ऋषभ पंत के शराब पीकर तेज़ रफ़्तार में गाड़ी चलाने की अफ़वाहों पर बोली पुलिस - प्रेस रिव्यू

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क्रिकेटर ऋषभ पंत के कार हादसे में घायल होने के बाद कइयों ने आशंका जताई थी कि शायद वह शराब पीकर बहुत तेज़ गाड़ी चला रहे थे. लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने इन आशंकाओं का खारिज किया है.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' ने पंत को लेकर उत्तराखंड पुलिस के बयान को पहले पेज पर प्रकाशित किया है. अख़बार ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा है कि पंत न तो शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे और न ही उनकी कार की गति बहुत तेज़ थी.
हादसे के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि कार रूड़की के नज़दीक डिवाइडर से टकरा गई.
हरिद्वार के एसएसपी अशोक कुमार ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, ''हमने यूपी बॉर्डर से लेकर दुर्घटनास्थल तक दस स्पीड कैमरा चेक करवाए लेकिन ऋषभ पंत की कार ने कहीं भी स्पीड लिमिट क्रॉस नहीं की थी.''
एसएसपी ने कहा कि पंत की गाड़ी की स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है. लेकिन कोई शराब पीकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से दिल्ली से गाड़ी चला कर आ रहा होता तो इससे पहले भी हादसा हो सकता था.
अख़बार के मुताबिक़ एसएसपी अशोक ने कहा कि पंत की गाड़ी का एक्सीडेंट नारसन के पास हुआ. उनकी गाड़ी ने कहीं भी स्पीड लिमिट को पार नहीं किया था. नेशनल हाईवे पर स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा है. पंत इस स्पीड लिमिट में ही गाड़ी चला रहे थे.

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अख़बार लिखता है कि देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में इलाज करवा रहे पंत से शनिवार को दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन के डायरेक्टर श्याम शर्मा मिले थे.
उन्होंने कहा कि पंत की हालत स्थिर है. बीसीसीआई पंत का इलाज कर रहे डॉक्टरों से संपर्क में हैं. पंत ने उन्हें बताया कि वह सड़क में बने गड्ढे से बचने की कोशिश कर रहे थे. इस चक्कर में हादसा हुआ.
इससे पहले उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा था कि पंत को नींद आ गई थी . इस वजह से ये हादसा हुआ.
उन्होंने कहा, ''सीसीटीवी फुटेज में कार डिवाइडर से टकराती हुई नज़र आई. चूंकि उनकी कार ने किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया है इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी.''

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राहुल पीएम कैंडिडेट होंगे पर मुझे कोई आपत्ति नहीं: नीतीश
राहुल गांधी ने शनिवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष से एकजुटता की अपील की और कोई 'वैकल्पिक विजन' बनाने को कहा.
एकता पर जोर देने लेकिन कोई विकल्प तैयार रखने वाले बयान के बीच बिहार की सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि अगर कांग्रेस राहुल गांधी को पीएम कैंडिडेट के तौर पर पेश करती है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.
नीतीश कुमार ने दावा किया कि वो विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के कैंडिडेट नहीं हैं.
'द हिंदू' की ख़बर के मुताबिक़ नीतीश ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर कांग्रेस राहुल गांधी को अपने प्रधानमंत्री कैंडिडेट के तौर पर पेश करना चाहती है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.
अख़बार के मुताबिक़ नीतीश ने कहा कि विपक्षी एकता को लेकर अड़चनें नहीं हैं. अगर कांग्रेस राहुल को पीएम कैंडिडेट बनाना चाहती है तो हम लोग मिल कर इस पर विचार करेंगे.
नीतीश ने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं हूं. ना तो मेरी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा है और न ही इसमें मेरी दिलचस्पी है.''
दरअसल नीतीश कमलनाथ के उस बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2024 के चुनाव में राहुल गांधी न सिर्फ विपक्ष का चेहरा होंगे बल्कि वे इसके पीएम कैंडिडेट भी होंगे.

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रेल मंत्रालय की रिपोर्ट, लड़कियों से पांच गुना ज्यादा लड़कों का हो रहा अपहरण
रेल मंत्रालय के रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियों की तुलना में लड़के ज्यादा अगवा हो रहे हैं. आरपीएफ की मानव तस्करी रोधी इकाई ने इस वर्ष अपहृत बच्चों को छुड़ाने के लिए विशेष अभियान आपरेशन आहत चलाया. जिसकी मदद से 541 बच्चों को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराया है.
'दैनिक जागरण' की एक ख़बर में कहा गया है कि सामान्य धारणा है कि लड़कियों को अगवा किया जाता है, लेकिन रेल मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि लड़कियों की तुलना में लड़के ज्यादा अगवा हो रहे हैं. कारण कई हो सकते हैं. जैसे देह व्यापार, अंग प्रत्यारोपण, मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन मजदूरी एवं घरेलू काम कराने के लिए प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों को उठाया जाता है.

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अख़बार लिखता है कि रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियों की तुलना में लड़कों को अगवा किए जाने का आंकड़ा पांच गुना से भी अधिक है.
आरपीएफ की मानव तस्करी रोधी इकाई ने इस वर्ष अपहृत बच्चों को छुड़ाने के लिए विशेष अभियान आपरेशन आहत चलाकर नवंबर तक विभिन्न रेलवे स्टेशनों से 541 बच्चों को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराया है. इनमें 418 लड़के हैं, जबकि लड़कियों की संख्या सिर्फ 80 है.
आरपीएफ की मानव तस्करी रोधी इकाई देशभर के करीब साढ़े सात सौ रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत है, जो सामाजिक संस्थाओं एवं विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है.
आरपीएफ के इस अभियान में जिन बच्चों को तस्करों के कब्जे से छुड़ाया गया है, उनमें 498 की उम्र 18 वर्ष से कम है. शेष 43 वयस्क हैं, जिनकी उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है. अपने अभियान में आरपीएफ ने 186 तस्करों को भी गिरफ्तार किया है.
मानव तस्करी के ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं. अन्य कारणों से अपने परिवार से बिछुड़ गए बच्चों की मदद में भी आरपीएफ की बड़ी भूमिका है. इसके लिए 'नन्हे फरिश्ते' अभियान चलाया जा रहा है.
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