रामपुर उपचुनाव: आज़म ख़ान के क़िले में बीजेपी ने कैसे लगाई सेंध

आकाश सक्सेना

इमेज स्रोत, @AkashSaxenaBJP

    • Author, अमन द्विवेदी
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर विधानसभा सीट पर जीत हासिल कर समाजवादी पार्टी के एक अहम क़िले में सेंध लगा दी है.

बीजेपी के आकाश सक्सेना ने समाजवादी पार्टी के आसिफ़ राजा को हरा कर उस सीट पर बीजेपी का झंडा फहरा दिया है जहां मुसलमानों की आबादी ज़्यादा है.

बीते चार दशक के दौरान ज़्यादातर वक़्त इस सीट पर आज़म ख़ान के परिवार का कब्ज़ा रहा. अब बीजेपी ने इस सिलसिले को तोड़ दिया है.

आंकड़ों पर नज़र डालें तो रामपुर में पिछले कुछ चुनाव के दौरान मतदान के प्रतिशत में लगातार कमी आती दिख रही है.

साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में इस सीट पर 56 फ़ीसदी मतदान हुआ था, जो (इसी साल) लोकसभा उपचुनाव में (इसमें रामपुर विधानसभा सीट शामिल है) घट कर 41 प्रतिशत रह गया और अब इस विधानसभा सीट पर मतदान का प्रतिशत गिरकर 33.83 प्रतिशत पर आ गया.

इस बीच सवाल ये भी है कि आज़म ख़ान के परिवार का गढ़ माने जाने वाली इस सीट को बीजेपी ने कैसे अपने नाम किया?

अखिलेश यादव और आज़म ख़ान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव और आज़म ख़ान

रणनीति पर सवाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "जब भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होता है वहां बीजेपी के जीतने की संभावना बढ़ जाती है. सपा को ग़ैर मुस्लिम उम्मीदवार उतारना चाहिया था. रामपुर में लोधी और बनिया वोटरों की संख्या भी काफ़ी है."

रामपुर सदर सीट के उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आकाश सक्सेना (हनी) को 62.06 फ़ीसद वोट मिले. वहीं समाजवादी पार्टी के मोहम्मद असीम राजा को 36.05 प्रतिशत मत प्राप्त हुए.

स्थानीय पत्रकार तमकीन फैयाज बताते हैं, "रामपुर सदर सीट पर हिंदू वोटरों की संख्या क़रीब-क़रीब डेढ़ लाख है, जिसमें से सबसे ज़्यादा 30 हज़ार आबादी लोधी समाज की है. सैनी 22 हज़ार, जाटव 19 हज़ार, यादव 12 हज़ार, वैश्य 10 हज़ार, ब्राह्मण 10 हज़ार, सिख सात हज़ार, कायस्थ 5,500 और ठाकुर बिरादरी चार हज़ार के क़रीब हैं."

तमकीन फ़ैयाज़ कहते हैं कि रामपुर में, "पठान वोटर 80 हज़ार, अंसारी 58 हज़ार, कुरैशी 17 हज़ार, सैय्यद 17 हज़ार और तुर्क 12 हज़ार हैं."

रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "रामपुर पर आज़म ख़ान ने राजा की तरह राज किया."

वे कहते हैं, "आज़म ख़ान पर मुक़दमों के बाद जो बातें सामने आईं उससे लोगों का विश्वास उन पर कम हुआ है. समाजवादी पार्टी को अपने कामकाज के तरीकों और चुनावी रणनीति को लेकर आत्मनिरीक्षण की ज़रूरत है. अब भारत में लोकतंत्र है. इसमें कोई राजा रानी नहीं होता है."

आकाश सक्सेना

इमेज स्रोत, @AkashSaxenaBJP

इमेज कैप्शन, आकाश सक्सेना

पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने की कोशिश

लेकिन ऐसा नहीं कि बीजेपी को केवल समाजवादी पार्टी की ग़लत रणनीति का ही फ़ायदा मिला.

पत्रकार तमकीन फै़याज़ कहते हैं, "ये पहली बार है जब इस सीट पर कोई ग़ैर मुस्लिम उम्मीदवार जीता है."

वे कहते हैं कि बीजेपी ने इस सीट पर जीत दर्ज की और उसके पीछे उनकी मेहनत है.

तमकीन फै़याज़ कहते हैं, "बीजेपी ने चुनाव की घोषणा के बाद पसमांदा मुसलमानों के नाम से बड़ा सम्मेलन किया. चुनाव की घोषणा के साथ ही बीजेपी के मंत्रियों ने भी बड़ी संख्या में यहां कैंपेन किया जिसमें सुरेश खन्ना, दानिश अंसारी समेत तमाम लोग शामिल हुए."

पसमांदा बिरादरी से आने वाले बीजेपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष बासित अली समेत तमाम मुस्लिम नेताओं ने रामपुर में बीजेपी की जीत के लिए कैंपेन चला कर वोट भी मांगे.

तो रामपुर में मुसलमान समुदाय बीजेपी के कितना क़रीब आया है?

इस सवाल पर पत्रकार शादाब रिजवी कहते हैं, "जो पसमांदा मुसलमान हैं उनका वोट बीजेपी के पक्ष में गया है, जिनको उन्होंने अपने साथ जोड़ा है. बीजेपी को उन बूथों पर अच्छे वोट मिले जहां मुसलमानों की आबादी ज़्यादा है. उन बूथों पर पहले बीजेपी को उतने वोट नहीं मिलते थे."

आकाश सक्सेना

इमेज स्रोत, ANI/AkashSaxenaBJP

आकाश सक्सेना की अहम भूमिका

चुनाव जीतने के बाद आकाश सक्सेना ने कहा, "रामपुर में ऐतिहासिक परिणाम आया है. इसमें भारतीय जनता पार्टी 34 हज़ार से अधिक मतों से विजयी हुई है. इसके लिए रामपुर के हिंदू, रामपुर के मुसलमान- सभी भाइयों का मैं बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं और विश्वास दिलाता हूं, जिसके लिए उन्होंने मुझे चुना है , मैं उस पर खरा उतरूंगा."

आकाश सक्सेना समाजवादी पार्टी नेता आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई भी लड़ चुके हैं.

उन्होंने ही आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ वो केस दर्ज करवाए थे, जिनका फ़ैसला आने के बाद आज़म ख़ान की विधानसभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई.

पत्रकार शादाब रिज़वी कहते हैं, "आकाश सक्सेना ने देखा कि आज़म के ख़िलाफ़ खड़े होने पर बीजेपी उसका फायदा उठा रही है. बीजेपी ने आकाश को टिकट दिया और साथ रखा क्योंकि वो आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद कर रहे थे और उसमें वो कामयाब हो गए. जब से आकाश ने आज़म का विरोध किया उसके बाद ही आम जनता आकाश को जान पाई थी."

आकाश सक्सेना को भी इसका अंदाज़ा था.

चुनाव नतीजों के एलान के बाद उन्होंने कहा, "पहली बार आज़ादी के बाद इस विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी विजयी हुई है. रामपुर सदर ऐसी सीट है जहां 70 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं. आप सभी ने आज योगी सरकार पर जो विश्वास जताया है , मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं. रामपुर में 1980 के बाद से हिंदू और मुसलमानों के बीच जो खाई पैदा की गई थी उस खाई को मिटाने का काम करूंगा और एक नए रामपुर का विकास करूंगा."

वीडियो कैप्शन, मैनपुरी उपचुनाव ने 'चाचा-भतीजा' को एक कर दिया है

पाला बदला

बीजेपी ने मुसलमानों में पैठ बढ़ाने के साथ-साथ विरोधी खेमे की रणनीति जानने पर भी काम किया.

रामपुर उपचुनाव में इस बार आज़म ख़ान के करीबी और मीडिया प्रभारी रहे फ़साहत अली शानू ने अंत समय में बीजेपी का दामन थाम लिया था. उनके साथ और भी कई करीबी नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली, जिसके चलते चुनाव में समाजवादी पार्टी और आसिम राजा को वोटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा.

तमकीन फ़ैयाज़ कहते हैं, "इन्होंने (बीजेपी ने) बहुत प्लानिंग के साथ आज़म ख़ान के साथ जो सेकंड लाइन के लोग थे, उन सबको तोड़ लिया या अपने पास मिला लिया. उनके साथ-साथ उनके (आज़म के) कैंपेन के राज़ भी साथ में चले गए. आज़म ख़ान कहां जाते थे, किससे मिलते हैं, कैसी अप्रोच करते हैं, कौन उनका साथी है, तो उसके ज़रिए बहुत बड़ी तादाद में मुसलमानों के यहां बीजेपी का जाना, रोजाना कार्यक्रम करना, उनके यहां लोगों को बुलाना और अपनी बात रखने का काम हुआ."

इस बार बीजेपी को रामपुर के नवाब खानदान का साथ भी मिला.

नवाब कासिम अली ख़ान ने कांग्रेस में रहते हुए बीजेपी प्रत्याशी का साथ देने का फ़ैसला किया, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से सात साल के लिए निष्कासित कर दिया गया.

नवाब खानदान की रामपुर में अपनी राजनैतिक पहचान है. वो राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय हैं और लगभग हर चुनाव लड़ते आ रहे हैं और कई बार जीते भी हैं. उनका भी रामपुर में अपना वोट बैंक है, जिसका फायदा आकाश सक्सेना को ज़रूर मिला होगा.

वोटर

इमेज स्रोत, Getty Images

दलित वोट

रामपुर उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था. मायावती के चुनाव न लड़ने का सीधा फायदा बीजेपी को हुआ है.

इससे पहले जून 2022 लोकसभा उपचुनाव में भी मायावती ने रामपुर में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था. जिसके चलते बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई थी.

रामपुर उपचुनाव में 33.94 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. कम वोटिंग के लिए सपा ने चुनाव में धांधली और पुलिस प्रशासन पर लोगों को वोट नहीं डालने देने जैसे आरोप लगाए.

समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में चुनाव आयोग को शिकायत पत्र भी दिया.

समाजवादी पार्टी ने पुलिस प्रशासन पर वोटरों को डराने धमकाने के भी आरोप लगाए.

Azam Khan, आज़म ख़ान

इमेज स्रोत, Getty Images

रामपुर में आज़म ख़ान की ऐतिहासिक पारी

रामपुर विधानसभा सीट पर 1980 से लेकर 2022 के बीच सिर्फ़ 1996 के चुनाव को छोड़कर आज़म ख़ान ने लगातार जीत हासिल की.

1996 में वे कांग्रेस प्रत्याशी अफरोज़ अली ख़ान से चुनाव हार गए थे. आज़म ख़ान दस बार इस सीट से विधायक रहे हैं.

2019 में आज़म ख़ान रामपुर संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुए तो इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी ने डॉक्टर तज़ीन फातिमा जीत गई थीं.

2022 विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद हुए लोकसभा उपचुनाव और अब विधानसभा उपचुनाव में लगातार दूसरी बार आज़म ख़ान के क़रीबी आसिम राजा को हार का सामना करना पड़ा है.

अखिलेश यादव, आज़म ख़ान

इमेज स्रोत, ANI

जानकारों के अनुसार 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से आज़म ख़ान बीजेपी के निशाने पर रहे. उन पर कई मुक़दमे दर्ज होते गए और उन्होंने काफ़ी समय जेल में भी बिताया.

फिलहाल उनका पूरा परिवार ज़मानत पर बाहर है.

पत्रकार तमकीन फ़ैयाज़ कहते हैं कि आज़म ख़ान से लोग उदासीन भी चल रहे थे.

वे कहते हैं , "वोटिंग कम होने का एक कारण ये भी था कि ये उपचुनाव साल का तीसरा चुनाव था. लोग नाराज़ थे कि आप (आज़म ख़ान) एमपी बन गए, आपने छोड़ दिया. आप एमएलए बन गए, आपकी सदस्यता छिन गई. तो फिर हम वोट डाले, हम यही करते रहें, बस. तो लोगों में एक उदासीनता थी."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)