नित्यानंद का कैलासा: संयुक्त राष्ट्र ने कहा काल्पनिक देश के बयान को करेंगे नज़रअंदाज़

विजयप्रिया

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इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में विजयप्रिया (काली पगड़ी में) ने ख़ुद को कैलासा का यूएन में स्थाई प्रतिनिधि बताया था.
    • Author, मेरिल सेबेस्टियन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें एक भगोड़े भारतीय गुरु की प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में भाषण दे रही हैं.

ये प्रतिनिधि स्वयं को कैलासा नाम के एक काल्पनिक देश का प्रतिनिधि बताती हैं. अब संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में अपना पक्ष सामने रखा है.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो जिनेवा में हुए उसके दो कार्यक्रमों में एक भगोड़े भारतीय गुरु के काल्पनिक देश के प्रतिनिधि की बातों को नज़रअंदाज़ करेगा.

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा है कि जिन विषयों पर बैठक में चर्चा हो रही थी उसके हिसाब से प्रतिनिधि का भाषण अप्रासंगिक था.

स्वयंभू गुरु नित्यानंद पर भारत में बलात्कार और यौन हिंसा के केस हैं.

नित्यानंद अपने ऊपर लगे अभियोगों का खंडन करते रहे हैं. उन्होंने साल 2019 में यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ कैलासा (यूएसके) नामक एक काल्पनिक देश की स्थापना की थी.

भारत में सुर्ख़ियां

नित्यानंद

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संयुक्त राष्ट्र के दो कार्यक्रमों में इस काल्पनिक देश के प्रतिनिधि का भाषण भारत में सुर्खिया बटोर रहा है. भारत सरकार ने इस विषय पर फ़िलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है.

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने ईमेल के ज़रिए बीबीसी को बताया है, "यूएसके के प्रतनिधि ने फ़रवरी में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के दो कार्यक्रमों को अटैंड किया था."

पहला कार्यक्रम महिलाओं की निणार्यक पदों पर भागीदारी के बारे में था. उसका आयोजन कमिटी ऑन इलिमिनेशन ऑफ़ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वूमैन (सीईडीएडब्ल्यू) ने किया था. ये कार्यक्रम 22 फ़रवरी को हुआ था.

इसके बाद 24 फ़रवरी को एक बार फिर यूएसके के प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में हिस्सा लिया था. उस बैठक में विकास की दिशा के बारे में चर्चा हो रही थी.

यूएन की मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त विवियन क्वॉक ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की ये आम बैठकें होती हैं जिनमें कोई भी व्यक्ति अपने विचार रख सकता है.

विवियन क्वॉक ने कहा कि यूएसके के प्रतिनिधि के विचारों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जाएगा क्योंकि जिस विषय पर बैठक हो रही थी उसके अनुसार उनके विचार अप्रासंगिक थे.

उच्चायुक्त ने ये भी कहा कि दूसरी बैठक में व्यक्त किए गए विचार भी अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा नहीं होंगे.

कैलासा की प्रतिनिधि ने क्या कहा था

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संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट पर मौजूद एक वीडियो में जब मीटिंग में आए लोगों से सवाल पूछने को कहा गया तो एक महिला ने प्रश्न पूछा.

इस महिला ने अपना नाम विजयप्रिया नित्यानंद बताया. महिला ने कहा कि वो 'यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ कैलासा' की संयुक्त राष्ट्र में स्थाई राजदूत हैं.

विजयप्रिया ने कहा कि वे 'सतत विकास' से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछना चाहती हैं.

इसके बाद विजयप्रिया कहती हैं कि यूएसके हिंदुओं का पहला संप्रभु देश है जिसकी स्थापना नित्यानंद ने की है. उन्होंने नित्यानंद को हिंदू धर्म का 'सर्वोच्च गुरू' बताया.

इसके बाद विजयप्रिया ने दावा किया, "कैलासा, विकास के मामलों में एक सफल देश है क्योंकि वहां सबको भोजन, रहने की जगह और मेडिकल केयर मुफ़्त मुहैया करवाई जाती है."

उनका प्रश्न था - नित्यानंद और कैलासा की 'प्रताड़ना' को रोकने के लिए क्या क़दम उठाए जा सकते हैं?

प्रीति सरन एक पूर्व भारतीय राजनयिक हैं जो इन दो में से एक बैठक को करवाने वाली संस्था CESCR में एशिया पैसेफ़िक क्षेत्र की प्रमुख हैं. बीबीसी ने उनका पक्ष जानने के लिए ईमेल लिखा है.

कौन है नित्यानंद?

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बलात्कार के आरोपों से घिरने के बाद नित्यानंद साल 2019 में भारत से भाग गए थे. उनकी एक महिला श्रद्धालु ने आरोप लगाया था कि नित्यानंद ने साल 2010 में उनका रेप किया था.

इसके बाद नित्यानंद को थोड़े समय के लिए गिरफ़्तार कर लिया गया था. बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए थे. वर्ष 2018 में उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की गई थी.

2019 में भारत छोड़ने से कुछ दिन पहले नित्यानंद के विरुद्ध एक और पुलिस शिकायत दर्ज की गई थी. शिकायत में कहा गया था कि नित्यानंद ने बच्चों का अपहरण कर, उन्हें गुजरात के अपने आश्रम में बंद करके रखा है.

फ़िलहाल ये साफ़ नहीं है कि नित्यानंद भारत छोड़कर कैसे भागे और अपने काल्पनिक देश कैलासा में कैसे पहुँचे.

कहाँ है ये काल्पनिक देश ?

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वर्ष 2019 में भारत से जाने के बाद नित्यानंद ने दावा किया कि उन्होंने इक्वाडोर के तट के पास एक द्वीप ख़रीदा है.

अब वे उसी द्वीप को यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ कैलासा कहते हैं.

उस वक्त इक्वाडोर ने नित्यानंद के देश में होने से इंकार किया था. इक्वाडोर ने कहा था कि 'नित्यानंद को इक्वाडोर में शरण नहीं दी गई है. इक्वाडोर की सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की है.'

2019 के बाद नित्यानंद सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं. लेकिन वे अपने प्रवचनों के वीडियो सोशल मीडिया पर डालते रहते हैं.

ब्रिटिश अख़बार 'द गार्डियन' ने पिछले साल लिखा था कि नित्यानंद के ब्रिटिश प्रतिनिधि ने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की एक ग्लैमर भरी दीवाली पार्टी में हिस्सा लिया था. उन्हें कंज़र्वेटिव पार्टी के दो सांसदों ने आमंत्रित किया था.

फ़रवरी में संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के बारे में नित्यानंद ने विजयप्रिया नित्यानंद एक तस्वीर ट्वीट की थी.

उसके बाद उन्होंने विजयप्रिया का परिचय यूके, कनाडा समेत कई देशों के लिए कैलासा के राजदूत के रूप में करवाया.

कैलासा की वेबसाइट के अनुसार दुनिया के दो अरब हिंदू उसका हिस्सा हैं. कैलासा का दावा है कि उसका अपना ध्वज, संविधान, केंद्रीय बैंक, पास और राष्ट्र चिह्न भी है.

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