उंगली काटने वाले बयान से पलटे नित्यानंद, मांगी 'माफी'

नित्यानंदर राय

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    • Author, अभिमन्यु कुमार साहा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बिहार के बीजेपी अध्यक्ष और उजियारपुर से लोकसभा सांसद नित्यानंद राय ने सोमवार को एक विवादित बयान दिया.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ उठने वाली उंगली को काट दिया जाना चाहिए.

पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में कानू महासम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा था, "एक गरीब का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना है. देश के एक-एक व्यक्ति को सभी चीजों से ऊपर उठकर उन पर स्वाभिमान होना चाहिए और इसकी कद्र होनी चाहिए. उनकी ओर उठने वाली उंगली और हाथ को हम सब मिलकर या तो तोड़ दें या जरूरत पड़े तो उसे काट दें."

इस बयान की जब चौतरफा आलोचना होने लगी तो वे इससे पलट गए और माफ़ी मांगी.

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राजनीतिक गलियारों में...

बीबीसी से बात करते हुए नित्यानंद राय ने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि जो मैंने कल बोला था, उसके दो लाइन आगे और पीछे जाएंगे तो सही अर्थ समझ में आ जाएगा. फिर भी अगर किसी को मेरे इस बयान से ठेस पहुंची है तो मैं निश्चित रूप से क्षमाप्रार्थी हूं. मैं खेद व्यक्त करता हूं."

नित्यानंद के बयान को राजनीतिक गलियारों में प्रधानमंत्री पर सवाल करने वालों को धमकी के रूप में देखा जा रहा है.

इस पर सफाई देते हुए नित्यानंद ने कहा, "मैंने उंगली काटने की बात मुहावरे के रूप में कही थी. जिस लहजे और विषय के संदर्भ में उन शब्दों का प्रयोग किया गया था वो स्पष्ट रूप से मुहावरे थे. मैंने आतंकवाद, भ्रष्टाचार, गरीबी से लड़ने की देश की ताकत के बारे में कहा था. जो इनमें बाधक बन रहे हैं, उनके हाथ काटे जाने चाहिए."

कार्टून

इससे पहले भी विवादों में रहे हैं बयान

उन्होंने अपना बचाव करते हुए आगे कहा, "वैसे तो लोग दफन करने की बात भी करते हैं. दफन करने का मतलब होता है कब्र खोदकर उसमें किसी को जिंदा डाल देना."

नित्यानंद राय लोकसभा सांसद हैं. उन्हें 30 नवंबर 2016 को भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा गया था.

यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने विवादित बयान दिए हैं.

इससे पहले अगस्त के महीने में उन्होंने कहा था कि मस्जिदों से अजान और चर्च से घंटियों की आवाज़ के बजाय 'भारत माता की जय' की आवाज़ आनी चाहिए.

इस बयान पर भी वे ज्यादा देर अडिग नहीं रह सके थे. वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वामी विवेकानंद का रूप बता चुके हैं.

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'सभी को आलोचना का अधिकार'

उनके बयान को पार्टी का बयान समझे जाने पर नित्यानंद ने कहा कि इसे उनकी पार्टी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "मेरे बोलने का कहीं से भी ऐसा अर्थ नहीं था. बयान का अनर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए."

यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी नेता ने धमकी भरे बोल बोले हों. भाजपा के नेता अक्सर प्रधानमंत्री की आलोचना करने वालों पर हमला बोलते रहे हैं.

क्या एक लोकतांत्रिक देश में प्रधानमंत्री सवालों के घेरे में नहीं आते हैं, इस सवाल पर नित्यानंद ने कहा, "देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है. यहां किसी को भी आलोचना करने का अधिकार है. लेकिन स्पष्ट रूप से कल के विषय में माफी मांगना चाहता हूं."

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