BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

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नमस्कार!
उम्मीद है कि आप स्वस्थ होंगे और आपके आस-पास सब अच्छा होगा.
हमें मालूम है कि हफ़्ते भर आपके पास वक़्त की कुछ कमी रही होगी.
इस वजह से आप देश दुनिया की अहम ख़बरों को देख या पढ़ नहीं पाए होंगे.
इसीलिए हम लाए हैं आपके लिए बीते हफ़्ते की कुछ अहम ख़बरें. शायद इन ख़बरों में से कुछ पर आपकी नज़र नहीं गई होगी.
अगर आपने ये पांच ख़बरें पढ़ लीं तो समझिए कि आपको बीते हफ़्ते की ख़ास खबरें पता चल गईं.
नगालैंड: 60 साल में पहली बार महिला विधायक
नगालैंड में दो महिला उम्मीदवारों ने विधानसभा चुनाव जीत कर इतिहास रच दिया है.
60 विधानसभा सीटों वाले नगालैंड को 1963 में राज्य का दर्जा मिला था लेकिन यह पहली बार है जब राज्य के विधानसभा चुनाव में किसी महिला को जीत मिली है. हालांकि यहां की महिलाएं देश की संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व पहले ही कर चुकी हैं.
इस बार नगालैंड विधानसभा चुनाव में कुल 183 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे जिनमें महिलाओं की संख्या केवल चार थी.
इनमें से दो महिला प्रत्याशियों हेकानी जाखलू (दीमापुर-तृतीय सीट) और सलहौतुओनुओ (पश्चिमी अंगामी सीट) को सत्ताधारी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) ने मैदान में उतारा.
वहीं कांग्रेस ने तेनिंग विधानसभा सीट से रोज़ी थॉमसन और बीजेपी ने अटोइजू विधानसभा सीट से काहुली सेमा को मैदान में उतारा.
बीजेपी और कांग्रेस की महिला प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकीं लेकिन सत्ताधारी एनडीपीपी की दोनों महिला उम्मीदवार हेखनी जाखलू और सलहौतुओनुओ न केवल चुनाव जीतने में कामयाब रहीं बल्कि राज्य से विधायक चुनी जाने वाली पहली महिला होने का तमगा भी हासिल किया.
नगालैंड में बीजेपी और स्थानीय नगा पार्टी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) मिलकर चुनाव मैदान में उतरीं. पूरी कहानी यहां पढ़िए.
क्या अमेरिका और यूरोप के दबदबे का दौर अब खत्म होने वाला है?

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यूक्रेन पर रूस के हमले का दूसरा साल शुरू हो चुका है. ऐसा लगता है कि इस युद्ध ने विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है. पश्चिमी देशों के राजनेता कहते हैं कि इस जंग से मौजूदा विश्व व्यवस्था या वर्ल्ड ऑर्डर को बहुत ज़्यादा ख़तरा पैदा हो गया है.
उनका कहना है कि ये विश्व व्यवस्था नियमों पर आधारित है और उन नियमों में बदलाव के साफ़ संकेत दिख रहे हैं.
विकसित देश (अमेरिका और यूरोपीय देश) भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील जैसे विकासशील देशों को इस बात के लिए राज़ी करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं कि वो रूसी आक्रमण के ख़िलाफ़ मोार्चाबंदी में उनके साथ आ जाएँ.
पश्चिमी देश, यूक्रेन पर रूस के हमले को न केवल यूरोप पर हमला बता रहे हैं, बल्कि इसे लोकतांत्रिक दुनिया पर आक्रमण बता रहे हैं, और इसीलिए वो चाहते हैं कि दुनिया की उभरती हुई ताक़तें यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की निंदा करें.
यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से बहुत पहले से ही मौजूदा विश्व व्यवस्था को चीन जैसी उभरती हुई वैश्विक शक्तियों से चुनौती मिल रही थी. और, भारत जैसे देश ये सवाल उठा रहे थे कि आख़िर संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में उभरती हुई ताक़तों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं हो? पूरी कहानी यहां पढ़ें.
चीन ही क्या पाकिस्तान को बना रहा है कंगाल?

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पाकिस्तान के केंद्रीय वित्त मंत्री इसहाक़ डार ने चीन की ओर से 70 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ मिलने का एलान किया तो शायद उनके ख़ुश होने की वजह पाकिस्तान के कम होते विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी थी लेकिन चीन और चीनी बैंकों से हासिल किए गए क़र्ज़ अब पाकिस्तान पर कुल क़र्ज़ का एक तिहाई हो चुके हैं.
पाकिस्तान पर जितना क़र्ज़ है बीते आठ सालों में चीन और चीनी कमर्शियल बैंकों से हासिल किए गए क़र्ज़ों में काफ़ी बढ़ोतरी देखी गई है.
ऐसे में पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक हालत की एक बड़ी वजह विदेशी क़र्ज़ों की वापसी को बताया जा रहा है जिसकी वजह से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में काफ़ी कमी हो रही है.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान को मौजूदा वित्तीय वर्ष और अगले दो वित्तीय वर्षों में विदेशी क़र्ज़ों में बड़ी अदायगी करनी है.
मौजूदा वित्तीय वर्ष के बाक़ी महीनों में पाकिस्तान को आठ अरब डॉलर के विदेशी क़र्ज़ों की अदायगी करनी है. इससे ज़्यादा बड़ी चुनौती अगले दो सालों में पाकिस्तान को 50 अरब डॉलर का विदेशी क़र्ज़ अदा करना है. इसमें वो क़र्ज़ भी शामिल है जो चीन और चीनी कमर्शियल बैंकों को वापस करना है.
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़ चीनी क़र्ज़ बढ़ने की वजह पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारा (CPEC) भी है जिसमें ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में क़र्ज़ के रूप में चीन से पैसा लिया गया है इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए चीनी कमर्शियल बैंकों से भी क़र्ज़ लिया गया है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
टी20 में नया रिकॉर्ड: पूरी टीम 10 रन पर ढेर

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ये कोई गली मुहल्ले की टीमों के बीच हुआ मुक़ाबला नहीं था. एक तरफ थी स्पेन की टीम और दूसरी तरफ थी आइल ऑफ़ मैन की टीम.
आइल ऑफ़ मैन टीम, साल 2017 से इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की एसोसिएट मेंबर है. ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में ये टीम यूरोपियन सब रीज़नल क्वालिफ़ायर्स में भी हिस्सा ले चुकी है.
लेकिन स्पेन के ख़िलाफ़ रविवार को खेले गए मैच में आइल ऑफ़ मैन का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा.
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टीम सिर्फ़ 10 रन पर आउट हो गई और उसके नाम पुरुषों के ट्वेंटी-20 मुक़ाबले का न्यूनतम स्कोर दर्ज हो गया.
इसके पहले न्यूनतम स्कोर का रिकॉर्ड सिडनी थंडर्स के नाम था. बीते साल (2022) एडिलेड स्ट्राइकर्स के ख़िलाफ़ मैच में सिडनी थंडर्स की टीम 15 रन ही बना सकी थी.
इसके पहले ये रिकॉर्ड तुर्की के नाम था. साल 2019 में तुर्की की टीम चेक रिपब्लिक के ख़िलाफ़ 21 रन ही बना सकी थी.
माहवारी के दौरान दर्द, इन देशों में है छुट्टियों का प्रावधान

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माहवारी के दौरान दर्द को देखते हुए स्पेन में महिलाओं को हर महीने में तीन दिन की छुट्टी लेने का अधिकार दिया गया है.
वहीं महिलाओं को तीन दिन की छुट्टी को पाँच दिन करने का विकल्प भी दिया गया है.
देश की संसद में इसी साल 16 फरवरी को इस संबंध में विधेयक को मंज़ूरी दी गई.
स्पेन में यौन और प्रजनन अधिकारों से जुड़े कई अधिकारों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें ये एक महत्वपूर्ण फ़ैसला है.
स्पेन यूरोप का पहला देश है, जहाँ महिलाओं को माहवारी के दौरान पेड लीव दी जाएँगी.
स्पेन की मंत्री आयरीन मोंटेरो ने संसद में कहा कि इन अधिकारों के बिना महिलाएँ पूर्ण रूप से नागरिक नहीं हैं और सरकार महिलाओं को माहवारी के दौरान मिलने वाली इन छुट्टियों का ख़र्च वहन करेगी.
डॉक्टरों और अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ ओबस्ट्रेशियन एंड गायनाकॉलोजिस्ट के मुताबिक़ जिन महिलाओं को माहवारी होती है, उनमें से आधी से ज़्यादा को हर महीने एक या दो दिन दर्द होता है और कुछ के लिए दर्द इतना अधिक होता है कि वो अपने नियमित काम को भी ठीक से नहीं कर पाती हैं.
स्पेन के इस फ़ैसले को काफ़ी अहम और प्रगतिशील माना जा रहा है.
वहीं इस बात को लेकर फिर बहस तेज़ हो गई है कि क्या भारत में इस तरह का प्रावधान किया जा सकता है?
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