आज़म ख़ान: अखिलेश यादव की बुलाई बैठक में नहीं पहुंचे लेकिन कहा, 'नाराज़ होने की मेरी हैसियत नहीं'

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव रविवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए.
ये बैठक समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई. आज़म ख़ान के विधायक बेटे आज़म अब्दुल्लाह भी रविवार को बैठक में नहीं पहुंचे.
समाजवादी पार्टी ने उनकी ग़ैरमौजूदगी को लेकर कहा, "आज़म ख़ान स्वास्थ्य कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके."
आज़म ख़ान को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम ज़मानत मिलने के बाद शुक्रवार को ही सीतापुर जेल से रिहा किया गया है.
आज़म ख़ान रविवार को रामपुर में थे और उन्होंने अपने बेटे अब्दुल्लाह आज़म के साथ रामपुर जेल में अलग-अलग मामलों में बंद अपने समर्थकों से मुलाक़ात की.
आज़म ख़ान के मीडिया मैनेजर फ़साहत अली ख़ान ने अखिलेश यादव पर जेल में बंद 'आज़म ख़ान को नज़रअंदाज़ करने' का आरोप लगाया था.
फ़साहत ने आरोप लगाया था कि आज़म खान दो साल से अधिक जेल में रहे और अखिलेश यादव ने उनसे सिर्फ़ एक बार मुलाक़ात की और पार्टी ने उनकी रिहाई के लिए कोई प्रयास नहीं किया.
फ़साहत के इन आरोपों के बाद आज़म ख़ान और अखिलेश यादव के बीच नाराज़गी का सवाल भी उठा था.

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नाराज़गी के सवाल पर बोले...
हालांकि रविवार को आज़म ख़ान ने जेल में समर्थकों से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अखिलेश से उनकी कोई नाराज़गी नहीं है.
अखिलेश यादव से नाराज़गी के सवाल पर आज़म ख़ान ने कहा, "मैं किसी से नाराज़ होने की हैसियत में नहीं हूं."
जब पत्रकारों ने उनसे कहा कि शिवपाल यादव उनसे मिलने पहुंचे लेकिन अखिलेश नहीं आए तो इस पर आज़म ख़ान ने कहा, "मैं ना किसी के आने पर कोई टिप्पणी करूंगा ना किसी के ना आने पर. जो आए उनका शुक्रिया, जो नहीं आए, उनके कोई कारण रहे होंगे, उनका भी शुक्रिया. क्योंकि मैं नाराज़ होने की हैसियत में ही नहीं हूं. मुझे जो सुरक्षा मिली है वो न्यायपालिका से मिली है."
पत्रकारों ने आज़म ख़ान से सवाल किया, क्या ये माना जाए कि पार्टी से उन्हें कोई मदद नहीं मिली, इस पर उन्होंने कहा, "मैं इस बात को नकारता हूं कि मुझे समाजवादी पार्टी से मदद नहीं मिली. जो मेरे लिए जितना कर सका, उसने किया. दूसरे दलों के लोग भी आकर मुझसे मिले."
जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए आज़म ख़ान ने कहा, "जेल में बंद बेग़ुनाहों और मासूमों से मुलाक़ात की है. उन लोगों से मिला हूं जिनके सीने में धड़कन के सिवा कुछ भी नहीं है. मैं हिंदुस्तान के बहुत कमज़ोर लोगों से मिला हूं."
आज़म ख़ान ने सुप्रीम कोर्ट में उनका मुक़दमा लड़ने वाले वकील कपिल सिब्बल का भी शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने कहा, "इतने बड़े रुतबे के वकील ने मेरे जैसे आदमी का मुक़दमा लड़ा जिस पर ईडी की जांच बैठी है, जिससे ये पूछा गया कि विदेशों कितना बैंक बैलेंस, कोठियां और फैक्ट्रियां हैं."

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'मैंने चुनाव जीता है...'
आज़म ख़ान ने कहा, "मेरी ये हैसियत नहीं थी कि उनकी एक तारीख़ की फ़ीस भी दे पाता. उन्होंने जो मेरे लिए किया है वो ख़ून के रिश्तों में भी लोग नहीं करते."
आज़म ख़ान ने ज़मानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी शुक्रिया अदा करते हुए कहा, "वहां ना मेरे धर्म का कोई था, ना मेरी जात का, लेकिन इंसाफ़ के तकाज़ों को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा पूरा किया है कि साबित हो गया कि विधाता ने जो शक्तियां उन्हें दी हैं, उन्होंने उसका सही और जायज़ इस्तेमाल करके ये ज़ाहिर कर दिया कि अभी कमज़ोरों के लिए इंसाफ़ बाक़ी है."
पत्रकारों ने आज़म ख़ान से पूछा कि वो विधानसभा कब जा रहे हैं, इस पर उन्होंने कहा, "जिन हालात में मैंने चुनाव जीता है, सभी जानते हैं, सरकार, प्रशासन, सब मेरे ख़िलाफ़ थे, जो नंगा नाच हो रहा था, सब देख रहे थे. विधानसभा मेरे लिए कोई नई जगह नहीं है, मैं दसवीं बार वहां जाऊंगा, मैं चुना गया हूं."
पत्रकारों से बातचीत में आज़म ख़ान ने ये भी कहा कि वो शपथ लेंगे और अगर तबियत सही रही तो सदन में जाने की कोशिश करेंगे.

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क्या कोई संदेश देने की कोशिश में हैं आज़म ख़ान?
जब आज़म ख़ान से ये पूछा गया कि क्या अखिलेश यादव से नाराज़गी दूर हो गई है तो उन्होंने कहा, "आपसे मुझे नाराज़गी की सूचना मिल रही है. नाराज़ होने के लिए आधार चाहिए, मैं ख़ुद ही निराधार हूं तो वो आधार कहां से आएगा. मेरा अपना ही कौन सा आधार है."
आज़म ख़ान पर रामपुर में 80 से अधिक मुक़दमे दर्ज किए गए हैं जिनमें ज़मानतें मिलने में उन्हें लंबा वक़्त लगा और वो सवा दो साल जेल में रहे.
आज़म ख़ान ने कहा, "मैंने बच्चों के हाथ में कलम देना चाहा था. वो ख़्वाब आज भी ज़िंदा है. भले ही यूनिवर्सिटी गिरा दी जाए, उस पर बुल्डोज़र चला दिया जाए. उसके खंडरात, बनी हुई इमारतों से ज़्यादा इतिहास का हिस्सा बनेंगे और लोग उन्हें देखने आएंगे. हमारे क़िस्से सुनाए जांएंगे, हम पर हुए ज़ुल्म की कहानी सुनाई जाएगी."
जेल से रिहा होने के बाद आज़म ख़ान पार्टी की बैठक में ना जाकर जेल में बंद अपने कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे और उनका हालचाल जाना.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसा करके आज़म ख़ान अखिलेश को ये संदेश देना चाहते हैं कि 'अपने का ख्याल कैसे रखा जाता है.'
आज़म ख़ान जब जेल में बंद थे तब अखिलेश यादव पर उन्हें नज़रअंदाज़ करने के आरोप लगते रहे थे.
हालांकि अखिलेश यादव या आज़म ख़ान ने एक दूसरे के प्रति सार्वजनिक तौर पर किसी तरह की नाराज़गी ज़ाहिर नहीं की है.
कॉपी: दिलनवाज़ पाशा
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