बिहार-यूपी उपचुनाव: रामपुर में भाजपा जीती, मैनपुरी में सपा ने बचाया गढ़, कुढ़नी में हारी जेडीयू

डिंपल यादव और अखिलेश यादव

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गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ गुरुवार को लोगों की नज़रें बिहार और उत्तर प्रदेश पर भी थीं.

बिहार की एक विधानसभा सीट, उत्तर प्रदेश की दो विधानसभा सीट और एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों का एलान गुरुवार को ही हुआ.

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन होने से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने भारी मतों से जीत दर्ज की है. समाजवादी कुनबा अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहा. वहीं अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी का विलय भी समाजवादी पार्टी में कर दिया है.

लेकिन रामपुर में आज़म ख़ान का दबदबा कायम नहीं रह सका. यूपी की रामपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की है. वहीं मुज़फ्फरनगर के खतौली में राष्ट्रीय लोकदल और सपा गठबंधन ने बीजेपी से सीट छीन ली है. इसके बाद रालोद के उत्तर प्रदेश विधानसभा में नौ विधायक हो गए हैं.

बिहार के कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता ने जनता दल यूनाइटेड के मनोज कुशवाहा को 3649 वोट से हरा दिया है. नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के एक साथ चुनाव प्रचार करने के बाद भी जेडीयू यहां से हार गई है.

इन नतीज़ों के क्या मायने हैं और इनसे दोनों राज्यों की राजनीति पर कितना असर होगा, पढ़िए.

शिवपाल यादव और अखिलेश यादव

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मैनपुरी उपचुनाव: एक हुआ यादव परिवार

मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव की जीत के साथ ही समाजवादी पार्टी का कुनबा भी पूरी तरह से एक हो गया है. उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव सपा में शामिल हो गए. उन्होंने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का भी विलय सपा में कर दिया.

जैसे ही प्रसपा के सपा में विलय का एलान हुआ, उसके साथ ही शिवपाल यादव की गाड़ी का झंडा भी बदल गया. शिवपाल यादव के समर्थकों ने उनकी गाड़ी से प्रसपा का झंडा हटाकर सपा का झंडा लगा दिया. साथ ही सोशल मीडिया के ट्विटर अकाउंट पर अपनी प्रोफाइल भी सपा नेता कर दिया.

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मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव ने अहम जीत दर्ज की.अखिलेश यादव पूरे यादव परिवार को साथ लेकर इस चुनाव में मुलायम सिंह और उनकी समाजवादी विरासत को बचाने के नाम पर लड़ रहे थे.

समाजवादी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में रैली और रोड शो के साथ साथ घर-घर और गांव-गांव जाकर वोट मांगने के पुराने तरीक़े को आजमाया.

मैनपुरी उपचुनाव में शिवपाल यादव के अखिलेश और डिंपल के साथ आने और प्रचार करने का फायदा भी समाजवादी पार्टी को मिला.

योगी सरकार ने चुनाव प्रचार के दौरान शिवपाल यादव के खिलाफ भी अपना रुख बदला और उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी.

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26 साल से मैनपुरी सीट नहीं हारी सपा

मैनपुरी लोकसभा सीट से मुलायम सिंह यादव पहली बार 1996 में जीते थे. साल 1996 के बाद से कोई और पार्टी इस सीट से चुनाव नहीं जीत पाई है.

मुलायम सिंह यादव ने 2019 में पांचवीं बार लोकसभा चुनाव जीता था. इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी के उम्मीदवार प्रेम सिंह शाक्य को नब्बे हज़ार से ज़्यादा वोटों से हराया था.

अखिलेश यादव और डिंपल यादव

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मैनपुरी लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा यादव मतदाता हैं. उसके बाद शाक्य और जाटव मतदाता आते हैं और फिर सामान्य ,वैश्य, कुर्मी और मुस्लिम मतदाता हैं.

मैनपुरी में चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी ने कहा था कि "अब मैनपुरी लोकसभा को समाजवाद नहीं रामराज्य चाहिए."

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बीजेपी ने यादव वोटों के अंतर को कम करने और शाक्य और जाटव वोटरों को पाने के लिए ही रघुराज शाक्य को अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन बीजेपी का यह गणित इस बार काम नहीं कर पाया.

आकाश सक्सेना

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रामपुर: ढह गया आज़म का गढ़, खिला कमल

रामपुर की सियासत जो पिछले कई सालों तक आज़म खान के इशारों पर चलती थी उसमें अब एक नए दौर की शुरुआत हुई है.

आज़म खान के चुने हुए उमीदवार आसिम राजा को बीजेपी के आशीष सक्सेना ने हरा दिया. इस सीट पर भाजपा की यह पहली जीत है.

जून 2022 में हुए लोकसभा उपचुनाव में आसिम राजा सपा के प्रत्याशी थे लेकिन वह भाजपा के घनश्याम लोधी से चुनाव हार गए थे.

आज़म खान को कोर्ट से विवादित बयान मामले में तीन साल की सजा हुई थी जिसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता भी रद्द हो गई और चुनाव आयोग ने इस सीट पर चुनाव की घोषणा की थी.

इस चुनाव में पहले के मुक़ाबले मतदान प्रतिशत कम था और विपक्ष ने प्रशासन के दबाव का आरोप भी लगाया था.

योगी आदित्यनाथ

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रामपुर में भाजपा के जीत के मायने?

पश्चिम उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शादाब रिज़वी कहते हैं कि रामपुर के नतीजों से साफ़ है कि भाजपा ने रामपुर में अपने आप को बहुत मज़बूत किया है.

भाजपा अब रामपुर को लेकर क्या नैरेटिव बना सकती है, इस बारे में शादाब रिज़वी कहते हैं, "भाजपा कहेगी कि उसने रामपुर में आज़म खान की ज़ुल्म की राजनीती से लोगों को छुटकारा दिलाया. भाजपा के लिए वहां से लॉ एंड आर्डर का मैसेज निकल कर आएगा. पार्टी यह बताने की कोशिश करेगी कि मुसलमान का नज़रिया भाजपा के ख़िलाफ़ बदल रहा है. खास तौर से पसमांदा समाज का."

रामपुर विधानसभा सीट पर 1980 से लेकर 2022 के बीच सिर्फ़ 1996 के चुनाव को छोड़कर आज़म ख़ान ने लगातार जीत हासिल की थी. 1996 में आज़म ख़ान कांग्रेस के प्रत्याशी अफ़रोज अली खां से चुनाव हार गए थे.आज़म खान दस बार इस सीट से विधायक रहे हैं. 2019 में जब आज़म खां जब रामपुर संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुए तो इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी ने डॉ. तंजीन फ़ातिमा चुनी गईं.

चौधरी जयंत सिंह

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खतौली विधानसभा उपचुनाव: गठबंधन प्रत्याशी की जीत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खतौली विधानसभा उपचुनाव में रालोद सपा गठबंधन के प्रत्याशी मदन भैया ने भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी को हरा दिया है.

खतौली सीट से भाजपा विधायक रहे विक्रम सैनी की सदस्यता बीते चार नवंबर को रद्द कर दी गई थी. इसके बाद यहां पांच दिसंबर को उपचुनाव हुए.

मुजफ़्फ़रनगर दंगों को लेकर कोर्ट ने इसी साल 11 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने विक्रम सैनी को दो साल की सजा सुनाई थी और दस हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया था.

मदन भैया राष्ट्रीय लोकदल दल के नेता हैं और ज़िला ग़ाज़ियाबाद के लोनी क्षेत्र के गांव जावली के रहने वाले हैं. वह अलग-अलग पार्टियों से चार बार विधायक रह चुके हैं. पार्टी ने उन्हें इस बार खतौली सीट से मैदान में उतारा था. राष्टीय लोकदल मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िलाध्यक्ष संदीप मलिक ने बीबीसी से कहा, 'मदन भैया चार बार विधायक रह चुके हैं. इस बार पार्टी ने उन्हें खतौली से चुनाव मैदान में उतारा है. उन्हें यहां से चुनाव लड़ाने का फ़ैसला पार्टी आला कमान का ही था."

योगी आदित्यनाथ

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बीजेपी ने लगाया था ज़ोर

भाजपा ने इस सीट को जीतने के लिए शुरू से ही तमाम बड़े नेताओं को लगाया हुआ था. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां चुनाव प्रचार को पहुंचे लेकिन भाजपा को फिर भी ये सीट गंवानी पड़ी.

स्थानीय पत्रकार मंगल सिंह ने बीबीसी से कहा, "यहां भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी के प्रचार के लिए मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी तक पहुंचे लेकिन मुख्यमंत्री ने गन्ने को लेकर कोई बात नहीं की जबकि वह सिर्फ़ कवाल कांड को लेकर ही बोले. मेरा मानना है कि लोग अब दंगों का जिक्र नहीं चाहते हैं, वे महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात करना चाहते हैं."

भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी की हार पर भाजपा के ज़िला मंत्री सुधीर खटीक ने कहा, "स्थानीय जातीय समीकरणों के कारण सीट हमारे हाथों से निकल गई. फिर भी हार की समीक्षा होगी."

मुजफ्फरनगर के खतौली में होने वाले इस विधानसभा उपचुनाव में कवाल कांड में मारे गए गौरव की मां सुरेश देवी ने भी पर्चा भरा था, लेकिन एक दिसंबर को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें मना लिया.

बिहार बीजेपी के कार्यकर्ता

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कुढ़नी में बीजेपी की जीत

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की कुढ़नी सीट पर न तो महागठबंधन में दरार दिखी और न ही ओवैसी फ़ैक्टर का कोई असर. नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने एक साथ चुनाव प्रचार किया. बीमार आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के नाम से भी वोटरों से अपील की गई.

लेकिन बीजेपी यहां चुनावी जीत हासिल करने में कामयाब रही. बीजेपी उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता ने जनता दल यूनाइटेड के मनोज कुशवाहा को 36049 वोट से हरा दिया.

यह चुनाव परिणाम इसलिए भी ख़ास है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ गठबंधन के हाथ से यह सीट छीन ली है. साल 2020 के विधानसभा चुनावों में यहां से आरजेडी के अनिल सहनी ने जीत दर्ज़ की थी. साल 2020 में आरजेडी ने अकेले दम पर बीजेपी और जेडीयू गठबंधन मात दी थी लेकिन इस बार महागंठबंधन पूरी ताक़त लगाकर भी इस सीट को नहीं जीत पाई.

इस विधानसभा सीट से आरजेडी विधायक अनिल सहनी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अयोग्य ठहराया था. उसके बाद यहां उपचुनाव हुआ. यहां महागठबंधन की तरफ़ से आजेडी के बजाय जनता दल यूनाइटेड ने अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा था.

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव

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जेडीयू और बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लडाई

कुढ़नी का उपचुनाव दरअसल महागठबंधन और बीजेपी के लिए साख की लड़ाई बन गई थी.

लालू के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक चुनाव सभा में दावा किया था, "लालू जी कि इच्छा है कि कुढ़नी में बीजेपी की हार हो और उन्होंने यह संदेश कुढ़नी की जनता को देने को कहा है."

यही नहीं अब तक बीजेपी से अलग दिखने की कोशिश कर रहे चिराग पासवान ने भी खुलकर यहां बीजेपी उम्मीदवार के लिए प्रचार किया.

इस जीत के बाद बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है. सुशील मोदी ने कहा है, "इस क़रारी हार के बाद आपको (नीतीश कुमार को) इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. आपका जो वोट है आप उसके मालिक नहीं हैं. आपका अति पिछड़ा वोट अब पूरी तरह बीजेपी की तरफ़ खिसक चुका है."

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वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते हैं, "चुनाव परिणाम से साफ ज़ाहिर है कि कुढ़नी के वोटर नीतीश कुमार से नाराज़ थे. कभी वो शराबबंदी की बात करते हैं तो कभी ताड़ीबंदी की. इस क़ानून में सबसे ज़्यादा ओबीसी, एससी और एसटी के लोग प्रताड़ित हुए हैं. इस समुदाय के कई लाख लोगों को जेल में डाल दिया गया है. मुझे वोटरों की यही नाराज़गी चुनावी नतीज़े में दिख रही है."

इस हार के बाद जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट किया है, "कुढ़नी के परिणाम से हमें बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है. पहली सीख कि जनता हमारे हिसाब से नहीं, बल्कि हमें जनता के हिसाब से चलना पड़ेगा."

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पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक और राजनीतिक मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर डीएम दिवाकर कहते हैं, "यह सीट मूल रूप से आरजेडी की सीट थी. कुढ़नी में बड़ी संख्या में पिछड़े वर्ग के वोटर हैं, जिसमें कई जातियां हैं. अगर आरजेडी को एंटी इनकंबेंसी का डर था तो वो किसी और को टिकट दे सकते थे. इससे चुनाव परिणाम कुछ और हो सकता था."

बीजेपी का प्रचार वाहन

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डीएम दिवाकर का कहना है कि नीतीश कुमार को यह बात समझनी चाहिए थी और इस सीट पर आरजेडी को ही अपना उम्मीदवार उतारने देना चाहिए था.

इस बार विकासशील इंसान पार्टी यानि वीआईपी ने साधु शरण के पोते निलाभ कुमार को चुनाव मैदान में उतारा था. वीआईपी करीब 18 हज़ार भूमिहार वोटरों के सहारे इस सीट पर जीत के दावे कर रही थी. हालांकि निलाभ ने भी ठीक 10,000 वोट हासिल किए और वो तीसरे नंबर पर रहे.

कुढ़नी में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को 3206 वोट मिले. कुढ़नी में इससे ज़्यादा वोट नोटा और दो निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला.

बिहार यूपी के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा की एक-एक सीट पर उपचुनाव हुए थे. राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की जबकि पदमपुर ओडिशा में बीजू जनता दल ने जीत हासिल की.

(पटना से चंदन कुमार जजवाड़े, लखनऊ से अमन द्विवेदी और मुज़फ़्फ़रनगर से शहबाज़ अनवर की रिपोर्टिंग)

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