग-अलग मामलों में पहले भी जेल जा चुके हैं. पुलिस ये भी पता लगा रही है कि अभियुक्त कब और कैसे प्रयागराज आए थे.

जेल में हुई तीनों हमलावरों की दोस्ती

वहीं, हिंदी दैनिक 'हिंदुस्तान' ने भी बताया है कि तीनों हमलावर शातिर अपराधी हैं. तीनों ही हत्या, लूट समेत संगीन आरोप में जेल जा चुके हैं.

अख़बार लिखता है कि जेल में ही उनकी आपस में दोस्ती हो गई. ये तीनों अतीक़ और अशरफ़ की हत्या करके डॉन बनना चाहते थे.

अख़बार लिखता है कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है. इनमें से एक हमीरपुर के हैं, एक कासगंज के और एक बांदा के रहने वाले हैं.

अख़बार ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया है कि तीनों का मानना है कि छोटे-छोटे अपराध में जेल जाने से उनका नाम नहीं हो रहा था, इसलिए वो कुछ बड़ा करने की सोच रहे थे. तीनों को इसी बीच पता चला कि अतीक़ और अशरफ़ अहमद को पुलिस हिरासत में अस्पताल ले जाया जा रहा है. तीनों ने बड़ा नाम कमाने के मक़सद से हत्या की साजिश रची.

अख़बार लिखता है कि तीनों ने हत्या की योजना बनाई थी और शुक्रवार को हमला करने से पहले अस्पताल पहुंचकर रेकी की थी. इसके बाद शनिवार को तीनों ने मीडियाकर्मी बनकर अतीक़ और अशरफ़ अहमद को नज़दीक से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी.

पुलिस ने हमलावर को पकड़ा

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'हिन्दुस्तान' की ख़बर के अनुसार तीनों हमलावरों के परिजनों को भी हिरासत में ले लिया गया है. हमलावरों के पास से तीन पिस्तौल बरामद की गई हैं.

शनिवार को घटना के बाद पुलिस ने भी इसकी पारथमिक जानकारी के आधार पर बताया था कि कि हमलावरों के पास से कुछ असलाह मिला है.

शनिवार की रात पुलिस अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ अहमद को लेकर पुलिस मेडिकल चेक-अप कराने के लिए काल्विन अस्पताल पहुंची थी. दोनों को पाँच दिन की रिमांड पर लाया गया था. इसी दौरान पुलिस सुरक्षा घेरे में घुसकर हमलावरों ने उन पर कई बार फ़ायरिंग की.

ये हमला उस वक्त हुआ जब अतीक़ और उनके भाई मीडिया वालों के सवालों के जवाब दे रहे थे. इसी बीच एक हमलावर ने अतीक़ अहमद के कनपटी पर पिस्तौल सटाकर उन्हें गोली मार दी और उसके बाद अशरफ़ पर भी कई बार गोलियां चलाईं. हमलावरों ने गोलीबारी के बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

पुलिस के अनुसार इस हमले में एक सिपाही भी घायल हुआ है और एक पत्रकार को भी चोट आई है.

हत्या के बाद उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों में धारा 144 लागू कर दी गई है और पुलिस बल गश्त कर रहे हैं.

अतीक़ अहमद पूर्व सांसद थे. उनके भाई भी पूर्व विधायक थे. दोनों भाइयों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है.

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अतीक़ अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड 

  • अतीक़ अहमद के आपराधिक इतिहास में 100 से भी अधिक मुक़दमे दर्ज हैं.
  • मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, साल 1979 में पहली बार हत्या का मुक़दमा दर्ज हुआ. उस वक्त अतीक़ अहमद नाबालिग़ थे. 
  • 1992 में इलाहाबाद पुलिस ने बताया कि अतीक़ के ख़िलाफ़ बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के क़रीब चार दर्जन मामले दर्ज हैं.
  • प्रयागराज के अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक़, अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 1996 से अब तक 50 मुक़दमे विचाराधीन हैं.
  • अभियोजन पक्ष का कहना है कि 12 मुक़दमों में अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ के वकीलों ने अर्ज़ियां दाख़िल की हैं जिससे केस में चार्जेज़ फ़्रेम नहीं हो पाए हैं.
  • अतीक़ अहमद बसपा विधायक राजू पाल ही हत्या के मुख्य अभियुक्त थे. मामले की जांच अब सीबीआई के पास थी.
  • अतीक़ अहमद 24 फरवरी को हुई उमेश पाल की हत्या के मुख्य अभियुक्त हैं.
  • उमेश पाल, राजू पाल हत्याकांड के शुरुआती गवाह थे, लेकिन बाद में मामले की जांच संभाल रही सीबीआई ने उन्हें गवाह नहीं बनाया था.
  • 28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल का 2006 में अपहरण करने के आरोप में दोषी पाया और उम्र कै़द की सज़ा सुनाई.
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पुलवामा हमला

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पुलवामा हमला: सीआरपीएफ़ ने ख़ुफ़िया नाकामी और लंबे काफ़िले को माना था वजह

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने द वायर को दिए एक इंटरव्यू में ये दावा किया था कि पुलवामा हमले से पहले गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ़ की ओर से जवानों को ले जाने के लिए विमान उपलब्ध कराने के निवेदन को ठुकरा दिया था. इसका परिणाम ये हुआ कि बड़ी संख्या में जवानों को सड़क के रास्ते ले जाना पड़ा और वो पुलवामा में चरमपंथी हमले का शिकार बने.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में ये बताया है कि 14 फ़रवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले के बाद सीआरपीएफ़ ने एक विभागीय जाँच कराई थी. इस हमले में भारतीय सेना के 40 जवानों की मौत हुई थी.

जाँच में पाया गया कि ख़ुफ़िया महकमे की नाकामी और सड़क पर लंबा काफ़िला हमले की बड़ी वजह थे. अख़बार ने बताया कि सीआरपीएफ़ के डीजी एसएल थाओसेन से इस पर प्रतिक्रिया मांगी गई लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया.

सूत्रों के हवाले से अख़बार ने बताया है कि सीआरपीएफ़ की जाँच में पाया गया कि आईईडी हमले की आशंका से जुड़े कई ख़ुफ़िया इनपुट मिलने के बावजूद सैनिकों को लेकर निकले काफ़िले को इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई.

हालांकि, हमले के बाद सरकार ने सभी जवानों को हवाई रास्ते से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर सहमति दे दी.

सूत्रों के हवाले से अख़बार ने बताया कि हमले के दिन सैन्य काफ़िले में कुल 78 वाहन थे जो असामान्य था. इस जाँच की रिपोर्ट एनआईए को गृह मंत्रालय ने सौंपी. इसके बाद एनआईए ने हमले को लेकर 13 हज़ार 800 पन्नों की चार्जशीट दायर की, जिसमें पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद को हमले का ज़िम्मेदार बताया गया.

चार्जशीट में ये भी दावा किया गया कि हमले में 200 किलोग्राम विस्फ़ोटक और करीब 35 किलो आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था. चार्जशीट में 19 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.

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