प्रवासी भारतीय सम्मेलनः इंदौर में सौंदर्यीकरण के नाम पर ढकी जा रही बस्तियां, झोपड़े

इंदौर

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इमेज कैप्शन, सुपर कॉरिडोर तक की जो बस्तियां और कॉलोनियां हैं, उन्हें छिपाने के लिए दीवारें उठाई जा रही हैं
    • Author, समीर ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, इंदौर से

भारत के सबसे स्वच्छ शहर मध्य प्रदेश के इंदौर में 17वां प्रवासी भारतीय सम्मेलन होने जा रहा है जिसकी ब्रांडिंग देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने विदेश दौरे के दौरान की थी.

8, 9 और 10 जनवरी 2023 को आयोजित हो रहे इस सम्मेलन के लिए इंदौर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है.

इस आयोजन के मद्देनज़र इंदौर नगर निगम शहर के उन इलाकों के सौन्दर्यीकरण का काम कर रहा है जिन सड़कों और कॉरिडोर से प्रवासी भारतीय गुज़रेंगे.

लेकिन इस सौन्दर्यीकरण में एयरपोर्ट रोड से लेकर सुपर कॉरिडोर तक की जो बस्तियां और कॉलोनियां हैं, उन्हें छिपाने के लिए दीवारें उठाई जा रही हैं और उन पर लोहे की जालियां लगाई जा रही हैं.

वजह, इन सड़कों और कॉरिडोर के पीछे की हक़ीक़त प्रवासी भारतीयों की नज़रों में न पड़े.

इन दीवारों के पीछे की दुकानें बीते चार महीनों से लगभग बंद जैसी हैं और फिलहाल स्थिति ये है कि इसके पीछे रहने वालों तक एंबुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल है.

यहां रहने वालों के विरोध को बुलडोज़र का डर दिखा कर दबा दिया गया है. सरकारी पट्टे पर बनीं कुछ झोपड़ियों की बिजली तक काट दी गईं.

एयरपोर्ट से सुपर कॉरिडोर तक 'दीवार'

एयरपोर्ट से लेकर सुपर कॉरिडोर तक के मुख्य मार्ग पर लगभग 2 किलोमीटर तक 100 से अधिक मकान और कुछ दुकानें हैं, जो मध्यम और ग़रीब वर्गों की हैं.

इन मकानों और दुकानों को सौंदर्यीकरण के नाम पर प्रशासन की ओर से ढक दिया गया है.

नगर निगम प्रशासन ने सौंदर्यीकरण के लिहाज़ से एयरपोर्ट के ठीक सामने की सड़क से सटे फुटपाथ और दीवारों को लोहे की खूबसूरत चादरों से ढक दिया है.

वहीं, एक और सर्विस रोड बनाई गई है ताकि बस्ती और छोटी कॉलोनियों के लोग मुख्य मार्ग की बजाय उससे अपने घरों, दुकानों को जाएं.

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इमेज कैप्शन, दीवार बनाने का काम प्रगति पर

देवी अहिल्या बाई एयरपोर्ट के ठीक सामने 4 महीने पहले दीवार बनाने का काम शुरू हुआ था. जब लोगों ने इसका विरोध किया तो उनके मकान पर बुलडोज़र चलाने की धमकी देकर नगर निगम प्रशासन ने उन्हें शांत कर दिया.

उस दौरान ये कहा गया था कि दीवारें केवल 4 फीट ऊंची बनाई जाएंगी लेकिन समय बीतने के साथ नगर प्रशासन ने इस पर ऊंची लोहे की चादरें भी लगा दीं.

कुछ जगहों पर सर्विस रोड बनाई तो गई लेकिन इसकी चौड़ाई बहुत कम होने के कारण यहां से पैदल गुज़रना भी मुश्किल है. यहाँ रहने वाले अपने दो पहिए वाहनों तक को घर नहीं ला सकते हैं.

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इक्का-दुक्का दुकानें बची हैं

बीते चार महीनों से यहां दुकानें नाममात्र की बची हैं. सौन्दर्यीकरण के नाम पर जो काम हो रहे हैं वो अस्थायी नहीं हैं लिहाज़ा यहां के लोगों को प्रवासी भारतीय सम्मेलन के बाद भी सर्विस रोड से ही काम चलाना पड़ेगा क्योंकि मुख्य मार्ग की दीवारें इनके पीछे रहने वालों को अब एयरपोर्ट की मुख्य मार्ग से हमेशा के लिए जुदा कर देगी.

इस इलाके के वासिंदे फैब्रिकेशन का काम करने वाले नीलेश ने बीबीसी से कहा, "क्या पता दीवार किस उद्देश्य से उठाई गई है हमें नहीं मालूम. हमने विरोध किया तो कहा गया कि तुम्हारा मकान तोड़ देंगे, पूरे मकान का काग़ज़ लाओ. तुम्हारे घर फ़ुटपाथ की जगह पर बने हैं. उनका कहना है कि अगर ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारे मकानों को तोड़ देंगे."

नीलेश कहते हैं, "ये मकान हमारे बाप-दादा के समय से हमारा है. हम अब बोलने की स्थिति में नहीं हैं. बीते दो महीने से घर बैठा हूं. फैब्रिकेशन में भारी लोहे का सामान इस्तेमाल होता है. अगर काम कर के कुछ बना देंगे तो लेकर बाहर कैसे जाएंगे."

वे कहते हैं, "इस काम को शुरू हुए पांच महीने हो गए हैं और अब तक सर्विस रोड का काम पूरा नहीं हुआ है."

नीलेश

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'प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आएंगे इसलिए ये किया जा रहा है'

इसी इलाके में रहने वालीं चंदा बाई अपना नाम बताते हुए घबराती हैं और कहती हैं, "नाम क्यों बताएं, इस दीवार से हमें आपत्ति है. इधर सड़क नहीं बना रही है सरकार. तीसरी मंज़िल तक दीवार उठा दी गई है. घर पर धूप भी नहीं आती. सर्विस रोड नहीं होने के कारण हमारी गाड़ी घर तक नहीं आ रही है. स्थिति ये है कि गाड़ी से कोई पेट्रोल भी निकाल लेता है. सरकार देगी क्या?"

वे सवाल उठाते हुए कहती हैं, "सरकार ने जितने रुपये यहां खर्च किए हैं, उसमें से कुछ हमें दे देती तो हम ही कुछ अच्छा तो बना लेते क्योंकि अब तक तो सर्विस रोड बनी नहीं."

चंदा बाई के पति राजू सिंह पैरालिसिस (लकवा) के मरीज़ हैं और उन्हें हार्ट अटैक भी आ चुका है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "ये दीवार बनने के बाद हमारे सड़क का रास्ता बंद हो गया. अगर मैं बीमार हो गया तो गाड़ी भी नहीं आएगी. मैं अस्पताल कैसे जाऊंगा. बोला गया था कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आने वाले हैं, पटेल नगर के अंदर सर्विस रोड बना दिया जाएगा. '''

''लेकिन अभी तो सौंदर्यीकरण का काम ही चल रहा है यहां. विदेशी लोग आ रहे हैं तो ये सब किया जा रहा है और हम ग़रीबों को इसके पीछे दबा दिया गया है."

राजू सिंह

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'ग़रीबों को उसके पीछे डाल दिया, वो दिखेंगे नहीं'

इसी इलाके में रहने वाले कैलाश भाई बीबीसी से कहते हैं, "दीवार उठाकर उनको यह फ़ायदा मिल रहा है कि ग़रीबी को उसके पीछे डाल दिया, वो दिखेंगे नहीं."

इंदौर एयरपोर्ट रोड पर सबसे पहले सुपर कॉरिडोर चौराहे के कुछ पहले उस बस्ती को हटाने का प्रयास किया गया जहां 50 से अधिक झोपड़ियां हैं.

50-60 साल से इस बस्ती में रह रहे ग़रीब परिवारों ने जब अपनी जगह नहीं छोड़ी तो प्रशासन ने यहां की लाइट काट दी लेकिन विरोध होने पर कुछ घरों की बिजली जोड़ दी गई.

हालांकि बाद में इसे रंगे हुए लोहे की चादरों से छिपाने की कोशिश की गई और आवागमन के पुराने रास्तों को बंद किया जा रहा है. विरोध किए जाने पर कुछ हिस्सों को छोड़ दिया गया.

बस्ती में रहने वालीं गीताबाई ने बीबीसी को बताया, "हमें यहां रहते हुए 50 साल से ऊपर हो गए. कुछ दिन पहले हमारे बिजली के कनेक्शन काट दिए गए, हालांकि कुछ लोगों के कनेक्शन बाद में जोड़ दिए गए."

वे कहते हैं, "हमारे घरों के सामने लोहे की चादरें लगाकर रास्ते बंद कर रहे थे, जब विरोध हुआ तो रास्ता रहने दिया, लेकिन चादर तो लगा दी है."

गीता बाई

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जिन ठेकेदारों के हाथ में ये काम दिया गया है उनमें से एक हैं पप्पू भाटिया.

पप्पू भाटिया कहते हैं कि वे लेबर कॉन्ट्रैक्टर हैं.

वे बताते हैं, "डिवाइडर का काम चल रहा है और फुटपाथ का काम भी. सड़क भी बन रही है. रंगाई-पुताई भी चल रही है. मैंने फुटपाथ, डिवाइडर और रिटर्निंग वॉल का भी काम किया है. जो सर्विस रोड है उसका 99 फ़ीसद काम हो गया है, बस एक जगह बची है. वह भी बन जाएगा."

पप्पू भाटिया

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वहीं नगर निगम का कहना है कि सर्विस रोड का काम हो गया है.

इंदौर नगर निगम के महापौर पुष्यमित्र भार्गव कहते हैं, "इंदौर के सौंदर्यीकरण के लिए सड़क को चौड़ा कर के ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है."

सर्विस रोड नहीं बनने के सवाल पर पुष्यमित्र भार्गव कहते हैं, "सर्विस रोड बन गया है. आप जाकर एक बार उसे देखिए और आगे बात करने के बजाय वह सवालों से बचते हुए निकल गए."

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