गुजरात और हिमाचल में कितना दम दिखा पाईं महिला उम्मीदवार?

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गुजरात में जहां बीजेपी का सातवीं बार कमल का फूल खिला वहीं हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पंजे ने जीत दर्ज कर बीजेपी को पीछे धकेल दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में तीस से ज्यादा रैलियां की और गृह मंत्री अमित शाह और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी धुंआधार रैलियां की. वहीं कांग्रेस की तरफ से पार्टी के नेता राहुल गांधी ने बमुश्किल दो रैलियां कीं.

इन चुनावों में आम आदमी पार्टी ने दूसरी बार कदम रखा था और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ख़ूब प्रचार प्रसार किया. इतना ही नहीं उन्होंने लिखित में दावा भी किया था कि पार्टी वहां सरकार बनाएंगी.

दिल्ली में हुए नगर निगम के चुनाव में तो आप जीत गई लेकिन गुजरात में वो पांच सीट पर ही सिमट गई.

इन चुनाव में अलग- अलग पार्टियों ने कुल 40 महिला उम्मीदवारो को मैदान में उतारा था. जहां बीजेपी की 17 में से 14 महिलाओं ने जीत हासिल की है. वहीं वाव सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार गेनीबेन ठाकुर ने जीत हासिल कर ली है.

कांग्रेस ने इन चुनाव में 14 महिलाओं को टिकट दी थी.

डॉक्टर पायल कुकरानी

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नरोदा सीट से डॉक्टर पायल कुकरानी ने चुनाव जीत लिया है. वे पेशे से डॉक्टर है और उन्हें मौजूदा विधायक की टिकट काट कर प्रत्याशी बनाया गया था और ये उनका पहला चुनाव था.

पायल के पिता मनोज कुकरानी नारोदा पाटिया 2002 के दंगों में उम्रकैद की सज़ा काट रहे हैं हालांकि इन चुनाव के दौरान वे स्वास्थ्य कारणों की वजह से ज़मानत पर बाहर थे.

वरिष्ठ पत्रकार श्याम पारिख बताते हैं कि ये इलाका बीजेपी का गढ़ माना जाता है और ऐसे में उनका जीतना तय था साथ ही वे पढ़ी लिखी भी हैं.

हालांकि ऐसा नहीं है कि लोग उन्हें जानते थे लेकिन जानकार बताते हैं कि लोगों और पार्टी के भीतर पायल के प्रति संवेदनाएं थी इसलिए उन्हें टिकट दिया गया और पार्टी का ये दांव चल भी गया.

रिवाबा जडेजा

जामनगर नॉर्थ सीट से ऑल राउंडर क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा ने चुनाव लड़ा था.

एक वीडियो संदेश में जडेजा ने कहा था,'' विधानसभा चुनाव टी-20 क्रिकेट की तरह तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, मेरी पत्नी रिवाबा को उम्मीदवार बनाया गया है इसलिए आपकी ज़िम्मेदारी है कि उनके लिए जीत का माहौल बनाए.''

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रिवाबा अक्सर जामनगर के राजनैतिक कार्यक्रमों में देखी जाती रही है और वो सौराष्ट्र करणी क्षत्रिय सेना की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं.

रिवाबा जडेजा के ख़िलाफ़ कांग्रेस पार्टी से उनके ससुर ने अनिरुद्ध सिंह जडेजा ने चुनाव लड़ा था.

अपनी जीत के बाद उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को साझात्कार में कहा कि वो केंद्र के नेतृत्व को धन्यवाद करती हैं.

उन्होंने कहा कि वो स्वंय को प्रत्याशी के तौर पर नहीं देख रही थीं लेकिन जिन लोगों ने उन्हें स्वीकार किया और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके लिए मेहनत की वो उन सब का शुक्रिया करती हैं. ये उनकी नहीं सब की जीत है और वो उन्हें की क्रेडिट देती हैं.

साथ ही उनका कहना था, '' जो विकास का मॉडल है उसी पर आगे बढ़ना है और मेरे साथ जो जीत कर आए है उन सब का यही मंत्र रहेगा.''

वरिष्ठ पत्रकार श्याम पारिख कहते हैं कि रिवाबा के पति एक जाने-माने क्रिकेटर हैं इसलिए उन्हें बीजेपी की तरफ से टिकट दिया गया. ऐसा नहीं है कि उनकी काबलियत नहीं है लेकिन उनके पति अगर क्रिकेटर नहीं होते तो क्या उन्हें टिकट मिलता?

स्थानीय पत्रकार प्रदीप जोशी के अनुसार,''जब हम उस इलाके में वोटरों का मन टटोलते थे तो समझ में आता था कि लोगों के बीच में वो एक सेलिब्रेटी हैं और लोग उन्हें जानते हैं और इसका लाभ भी उन्हें मिला.''

कंचनाबेन वीनूभाई

बीजेपी की कंचनाबेन वीनूभाई ने ठक्करबपा नगर से चुनाव जीता है.

गुजरात चुनाव में पाटीदार एक अहम भूमिका रखते हैं और राज्य में 13 फ़ीसद पाटीदार वोटर हैं.

प्रदीप जोशी बताते हैं कि वे कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय से जुड़ी रही हैं हालांकि पाटीदार आंदोलन के साथ वे जुड़ी हुई नहीं दिखाईं दी लेकिन हर दल ने पाटीदार समुदाय को अहमियत दी है और ये फैक्टर उनके लिए भी काम कर गया.

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दर्शना वाघेला

असरवा सीट से बीजेपी की दर्शना वाघेला ने चुनाव जीत लिया है. ये एक आरक्षित सीट है. वे अहमदाबाद म्यूनसिपल कॉर्पोरेशन की चुनाव भी जीत चुकी हैं.

प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार आंकडे बताते हैं कि महिलाओं ने पिछली बार से ज़्यादा वोट दिया है . बीजेपी को लेकर महिलाओं में झूकाव रहा है ऐसे में महिलाओं को वोट देना काम किया है.

गेनी बेन ठाकुर

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वाव से कांग्रेस की उम्मीदवार गेनीबेन ठाकुर ने चुनाव जीत लिया है.

वे पार्टी की तेज़तर्रार नेताओं में गिनी जाती हैं और पिछली बार यानी साल 2017 में इसी सीट से चुनाव जीती थीं.

वाव विधानसभा क्षेत्र पर ठाकुर और चौधरी का वर्चस्व माना जाता है.

बताया जाता है कि चौधरी समाज जहां बीजेपी का समर्थन करता है वहीं कांग्रेस का ठाकुर वोटबैंक पर मज़बूत पकड़ है.

हिमाचल प्रदेश में ख़राब प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां कुल 68 सीटों पर 24 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा.

हालांकि बीजेपी का गुजरात के मुकाबले राज्य में प्रदर्शन फ़ीका रहा. यहां भी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने रैलियां की लेकिन कांग्रेस की बात की जाए तो पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने तो राज्य का दौरा किया लेकिन राहुल गांधी नदारद रहे.

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यहां साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में चार महिलाओं को जीत मिली थी और पांचवी महिला विधायक साल 2019 में हुए उपचुनाव में जीत कर आई थीं.

इस चुनाव में बीजेपी ने छह, कांग्रेस ने तीन और आप ने छह महिलाओं को मैदान में उतारा था.

आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश में खाता भी नहीं खोल पाई.

काग्रेंस के वरिष्ठ नेता और राज्य में चुनाव के प्रभारी राजीव शुक्ला ने इस जीत का श्रेय प्रियंका गांधी को दिया है.

यहां की पच्छाद सीट से बीजेपी की नेता रीना कश्यप ने चुनाव जीता है. उन्होंने साल 2019 में उपचुनाव पहली बार लड़ा था.

स्थानीय पत्रकार पंकज शर्मा के अनुसार महिला उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ एंटी इन्कैमबंसी फैक्टर काम किया.

वहीं इन महिलाओं में कुछ ऐसे चेहरे थे जो नए थे ऐसे में वोटरों के लिए उन पर भरोसा न दिखाना भी वोट न देने का कारण बना.

हिमाचल में बीजेपी ने महिला वोटरों को रिझाने के लिए 'नारी को नमन' नाम की स्कीम भी निकाली और कांग्रेस और आप ने भी कई वादे किए.

प्रदेश में महिलाएं काफ़ी बढ़चढ़ कर मतदान में हिस्सा लेती हैं लेकिन जब महिलाओ उम्मीदवारों को टिकट देने की बारी आती है तो सियासी पार्टियां पीछे हट जाती हैं.

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