गुजरात में नया मंत्रिमंडल क्या 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है?

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- Author, जयदीप वसंत
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
भूपेंद्र पटेल गुजरात के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर लगातार दूसरी बार सीएम बने हैं.
शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत बीजेपी शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे. हिंदू संत भी शपथग्रहण के दौरान मौजूद थे.
दोपहर दो बजे राज्य के नए केंद्रीय सचिवालय के हेलीपैड ग्राउंड में हुए शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भूपेंद्र पटेल और उनके मंत्रिमंडल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
भूपेंद्र पटेल के अलावा 16 मंत्रियों ने भी शपथ ली. इनमें 8 कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार और 6 राज्यमंत्री हैं.
कनुभाई देसाई, राघवजी पटेल, ऋषिकेश पटेल, बलवंतसिंह राजपूत, कुवारजी बावालिया, मुलुभाई बेरा, कुबेर डिंडौर और रभानुबेन बाबारिया ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है.
वहीं पुरुषोत्तम सोलंकी, बाचूभाई खबाड़, मुकेश पटेल, प्रफुल्ल पनसेरिया, भीखूसिंह परमार और कुंवरजी हलपति ने राज्य मंत्री पद की शपथ ली.
हर्ष सांघवी और जगदीश पंचाल ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पद की शपथ ली है.
वहीं पूर्व सरकार के शीर्ष मंत्रियों में शामिल जीतू वघानी, जीतू चौधरी और पुर्णेश मोदी को मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिली है.
60 वर्षीय भूपेंद्र पटेल सितंबर 2021 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे. तब उन्हें विजय रूपाणी को पद से हटाकर मुख्यमंत्री बनाया गया था. भूपेंद्र पटेल ने इस साल विधानसभा चुनाव रिकॉर्ड 1.92 लाख मतों से जीता है.
भूपेंद्र पटेल की नई 17 सदस्यों की कैबिनेट में अन्य पिछड़ा वर्ग से सात मंत्री हैं, चार मंत्री पाटीदार हैं जबकि दो अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं. ब्राह्मण, जैन, राजपूत और अनुसूचित जाति से एक-एक मंत्री हैं.
विश्लेषकों के मुताबिक इस नए मंत्रिमंडल से बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल करने के लिए जाति और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है.
हालाँकि, भूपेंद्र पटेल कैबिनेट में सामाजिक वर्गों का असामान्य प्रतिनिधित्व है और कुछ समुदायों को उनकी जनसंख्या की तुलना में बहुत कम प्रतिनिधित्व मिला है.
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मंत्रिमंडल में हावी हैं सवर्ण
भूपेंद्र पटेल की नई कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्रियों का प्रतिशत 41.18 फ़ीसदी है जिसमें भूपेंद्र पटेल (पाटीदार), कनुभाई देसाई (अनाविल ब्राह्मण), ऋषिकेश पटेल (पाटीदार), राघवजी पटेल (पाटीदार), बलवंत सिंह राजपूत (क्षत्रिय), हर्ष संघवी (जैन), प्रफुल्ल पनसेरिया (पाटीदार) शामिल हैं.
ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समुदायों को छोड़कर गुजरात में सवर्ण जातियों की आबादी 18 प्रतिशत है. ऐसे में मंत्रिमंडल में उन्हें आबादी से दोगुने से भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलता दिख रहा है.
जैसी कि उम्मीद ज़ाहिर की गई थी, सबसे बड़े सवर्ण समूह पाटीदार के भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनके अलावा तीन अन्य पाटीदार नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली है.
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मंत्रियों का प्रतिशत 41.18 प्रतिशत है. इस वर्ग से कुंवरजीभाई बावलिया (कोली), मुलुभाई बेरा (अहीर), मुकेश पटेल (कोली पटेल), जगदीश पांचाल (विश्वकर्मा), पुरुषोत्तम सोलंकी (कोली), बचूभाई खबाड़ (कोली), भीखू सिंह परमार (ठाकोर) को मंत्री बनाया गया है.
गुजरात में ओबीसी समुदाय की आबादी क़रीब 40 फ़ीसदी है, इसलिए उन्हें आबादी जितना प्रतिनिधित्व मिलता दिख रहा है.
भूपेंद्र पटेल सरकार 2.0 में राघवजी पटेल, कनुभाई देसाई, ऋषिकेश पटेल, हर्ष संघवी, डॉक्टर कुबेर डिंडोर, मुकेश पटेल, जगदीश पांचाल को बदला गया है. इसके अलावा कुंवरजीभाई बावलिया, बच्चूभाई खाबड़ और मूलोभाई बेरा इससे पहले नरेंद्र मोदी-आनंदी बेन पटेल और विजय रूपाणी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं.
वहीं जीतूभाई वघानी, पूर्णेश मोदी, किरीटसिंह राणा, अर्जुनसिंह चौहान, निमिष बेहन सुथार, मनीषा बेहन वकील, जीतूभाई चौधरी, गजेंद्र परमार, विनू मोर्दिया और देवाभाई मालम जैसे चेहरों को भूपेंद्र पटेल की कैबिनेट से बाहर कर दिया गया है.
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मंत्रिमंडल में अनुपात और प्रतिनिधित्व
बीजेपी की 14 महिला विधायक चुनी गई हैं जिनमें से एकमात्र महिला विधायक भानुबेन बाबरिया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.
अगर प्रतिशत में देखा जाए तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व 5.88 प्रतिशत के बराबर है. लेकिन गुजरात में जनसंख्या की दृष्टि से महिलाओं का प्रतिशत लगभग 50 प्रतिशत है.
गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर और राज्य में जाति की राजनीति के विद्वान प्रोफ़सर गौरांग जानी के अनुसार, "गुजरात के मंत्रिमंडल में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व सिर्फ़ एक हालिया समस्या नहीं है, बल्कि एक बहुत पुरानी समस्या है. महिलाओं को तालुका पंचायतों और ज़िला पंचायतों में आरक्षण प्राप्त है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा में नहीं."
"चुनाव परिणामों और कैबिनेट में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से सबक यह है कि अगर कैबिनेट में महिलाओं की संख्या बढ़ानी है, तो महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए."
भानुबेन बाबरिया अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित राजकोट ग्रामीण सीट से निर्वाचित हुई हैं. गुजरात में इस समुदाय के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं जिनमें से भाजपा ने 11 सीटें (वडगाम और दानिलिमदा को छोड़कर) जीती हैं.
कुबेर डिंडौर (संतरामपुर) और कुंवरजी हलपति अनुसूचित जनजाति समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. गुजरात में इस समुदाय के लिए 27 सीटें आरक्षित की गई हैं. इनमें से बीजेपी को 23, कांग्रेस को तीन और 'आप' को एक सीट मिली हैं.
प्रतिशत के हिसाब से अनुसूचित जनजाति को 11.77 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिला.
प्रोफ़ेसर गौरांग जानी कहते हैं, "गुजरात की राजनीति में पुरुष प्रधान हिंदू जाति का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है और इसका प्रतिबिंब मंत्रिमंडल में दिखता है. राजनीतिक दलों द्वारा आरक्षित नहीं की गई सीटों पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार नहीं उतारे जाते हैं, और ऐसा सिर्फ़ बीजेपी ही नहीं बल्कि बाक़ी सभी दल भी करते हैं. इससे पता चलता है कि महिला वर्ग को आरक्षण क्यों जरूरी है.''
जानी कहते हैं कि गुजरात में मुस्लिम आबादी लगभग 10 प्रतिशत है. 182 विधायकों में से एकमात्र मुस्लिम विधायक कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुआ है. बीजेपी ने किसी मुसलमान को टिकट ही नहीं दिया और फिर भी 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा लगाया जाता है.
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क्या ये 2024 की तैयारी है?
भूपेंद्र पटेल की नई कैबिनेट और उसके घटक दलों को 2024 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अजय उमठ कहते हैं, "परंपरागत रूप से सौराष्ट्र-कच्छ भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ खो दी थी. इसलिए इस बार उसने पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर इस गढ़ को बनाए रखने की कोशिश की है.
लेउवा पाटीदार से राघवजी पटेल और अहीरों (यादवों) के प्रतिनिधि के रूप में मुलोभाई बेरा को मंत्री बनाया गया है. वहीं 'मिनी सौराष्ट्र' सूरत से प्रफुल्ल पनसेरिया को मंत्री बनाया गया है ताकि क्षेत्र और समाज में एक साथ पकड़ मज़बूत की जा सके. पुरुषोत्तम सोलंकी और कुंवरजीभाई बावलिया ने सौराष्ट्र के कोली समीकरण को पूरा करने की कोशिश की है.
इसके अलावा बाचुभाई खबाड़, जगदीश पांचाल, भीखूभाई परमार को मंत्री बनाकर बख्शीपंच (ओबीसी) समुदाय में पैठ मज़बूत करने का प्रयास किया गया है. कुंवरजी हलपति, हर्ष सांघवी और कनुभाई देसाई दक्षिण गुजरात से विधायक हैं.''
उमठ का कहना है कि बीजेपी का लक्ष्य अगले लोकसभा चुनाव में सभी 26 में से 26 सीटों पर एक बार फिर से जीत हासिल करना है.
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