अतीक़ अहमद और अशरफ़ की कैमरों के सामने हुई हत्याः पुलिस और सरकार ने क्या कहा?

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, प्रयागराज से
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पूर्व सासंद अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की गोली मार कर हत्या कर दी गई है.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूर्व सांसद अतीक़ अहमद और उनके भाई की हत्या की पुष्टि की है. पुलिस के मुताबिक हमलावर पत्रकार बनकर आए थे.
पुलिस का कहना है कि तीनों हमलावरों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया है और उच्चस्तरीय बैठक की है.
योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं. घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायायिक आयोग के गठन की घोषणा भी की गई है.
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प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, "क़ानूनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ को मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था. इसी दौरान ये घटना हुई है."
जिस वक्त अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ पर हमला हुआ, उस वक्त पुलिसकर्मी उन्हें मेडिकल चेक-अप के लिए प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल लेकर आए थे.
पत्रकार बनकर आए हमलावरों ने अस्पताल के ठीक पास, पुलिस के घेर में चल रहे अतीक़ और अशरफ़ पर बेहद नज़दीक़ गोलियां चलाईं और उनकी मौत के बाद धार्मिक नारेबाज़ी की.

प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के मुताबिक़, "पत्रकार अतीक़ अहमद और उनके भाई से बात कर रहे थे, इसी दौरान पत्रकार बनकर आए हमलावरों ने अचानक गोलियां चलाईं. तीनों हमलावरों को गिरफ़्तार कर लिया गया है."
पुलिस के मुताबिक़ इस घटनाक्रम में एक पुलिसकर्मी घायल हुए है और एक पत्रकार को भी मामूली चोट आई है.
इस हमले के बाद पुलिस ने अस्पताल के आसपास के इलाक़े की नाकेबंदी कर दी है.
कौन हैं हमलावर?

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पुलिस के मुताबिक़ इस मामले में तीन हमलावरों को हिरासत में लिया गया है. हालांकि पुलिस ने अभी हमलावरों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.
पुलिस का कहना है कि हमलावरों से पूछताछ की जा रही है और उसके बाद ही अधिक ब्यौरा दिया जाएगा.

अतीक़ अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड
- अतीक़ अहमद के आपराधिक इतिहास में 100 से भी अधिक मुक़दमे दर्ज हैं.
- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, साल 1979 में पहली बार हत्या का मुक़दमा दर्ज हुआ. उस वक्त अतीक़ अहमद नाबालिग़ थे.
- 1992 में इलाहाबाद पुलिस ने बताया कि अतीक़ के ख़िलाफ़ बिहार में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के क़रीब चार दर्जन मामले दर्ज हैं.
- प्रयागराज के अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक़, अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 1996 से अब तक 50 मुक़दमे विचाराधीन हैं.
- अभियोजन पक्ष का कहना है कि 12 मुक़दमों में अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ के वकीलों ने अर्ज़ियां दाख़िल की हैं जिससे केस में चार्जेज़ फ़्रेम नहीं हो पाए हैं.
- अतीक़ अहमद बसपा विधायक राजू पाल ही हत्या के मुख्य अभियुक्त थे. मामले की जांच अब सीबीआई के पास थी.
- अतीक़ अहमद 24 फरवरी को हुए उमेश पाल की हत्या के मुख्य अभियुक्त हैं.
- उमेश पाल, राजू पाल हत्याकांड के शुरुआती गवाह थे, लेकिन बाद में मामले की जांच संभाल रही सीबीआई ने उन्हें गवाह नहीं बनाया था.
- 28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल का 2006 में अपहरण करने के आरोप में दोषी पाया और उम्र कै़द की सज़ा सुनाई.

कैसे हुई हत्या?

अतीक़ अहमद को पुलिस सुरक्षा में गाड़ी से उतारकर मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था. तेज़ी से हुए एक घटनाक्रम में दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई.
इस दौरान अस्पताल के सामने मौजूद पत्रकार अतीक़ और उनके भाई से बात कर रहे थे, तभी अचानक एक तरफ से आए हमलावर ने उन पर नज़दीक से गोलियां चला दीं. गोलीबारी की ये घटना मीडिया के कैमरों में कैद हो गई.
घटना के वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस की गाड़ी अस्पताल से सामने आकर रुकती है जिसमें से पहले अशरफ़ औऱ फिर अतीक़ उतरते हैं. अतीक़ और उनके भाई के हाथ हथकड़ियों में बंधे थे.
वीडियो में अतीक़ अपने भाई के साथ पुलिसवालों की बीच चलते हुए दिख रहे हैं. उनके गाड़ी से उतरने के बाद अतीक़ से एक पत्रकार उनके बेटे असद अहमद के जनाज़े में शामिल न हो पाने को लेकर सवाल करते हैं.
अतीक़ अहमद बोलना शुरू करते हैं और कहते हैं "नहीं ले गए तो नहीं ले गए", लेकिन इससे पहले कि वो आगे कुछ कह पाएं एक पिस्टल कैमरे के सामने दिखाई देती है. कुछ ही सेकंड में बेहद क़रीब से पहले अतीक़ और फिर अशरफ़ को गोली लगती है.

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इसके बाद ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू हुई. दोनों भाई ज़मीन पर गिर गए.
अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में जेल में बंद थे.
अतीक़ अहमद के वकील विजय मिश्र भी हत्या के दौरान घटनास्थल के क़रीब थे. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अतीक़ अहमद और अशरफ़ को गाड़ी से निकालकर ले जाया जा रहा था. तभी गोलियों की आवाज़ आई. जिन्होंने गोली चलाई थी पुलिस ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया था. चारों तरफ अफरातफरी मच गई थी."

पुलिस का कहना है कि हमलावरों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. वहीं मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ हमले के बाद हमलावरों ने आत्मसमर्पण कर दिया था.
उत्तर प्रदेश पुलिस राजू पाल की हत्या के मामले में गवाह उमेश पाल की हत्या के संबंध में अतीक़ अहमद और अशरफ़ से पूछताछ कर रही थी.
दोनों की पूछताछ पूरी हो जाने के बाद उन्हें फिर से न्यायिक कस्टडी में भेजा जाना था और उससे पहले ही मेडिकल चेक-अप कराया जाना था.
अतीक़ अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में पुलिस हिरासत में अपनी सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी.
अतीक़ अहमद और दो अन्य अभियुक्तों को राजू पाल की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी जबकि अशरफ़ को इस मामले में बरी कर दिया गया था.
दो दिन पहले बेटे का एनकाउंटर

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गुरुवार को अतीक़ अहमद के बेटे असद और उसके सहयोगी गु़लाम मोहम्मद का उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने झांसी में कथित एनकाउंटर कर दिया था.
असद और गुलाम का अंतिम संस्कार शनिवार को ही प्रयागराज में हुआ है.
यूपी पुलिस के मुताबिक़ असद और ग़ुलाम उमेश पाल की हत्या के मामले में वांछित थे और दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का ईनाम घोषित था.
यूपी सरकार के निशाने पर अतीक़

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने माफ़िया और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू की है.
पिछले छह साल के दौरान की गई कार्रवाई में अतीक़ अहमद के गुट के कई सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है.
अतीक़ अहमद और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों को भी यूपी सरकार ने या तो ज़ब्त किया है या फिर ज़मीनदोज़ किया है.
एक अनुमान के मुताबिक़ अतीक़ और उनके गुट से जुड़े लोगों की लगभग 800 करोड़ रुपए की संपत्तियों को सरकार ने ज़ब्त और ज़मीनदोज़ किया है.
अतीक़ अहमद: 100 से अधिक मुक़दमे

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अतीक़ अहमद को साबरमती जेल में रखा गया था और उनके ख़िलाफ़ एमपीएमएलए अदालत में चल रहे 50 से अधिक मामलों में कार्रवाई वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही है.
लेकिन अतीक अहमद के आपराधिक इतिहास में 100 से भी अधिक मुक़दमे दर्ज हैं.
प्रयागराज के अभियोजन अधिकारियों के मुताबिक़, अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 1996 से अब तक 50 मुक़दमे विचाराधीन हैं.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि 12 मुक़दमों में अतीक़ और उनके भाई अशरफ़ के वकीलों ने अर्ज़ियां दाख़िल की हैं जिससे केस में चार्जेज़ फ़्रेम नहीं हो पाए हैं.
अतीक़ अहमद बसपा विधायक राजू पाल ही हत्या के मुख्य अभियुक्त हैं. इस मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.
इस साल 28 मार्च को प्रयागराज की एमपीएमएलए अदालत ने अतीक़ अहमद को उमेश पाल का 2006 में अपहरण करने के आरोप में दोषी पाया और उम्र कै़द की सज़ा सुनाई.
उमेश पाल राजू पाल हत्याकांड के शुरुआती गवाह थे, लेकिन बाद में मामले की जांच संभाल रही सीबीआई ने उन्हें गवाह नहीं बनाया था.
अशरफ़, अतीक़ का भाई

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अतीक़ के भाई अशरफ़ उर्फ़ खालिद आज़मी के ख़िलाफ़ 52 मुक़दमे दर्ज हैं. इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, बलवा (उपद्रव) और अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.
आपको बता दें की अशरफ़ को उमेश पाल की हत्या के मामले में भी अभियुक्त बनाया गया है.
ग़ौर करने वाली बात यह है कि अशरफ़ उमेश पाल के अपहरण वाले मामले के फै़सले में निर्दोष पाया गया था. इसी मुक़दमे में अतीक़ और दो अन्य को दोषी पाया गया और 6 अभियुक्त बरी हुए.
अशरफ़ बसपा विधायक राजू पाल की 2005 में हुई हत्या के भी अभियुक्त हैं और इनका मुक़दमा लखनऊ की सीबीआई अदालत में चल रहा है.
अशरफ को बरेली जेल में रखा गया है और उन्हें पेशी के लिए प्रयागराज लाया जाता है.
हत्या पर प्रतिक्रियाएं?

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अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की पुलिस सुरक्षा के बीच प्रयागराज में मीडिया से बात करने के दौरान अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अभी तक अतीक़ और अशरफ़ की हत्या पर कोई बयान जारी नहीं किया है.
अतीक़ और अशरफ़ की हत्या कैमरे पर रिकॉर्ड हुई है और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं. वीडियो में पुलिस हमलावरों पर जवाबी कार्रवाई करती हुई नहीं दिख रही है.
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के मुताबिक़, "उन्हें बाध्यकारी मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया था. प्राथमिक जानकारी के अनुसार जिन्होंने हमला किया वो तीन लोग थे जो मीडियाकर्मी बनकर आए थे. इस मामले में तीन लोगों को पकड़ा गया है जिनसे पूछताछ जारी है. जो लोग पकड़े गए हैं उनके पास कुछ असलाह मिला है. गोलीबारी में अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की मौत के अलावा एक पुलिसकर्मी को भी गोली लगी है. साथ ही एक पत्रकार को भी चोट आई है."
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस हत्याकांड पर सवाल उठाते हुए ट्विटर पर लिखा है, "उत्तर प्रदेश में अपराध की पराकाष्ठा हो गयी है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. जब पुलिस के सुरक्षा घेरे के बीच सरेआम गोलीबारी करके किसी की हत्या की जा सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? इससे जनता के बीच भय का वातावरण बन रहा है, ऐसा लगता है कुछ लोग जानबूझकर ऐसा वातावरण बना रहे हैं."
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वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में जलशक्ती मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने एक ट्वीट में लिखा है, "पाप-पुण्य का हिसाब इसी जन्म में होता है…"
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लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम के नेता असदउद्दीन औवैसी ने भी यूपी सरकार को निशाने पर लिया है.
एक ट्वीट में ओवैसी ने कहा, "एनकाउंटर राज का जश्न मनाने वाले भी इस हत्या के ज़िम्मेदार हैं."
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