सावरकर पर राहुल गांधी के बोल से विपक्षी एकता की कोशिशों को लग सकता है ग्रहण

राहुल गांधी

इमेज स्रोत, ANI

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सोमवार की शाम जब राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के घर राहुल गांधी अपनी माँ सोनिया गांधी को कार चलाते हुए लेकर पहुँचे थे, तो उस समय विपक्ष के कुल 18 दलों के प्रतिनिधि वहाँ मौजूद थे.

जो दल मौजूद नहीं था या जिस दल के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति ने खड़गे के घर पर जमा हुए विपक्ष के नेताओं के माथे पर शिकन पैदा कर दी, वो पार्टी थी उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना.

इस पार्टी का न तो कोई सांसद और न ही नेता इस बैठक में मौजूद था.

कहा तो ये भी जा रहा है कि ख़ुद उद्धव ठाकरे को खड़गे के घर हुई बैठक में शामिल होना था. लेकिन वो नहीं आए.

शनिवार को दिल्ली के अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, "मेरा नाम सावरकर नहीं है. मेरा नाम राहुल गांधी है और गांधी किसी से माफ़ी नहीं मांगता."

राहुल गांधी संसद में चल रहे गतिरोध पर पूछे गए सवाल के जवाब में बोल रहे थे. संसद में सत्ता पक्ष के लोग राहुल गांधी से उनके विदेश दौरों के क्रम में दिए गए बयानों पर 'माफ़ी मांगने' की मांग पर अड़े हुए थे.

लेकिन राहुल गाँधी की सावरकर को लेकर की गई टिप्पणी पर महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में शामिल उद्धव ठाकरे ने अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर की और राहुल गांधी को एक तरह से चेतावनी भी दी.

उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि वो सावरकार का बार-बार अपमान न करें.

उद्धव ठाकरे

इमेज स्रोत, Getty Images

राहुल को शिवसेना की ओर से नसीहत

उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए कहा, "सावरकर अंडमान के काला पानी की जेल में 14 वर्षों तक अकल्पनीय तकलीफें झेलते रहे थे. सावरकर हमारे लिए भगवान तुल्य हैं और उनका अपमान हम सहन नहीं करेंगे."

उद्धव ठाकरे ने ये भी संकेत साफ़ शब्दों में दे दिए कि अगर राहुल गांधी सावरकर का अपमान करते रहे तो 'विपक्ष की एकता में दरार' पड़ जाएगी.

सोमवार को महाराष्ट्र के मालेगाँव में एक रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस का गठजोड़ लोकतंत्र को बचाने के लिए बनाया गया था.

उन्होंने मंच से कहा, "राहुल गांधी को जानबूझकर उकसाया जा रहा है. लेकिन अगर हम इन चीज़ों में समय व्यर्थ में गंवाएंगे तो लोकतंत्र ख़त्म हो जाएगा."

उन्हीं की पार्टी के सांसद संजय राउत का कहना था कि वो राहुल गांधी के साथ अलग से मुलाक़ात करेंगे और उन्हें ऐसे बयान नहीं देने की सलाह देंगे.

सावरकर के मुद्दे पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ खड़े दिख रहे हैं.

पवार ने कांग्रेस नेतृत्व को अपनी चिंता से अवगत कराया है.

शरद पवार के साथ ठाकरे

इमेज स्रोत, Getty Images

महाराष्ट्र में सावरकर का मुद्दा क्यों है बड़ा?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 27 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी नेताओं की एक बैठक बुलाई थी.

इस बैठक में शरद पवार शामिल हुए और कांग्रेस नेतृत्व को साफ़ बताया कि महाराष्ट्र में सावरकर की लोकप्रियता काफ़ी ज़्यादा है, ऐसे में उन्हें लेकर टिप्पणी करना राज्य में कांग्रेस, एनसीपी और उद्धव गुट के गठबंधन के लिए सही साबित नहीं होगा.

इससे पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने शिरकत की थी. लेकिन इसी यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में राहुल गांधी ने सावरकर पर निशाना साधा था.

उद्धव ठाकरे की शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' ने अपने संपादकीय में भी राहुल गांधी की आलोचना की है.

संपादकीय में ये भी संकेत थे कि महाविकास अघाड़ी का घटक होने के बावजूद उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना राहुल गांधी की सावरकर पर टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेगी.

सामना लिखता है, "राहुल गांधी बयान दे रहे हैं कि मैं सावरकर नहीं हूँ. ऐसे बयानों से कोई बहादुर नहीं बन जाता है या फिर उनके ऐसा करने से सावरकर के प्रति लोगों का सम्मान और श्रद्धा बदल नहीं जाएँगे."

कांग्रेस पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई मानते हैं कि इस बयान से राहुल गांधी के विरोधियों को ये बताने का अवसर मिल जाएगा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष 'राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं.'

वो कहते हैं कि जब कई दल किसी मुद्दे पर एक साथ आते हैं, तो विचारधारा के विरोधाभासों के बावजूद वो आपस में एक बेहतर सामंजस्य बना लेते हैं. ये सामंजस्य एक-दूसरे के सम्मान और कुछ बुनियादी मुद्दों पर सहमति लेकर बनता है.

वीडियो कैप्शन, राहुल गांधी: 'मुझे नहीं लगता कि बोलने देंगे'

राहुल गांधी में लचीलापन की कमी

बीबीसी से बातचीत में रशीद किदवई कहते हैं, "राहुल गांधी को चाहिए कि वो औरों से नहीं भी तो अपने परिवार में ही इस बात का उदहारण तलाश कर लें. वो देखेंगे कि राजनीतिक दलों के विरोधाभासों का किस तरह बेहतर प्रबंधन करने में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने कामयाबी हासिल की. ख़ुद इंदिरा गांधी ने सावरकर पर डाक टिकट भी जारी किया था."

राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि राहुल गांधी के लिए राजनीतिक तौर पर ये ज़रूरी होगा कि वो अपने अंदर वैचारिक लचीलापन पैदा करें, तभी अलग-अलग दलों को साथ लेकर चल सकते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की मिसाल देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में टिकट बँटवारे के दौरान अखिलेश यादव ने राहुल गांधी को सलाह दी थी कि, "बड़े दल को बड़ा दिल भी दिखाना चाहिए."

एनके सिंह के अनुसार, राजनीति में ये बहुत बड़ा मंत्र है, जब कई दलों को साथ लेकर चलने की चुनौती हो.

रशीद किदवई कहते हैं कि एक परिपक्व राजनेता हमेशा नाप तौल लेता है कि जो वो बोल रहा है उसका उस समय बोलने का औचित्य क्या है.

लाल कृष्ण आडवाणी

इमेज स्रोत, Getty Images

एक ग़लती से आडवाणी का सूरज डूबा

उन्होंने कहा, "यही ग़लती लालकृष्ण आडवाणी ने पकिस्तान के दौरे पर की थी जब उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को स्वतंत्रता सेनानी कहा था. कई बार बहुत सी चीज़ें सही भी हो सकती हैं, लेकिन किस समय क्या बोलना सही रहेगा, ये बहुत ज़रूरी है. उसका नतीजा क्या हुआ? आडवाणी राजनीति में हाशिए पर चले जाने पर मजबूर हो गए."

उनका कहना था कि वैचारिक मतभेद के बावजूद वर्ष 1984 में बालासाहेब देवरस और नानाजी देशमुख ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को लेकर इंदिरा गांधी की ख़ूब सराहना की थी जबकि उनकी विचारधारा से इंदिरा गांधी की सोच बिल्कुल अलग ही रही थी.

राहुल गांधी पर विरोधी ये भी आरोप लगाते हैं कि वे कई बार बिना सोचे समझे ही बोल जाते हैं.

इस पर रशीद किदवई कहते हैं, "शायद यही वजह है कि राहुल गांधी उतनी गर्मजोशी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलते हुए कभी नज़र नहीं आते. कई दलों को साथ लेकर राजनीति करनी है वैसी सूरत में उन दलों की विचारधारा का सम्मान नहीं भी करें, तो उसे ठेस न पहुँचाने की कोशिश तो की ही जा सकती है."

ममता बनर्जी

इमेज स्रोत, Getty Images

बीजेपी ने हमला तीखा किया

लेकिन ये बात भी सही है कि राहुल के बयानों से उनके प्रतिद्वंद्वी दल यानी भारतीय जनता पार्टी को हमेशा उनपर निशाना साधने का मसाला मिल जाता है.

उनके बयान के बाद पार्टी के नेताओं के अलावा कई मंत्रियों ने सोशल मीडिया का रुख़ किया और राहुल गांधी की आलोचना की.

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक ट्वीट कर कहा, "आप सपने में भी सावरकर नहीं हो सकते, क्योंकि इसके लिए बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास, देश से प्यार, नि:स्वार्थता और प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है."

वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राहुल गांधी के बयान के बहाने उद्धव ठाकरे की शिवसेना को घेरने का मौक़ा भी मिल गया.

सोमवार को दोनों ही नेताओं ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे महाराष्ट्र में जल्द ही 'सावरकर गौरव यात्रा' निकाली जाएगी, जिसके ज़रिए 'देश के स्वतंत्रता संग्राम में सावरकर के योगदान को जनता के बीच ले कर जाने का काम किया जाएगा.'

एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

इमेज स्रोत, ANI

एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना में घमासान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आरोप था कि संसद के बजट सत्र के दौरान 'राहुल गांधी सावरकर का अपमान करते रहे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सांसद राहुल गांधी की सदस्यता के निरस्त होने के विरोध में काली पट्टी लगाकर बैठे हुए थे. जब सावरकर का अपमान हो रहा था तो उद्धव ठाकरे के सांसद चुप बैठे थे.

इस पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कयानडे ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री हवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनको इससे कुछ लाभ नहीं मिलेगा.

मुंबई से फ़ोन पर बात करते हुए मनीषा कहती हैं, "आठ साल से सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया? ये सवाल जनता पूछेगी भारतीय जनता पार्टी से. सावरकर के नाम का इन लोगों ने सिर्फ़ वोटों के लिए इस्तेमाल किया है. जब ये जनता के बीच जाएंगे तो ये सवाल भी झेलने होंगे कि गोवा, नगालैंड और दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों में बीफ़ को लेकर भाजपा की क्या नीति है."

मनीषा कहतीं हैं कि विपक्षी दलों की बैठकों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने राहुल गांधी के बयान पर अपनी नाराज़गी खुल कर बता दी है.

वो कहती हैं उनके दल के लिए सावरकर हमेशा से पूजनीय रहे हैं और अगर कांग्रेस के नेता अपनी बयानबाज़ी जारी रखते हैं या दूसरे सहयोगी दलों की भावनाओं का अनादर करते हैं, तो फिर विपक्ष की एकजुटता एक सपना ही बनकर रह जाएगी.

ये भी पढ़ेंः-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)