विदेश मंत्री के दौरे से पहले बोला चीन-अहम हैं भारत के साथ रिश्ते

चीन के विदेश मंत्री

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चीन ने कहा है कि वो भारत के साथ अपनी साझेदारी को 'महत्व' देता है. भारत और चीन के बीच 'मजबूत रिश्ते' दोनों देशों और वहां के लोगों के बुनियादी हित में है.

चीन का ये बयान ऐसे समय आया है जब उनके विदेश मंत्री चिन गैंग जी 20 देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. उम्मीद है कि इस मीटिंग के इतर उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत होगी. जी 20 के विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार को होगी.

चीन के विदेश मंत्री का ओहदा संभालने के बाद चिन गैंग की ये पहली भारत यात्रा है. भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से भी उनकी पहली मुलाकात होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हॉन्ग कॉन्ग से प्रकाशित होने वाले अख़बार 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने चीनी विदेश मंत्री के भारत दौरे को "रिश्तों को बेहतर करने का प्रयास" बताया है.

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में बने गतिरोध को सुलझाने के लिए सैन्य अधिकारियों के बीच हुई 17 दौर की उच्च स्तरीय बातचीत में हुई प्रगति के मद्देनज़र चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की मीटिंग अहम मानी जा रही है.

चीन के विदेश मंत्री

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चीनी प्रवक्ता ने क्या कहा?

चिन और जयशंकर के बीच होने वाली मीटिंग को लेकर पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने पत्रकारों से कहा, "चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को महत्व देता है."

उन्होंने कहा, "चीन और भारत पुरानी सभ्यताएं हैं और दोनों देशों में एक अरब से ज़्यादा लोग रहते हैं. हम दोनों पड़ोसी हैं और दोनों ही उभरती हुई अर्थव्यवस्था हैं. "

माओ ने कहा, "भारत और चीन के मजबूत रिश्ते दोनों देशों के और वहां के लोगों के बुनियादी हित को पूरा करते हैं."

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री चिन के भारत दौरे का ब्योरा बाद में जारी किया जाएगा. उन्होंने चीनी विदेश मंत्री और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच संभावित बैठक की पुष्टि नहीं की.

भारतीय सैनिक

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भारत-चीन के बीच गतिरोध

भारत और चीन के रिश्तों में मई 2020 में तब ठहराव आ गया, जब पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव हुआ था.

दोनों देशों के आला सैन्य कमांडर गतिरोध को दूर करने के लिए 17 दौर की बैठक कर चुके हैं.

भारत चीन सीमा विवाद

भारत कहता रहा है कि चीन के साथ रिश्ते तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक कि सीमाई इलाकों में शांति न हो.

बीते हफ़्ते भारत और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी. 'वर्किंग मेकनिज़्म फ़ॉर कंसल्टेशन एंड कॉर्डिनेशन ऑन इंडिया चाइना बॉर्डर अफ़ेयर्स (डब्लूएमसीसी)' की इस बैठक में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बचे हुए इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने के प्रस्तावों पर चर्चा हुई.

डब्लूएमसीसी की 2019 के बाद ये पहली आमने सामने की बैठक थी.

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) डॉक्टर शिल्पाक अम्बुले ने भारतीय डेलिगेशन की अगुवाई की थी. उन्होंने चीन की उप विदेश मंत्री ख्वा चुनयिंग से भी मुलाकात की.

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग

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'तनाव कम करने में मिलेगी मदद'

चीनी विदेश मंत्री की भारत यात्रा को लेकर शंघाई म्यूनिसिपल सेंटर फ़ॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ में इंस्टीट्यूट फ़ॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया स्टडीज़ के प्रमुख वांग देहुआ ने कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच सीमा गतिरोध को लेकर बने तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने उनके हवाले से बताया, "दोतरफ़ा रिश्तों के लिहाज से ये एक अहम कदम है. हालांकि, सीमा विवाद में जल्दी ही कोई समाधान हासिल होने की उम्मीद असंभव है लेकिन इससे उन्हें रिश्तों में हुए नुक़सान की भरपाई का मौका मिलेगा. इससे विवाद वाले इलाक़ों के करीब हालात को स्थिर करने में भी मदद मिलेगी."

वांग ने कहा, "ऐसा लगता है कि मोदी सरकार कुछ हद तक चीन की चिंता को समझती है और खुद भी चाहती है कि यूक्रेन संकट इस साल होने वाले जी 20 सम्मेलन पर हावी न हो जाए. इससे चीन को नई दिल्ली में समान ज़मीन तलाशने का मौका मिल सकता है."

टाइमलाइन

उनकी राय में भारत और चीन के रिश्तों के दरम्यान सीमा विवाद सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में तेज़ी से कोई सुधार आए, ये मुश्किल लगता है.

वांग ने कहा, "अमेरिका और चीन के बीच की प्रतिद्वंद्विता में चीन भारत को दूसरे पलड़े में झुके हुए देश के तौर पर देखता है. भारत (चीन की चुनौती के मुक़ाबले के लिए) अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और पश्चिमी की दूसरी शक्तियों के साथ साझेदारी विकसित करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहा है."

भारत ने बीते साल एक दिसंबर को जी 20 की अध्यक्षता ग्रहण की है.

जी 20 के सदस्य देश की दुनिया की कुल जीडीपी की 85 प्रतिशत भागेदारी है. कुल व्यापार में उनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से ज़्यादा है. इन देशों में दुनिया की दो तिहाई आबादी रहती है.

जी 20 के सदस्य देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.

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