कांग्रेस का आरोप, 'अदानी पर सवालों से बचने के लिए राहुल को घेर रही है बीजेपी'- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, ANI
कांग्रेस पार्टी ने बीते सोमवार एक बार फिर अदानी समूह से जुड़े विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश की.
अंग्रेजी अख़बार द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, कांग्रेस ने अब तक पीएम मोदी से अदानी समूह को लेकर 81 सवाल पूछे हैं, लेकिन इनमें से किसी भी सवाल का जवाब नहीं आया है.
वहीं, दूसरी ओर बीजेपी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को घेरते हुए संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रखा है.
बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी ने अपनी हालिया ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारतीय सम्मान और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है.
बीजेपी नेताओं की ओर से राहुल गांधी का विरोध किए जाने के बाद बजट सत्र के द्वितीय चरण के पहले दिन भी सदन में राहुल गांधी का विरोध जारी रहा. इसके कुछ देर बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हो गयी.
कांग्रेस पार्टी समेत विपक्षी नेताओं ने इसके बाद सदन के बाहर जाकर नारेबाज़ी की. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से बुलाई गई बैठक में टीएमसी ने भाग नहीं लिया.
कांग्रेस पार्टी बीजेपी की ओर से राहुल गांधी को घेरे जाने को एक योजनाबद्ध रणनीति के रूप में देखती है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "ये लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को स्थगित कराने की योजनाबद्ध रणनीति थी क्योंकि वे अदानी विवाद से डरे हुए हैं. राहुल गांधी को किस बात की माफ़ी मांगनी चाहिए? क्या सच बोलने के लिए उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए? उन्होंने ये बातें इससे पहले भी कई बार कही हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत ने तालिबान को ट्रेनिंग देना शुरू किया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार से तालिबान से जुड़े कुछ लोगों को आईआईएम कोझीकोड के ज़रिए ट्रेनिंग देना शुरू किया है.
अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इस कोर्स का शीर्षक इमर्सिंग विद इंडियन थॉट्स है जो कि तालिबानी सदस्यों को इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है.
इस कोर्स को विदेश मंत्रालय की इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन इकाई ने तैयार किया है जो साझीदार देशों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स चलाती है.
सोमवार शाम तक कम से कम 25 लोगों ने इस कोर्स को करने में अपना रुझान व्यक्त किया है. इस कोर्स को लेकर बीती 20 फ़रवरी को काबुल स्थित भारतीय दूतावास से आधिकारिक नोटिस जारी किया गया था.
भारत सरकार ने अब तक तालिबानी सत्ता को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है. हालांकि, काबुल स्थित भारतीय दूतावास पिछले साल जून, 2022 में खोल दिया गया था.

इमेज स्रोत, ANI
ओवैसी निकालेंगे बिहार के सीमांचल में पदयात्रा
बिहार के सीमांचल क्षेत्र में बीजेपी और महागठबंधन की जनसभाओं के बाद एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस क्षेत्र में पदयात्रा निकालने का एलान किया है.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, 'एआईएमआईएम की बिहार शाखा के प्रमुख अख्तरुल ईमान ने कहा है कि असदुद्दीन ओवैसी 18-19 मार्च को अधिकार पदयात्रा के दौरान पूर्णिया के बैसी-अमौर क्षेत्र और किशनगंज के कुछ इलाकों में पदयात्रा करेंगे.'
ईमान ने बताया है कि इस दौरान पार्टी नेता और कार्यकर्ता आम लोगों से बात करते हुए पिछली सरकारों की ओर से सीमांचल क्षेत्र के साथ किए गए अन्याय का मुद्दा उठाएंगे.
चुनाव नज़दीक आने की वजह से सीमांचल क्षेत्र में सभी पार्टियों का रुझान बढ़ता दिख रहा है.
पिछले साल अमित शाह ने सितंबर में पूर्णिया में एक रैली को संबोधित किया था. इसके बाद बिहार में सरकार चला रहे सात दलों के महागठबंधन ने फ़रवरी में इस क्षेत्र में एक रैली को संबोधित किया है.
अख़बार से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक अजय कुमार ने बताया है कि 'आम चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सभी पार्टियों ने बिगुल बजा दिया है. ध्रुवीकरण की राजनीति के दौर में बिहार के उत्तर पूर्व में स्थित सीमांचल क्षेत्र मुसलमान बहुल होने की वजह से बीजेपी और महागठबंधन दोनों के लिए फ़ायदे का सौदा बन सकता है.'

इमेज स्रोत, ANI
सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से मस्जिद हटाने पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर से मस्जिद हटाने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.
अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट का फ़ैसला बरक़रार रखते हुए मस्जिद हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया है.
इसके साथ ही याचिकाकर्ता वक़्फ़ मस्जिद हाईकोर्ट को वैकल्पिक भूमि के लिए राज्य सरकार के समक्ष प्रतिवेदन करने की अनुमति भी दी.
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा, 'हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं नज़र आता है. हालांकि यह याचिकाकर्ताओं के लिए खुला होगा कि वे वैकल्पिक भूमि की मांग के लिए राज्य सरकार को एक विस्तृत प्रतिवेदन दें, जिस पर क़ानून के अनुसार विचार किया जा सकता हो.'
पीठ ने मस्जिद हटाने का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं से कहा, भूमि एक पट्टे की संपत्ति थी जिसे समाप्त कर दिया गया था. वे अधिकार के तौर पर इसे कायम रखने का दावा नहीं कर सकते.
शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी.
पीठ ने ये भी कहा है कि 'हम याचिकाकर्ताओं को विचाराधीन निर्माण को हटाने के लिए तीन महीने का समय देते हैं. यदि आज से तीन महीने की अवधि में निर्माण नहीं हटाया जाता है तो हाईकोर्ट समेत अन्य अथॉरिटी के लिए उसे हटाने या गिराने का विकल्प खुला रहेगा.'
ये भी पढ़ें:-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















