मध्य प्रदेश: दलित की बारात में डीजे बजाने को लेकर झड़प, चला बुलडोज़र

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को दलित समुदाय की एक बारात पर हुए हमले के सिलसिले में जिन 21 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई थी उनमें से 18 लोगों के 'अवैध निर्माणों को बुलडोज़र से गिरा दिया गया है'. इस घटना के सिलसिले में अबतक आठ लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है.
घटना के बारे में बताया गया शहर के जीरापुर इलाक़े में बारात जब वहाँ की मस्जिद के सामने से गुज़र रही ही तो मुसलमान युवकों ने ज़ोर से डीजे बजाए जाने से मना किया.
ज़िले के एसपी प्रदीप शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि युवकों के कहने पर डीजे की आवाज़ कम भी कर दी गई मगर इसी को लेकर बारातियों और युवकों के बीच फिर से तकरार शुरू हो गई.
घटना के संबंध में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बारात जब मस्जिद से आगे निकलकर शीतला माता के मंदिर के पास पहुंची तो डीजे फिर से बजने लगा. प्राथमिकी दुल्हन के पिता मदनलाल मालवीय के बयान के आधार पर दर्ज की गई है.
अतिक्रमण और कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि इसके बाद दोनों गुटों में संघर्ष की खबर आई जिसके बाद रोड़ेबाज़ी की घटना भी हुई. इस पथराव में कुल पांच लोग घायल हुए जिसमें पाँच साल का एक बच्चा भी शामिल है.
जीरापुर के थाना प्रभारी प्रभात गौड़ के अनुसार, रात में ही जैसे घटना की सूचना मिली तो पुलिस जबतक पहुँचती तबतक उपद्रव करने वाले फरार हो चुके थे. बाद में सीसीटीवी के फुटेज के माध्यम से अभियुक्तों की पहचान की गयी और उनके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गयी.
लेकिन घटना के बाद बृहस्पतिवार को ज़िला प्रशासन का अमला हरकत में आ गया और जिन लोगों के नाम प्राथमिकी में शामिल थे उनमें से 18 लोगों की संपत्ति पर एक दिन पहले ही निशान लगाने का काम किया गया.
प्रशासन का कहना है कि अभियुक्तों में से जिनकी संपत्तियों के रिकॉर्ड में पाया गया कि उन्होंने अतिक्रमण किया है, "वैसे घरों और संपत्तियों के अवैध निर्माण वाले हिस्से को तोड़ा गया है."
अधिकारियों का कहना है कि एक दिन पहले, यानी बुधवार की रात को ही, 'सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया था'.
जीरापुर के तहसीलदार अश्विन राम चिरामन का कहना था कि इन 18 अभियुक्तों के मकानों के अलावा कुल '30 और अतिक्रमण तोड़े गए हैं'. उनका कहना था कि अतिक्रमण के ख़िलाफ़ चले अभियान में कुल 48 ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गयीं और अतिक्रमण वाले हिस्से को तोड़ा गया.
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प्रशासन पर आरोप
इस घटना पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि राजगढ़ के ज़िला प्रशासन ने 'बेगुनाह लोगों के घर भी तोड़े हैं'.
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सिंह ने ट्वीट में कहा, "कुछ दिन पूर्व जीरापुर जिला राजगढ़ में अनुसूचित जाति की बारात पर कुछ शरारती तत्वों ने पत्थरबाज़ी की थी, उनकी मैं निंदा करता हूँ. वे लोग गिरफ्तार भी हो गए. लेकिन अब निर्दोष लोगों के मकान तोड़े जा रहे हैं. निर्दोष लोगों को दण्ड देना उचित नहीं है."
राजगढ़ वक्फ़ बोर्ड इन्तेज़ामिया कमिटी के अध्यक्ष मोहम्मद शेहजाद खान ने बीबीसी से बात करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्यवाही एकतरफ़ा है. उनका कहना था कि बेकुसूर लोगों के भी मकान तोड़ दिए गए.
उन्होंने कहा, "घटना दोनों तरफ़ से हुई. हमारी औरतों के साथ बदतमीजी की गयी. हमने भी थाने में लिखित शिकायत दी और लोगों के नाम दिए. लेकिन हमारी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया."
मगर जीरापुर के तहसीलदार आश्विन राम चिरामन कहते हैं, "वैसे भवनों या निर्माण को भी हमने हटाने का काम किया है जो आम रास्ते पर अतिक्रमण कर बनाए गए थे. ऐसे 30 लोगों का अतिक्रमण हटाया गया और रास्ते को चौड़ा किया गया. पूरे अभियान में कुल 48 लोगों का अतिक्रमण हटाया गया है और लगभग एक करोड़ 1 लाख 99 हजार के मूल्य की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है."
इसके अलावा राजगढ़ के ज़िला अधिकारी हर्ष दीक्षित ने घटना के बाद कम से कम छह लोगों के हथियारों के लाईसेंस को निरस्त करने का आदेश भी जारी किया है.

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एक ज़िले में तीसरा मामला
राजगढ़ जिले में इस तरह का ये तीसरा मामला है. इससे पहले ज़िले के ही करेड़ी के इलाके में दो लोगों के बीच ज़मीन के विवाद हो लेकर हुई हिंसक झड़प ने सांप्रदायिक रंग ले लिया था.
ये मामला 11 मई को कोतवाली थाना क्षेत्र का है. इस घटना के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा का कहना था कि पूर्व सरपंच प्रदीप वर्मा और पास के गांव के अल्लावेली खान के बीच विवाद इतना बढ़ा कि वर्मा पर खान और उनके परिवार के लोगों ने घातक हमला किया.
इस हमले के विरोध में भीड़ जमा होने लगी और कुछ ही देर बाद भीड़ अनियंत्रित हो गयी. भीड़ ने कुछ दुकानों और वाहनों में भी आग लगा दी.
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एसपी का कहना था कि घटना स्थल पर पहुंचे अनुमंडल अधिकारी के वाहन को भी भीड़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया था. इस सम्बन्ध में 50 लोगों के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
इसके बाद ज़िले के ही पिपलिया कलां में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गयी जब एक दलित दुल्हे को घोड़ी पर से न सिर्फ उतार दिया गया बल्कि भीड़ ने शादी के लिए लगे तंबुओं को भी उखाड़ दिया था. ये घटना 16 मई की है.
बारात पर पथराव भी हुआ और नौबत यहाँ तक आई कि ये शादी पुलिस अधीक्षक, जिला अधिकारी और भारी पुलिस की तैनाती के बीच पास के ही एक स्कूल में संपन्न हुई. मगर इन अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद हंगामा जारी रहा. पुलिस को इस दौरान आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े.
घटना के सिलसिले में स्थानीय दांगी समाज के 50 से ज़्यादा लोगों के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है जिनमें से कई अब भी फ़रार बताए जाते हैं.
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