नीतीश को बड़े लक्ष्य के लिए सीएम की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए: जगदानंद- प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से राष्ट्रीय जनता दल के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने कहा है कि नीतीश कुमार को बड़े लक्ष्य के लिए बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए.
जगदानंद सिंह ने अख़बार से नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा और 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव सहित कई मुद्दों पर बात की है.
नीतीश कुमार के हालिया बयान कि अगला विधानसभा चुनाव महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ेगा इस बयान को आरजेडी कैसे देखती है?
इस सवाल पर जगदानंद सिंह ने कहा, "मैंने दिल्ली में जो कहा था उसका चुनिंदा हिस्सा ही मीडिया ने रिपोर्ट किया. मेरा मतलब था कि नीतीश कुमार को वीपी सिंह से सबक लेना चाहिए, जो अपना पद छोड़ कर जनता के पास गए. ये जनता ही है जो किसी को प्रधानमंत्री बनाती है. वीपी सिंह भी तभी बने जब जनता ने चाहा."
क्या उनका इशारा इस ओर है कि नीतीश कुमार को अपना पद छोड़ देना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में जगदानंद सिंह ने कहा, "मैं यही कहना चाहता हूँ कि बड़ी चीज़ हासिल करने के लिए छोटी चीज़ छोड़नी पड़ती है. हर किसी को याद है कि कैसे वीपी सिंह ने राजीव गांधी सरकार के ख़िलाफ़ बोफ़ोर्स घोटाला सामने लाकर पूरे विपक्ष में जान डाल दी थी. हमें बीजेपी को हराने के लिए तैयारी करनी चाहिए. हमें ममता बनर्जी, नवीन पटनायक जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम करना है. ये संभव नहीं होगा अगर नीतीश छोटी चीज़ पर अटके रहेंगे."
तेजस्वी यादव को 2025 तक महागठबंधन का नेता बनाने के बजाय अभी ही सीएम की कुर्सी क्यों ना दे दी जाए?

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जगदानंद कहते हैं, "उन्होंने यह भी नहीं कहा कि वह 2025 से पहले तेजस्वी को सीएम नहीं बनाएंगे. लेकिन अगर नीतीश दिल्ली जाते हैं तो तेजस्वी ख़ुद ही बिहार के मुख्यमंत्री बन जाएंगे. "
"तेजस्वी को 2020 के विधानसभा चुनाव में ही नेता के रूप में स्वीकार कर लिया गया था. हम लगभग जीत रहे हैं. मैं इस बात में फिर नहीं पड़ना चाहता कि हम कैसे नहीं जीते. लेकिन तेजस्वी को नेता बनने से कोई नहीं रोक सकता. क्या 1990 में लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री बनने से रोकने में कोई सफल हो सकता था जबकि उन्होंने इससे पहले मंत्री के रूप में भी काम नहीं किया था? वह पार्टी के भीतर से पूर्व सीएम राम सुंदर दास जैसे चुनौती देने वालों में से उभरे."
आख़िर 2019 की हार के बाद से आरजेडी के लिए क्या बदला?
इसका जवाब जगदानंद विस्तार से देते हैं, "मीडिया ने इस बारे में पर्याप्त नहीं लिखा कि हमारी पार्टी, जो 2019 के लोकसभा चुनावों में जीरो थी, सत्ता के इतने क़रीब कैसे आ गई. यह सिर्फ़ इसलिए नहीं था कि हमने शासन के एक वैकल्पिक मॉडल को पेश किया, जिसमें 10 लाख नौकरियों का वादा, पढाई, दवाई, कमाई और सुनवाई का वादा शामिल था. जब हम समावेशी राजनीति के बारे में बात कर रहे हैं तो यह मीडिया है जो एम-वाई (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले के बारे में बात कर रहा है.

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'सुधार नहीं किए गए तो यूएन की जगह जी20 जैसे संगठन ले लेंगे'
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा है कि अगर संयुक्त राष्ट्र में सुधार नहीं किए गए तो इसकी जगह जी20 जैसे अंतराराष्ट्रीय संगठन ले लेंगे.
इस महीने भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, "अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को लागू नहीं किया जाएगा तो जी-20 जैसे अन्य संगठन संयुक्त राष्ट्र की तुलना में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अधिक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं."
"संयुक्त राष्ट्र में सुधार की प्रक्रिया बहुत जटिल होगी. इसमें कई पहलू शामिल हैं. यूएन चार्टर में सुधार करना होगा. इसके लिए सुरक्षा परिषद के पाँचों सदस्यों को एक साथ बैठना होगा. बदलाव ज़रूरी है और किसी भी स्थायी सदस्य के पास वीटो नहीं होना चाहिए. कई ऐसे देश हैं जो इस संस्था में सुधार लाना चाहते हैं लेकिन कई सदस्य लोग हैं जो इन देशों को परिषद में नहीं देखना चाहते हैं."
यूएनएससी में भारत का 2021-2022 कार्यकाल इस महीने के अंत तक पूरा हो जाएगा, इस दौरान भारत अध्यक्ष के रूप में काम कर रहा है.

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जल्द ही दिल्ली में सभी कैब हो जाएंगी इलेक्ट्रिक
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए दिल्ली मोटर वाहन नियमों के तहत साल 2030 तक ओला उबर सहित सभी कैब सेवाओं को इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल करना होगा.
इसके अलावा ओला और उबर जैसी टैक्सी सेवाओं और सभी प्रकार की डिलिवरी सेवाओं के लिए एग्रीगेटर्स को जल्द ही राजधानी में काम करने के लिए लाइसेंस लेना पड़ेगा.
अधिकारियों ने अख़बार से कहा कि दिल्ली मोटर वाहन नियम, 2022 में टैक्सी कंपनियों, डोर-टू-डोर डिलीवरी फर्मों, ई-कॉमर्स कंपनियों और अन्य एग्रीगेटर्स के लिए जुर्माना और लाइसेंस निलंबन का प्रावधान होगा.
इन नियमों के अगले साल की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद है. अख़बार से नाम न बताने की शर्त पर परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है कि कैब सेवाओं के किराए नियंत्रित करने के भी नियम होंगे या नहीं.
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