भागलपुर का वो हत्याकांड जिससे दहल गया है बिहार - ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, भागलपुर से, बीबीसी हिन्दी के लिए
"मेरी माँ को उसने इस तरह मारा, जैसे कोई जानवर को भी नहीं मारता. जगह-जगह से काट डाला. मैं तो बस यही चाहती हूँ कि उसको फाँसी हो. उसके पूरे परिवार को फाँसी पर चढ़ा दिया जाए. जो हम पर बीत रही है, वो उसके परिवार पर भी बीते."
"मेरा तो माथा (दिमाग़) ही काम नहीं कर रहा है. मैं किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हूँ. कभी कुछ बोलता हूँ तो कभी कुछ. बस इतना बोलना है कि हत्यारे को फाँसी हो."
ये कहना है बिहार के भागलपुर ज़िले की रहने वाली नीतू कुमारी और अशोक यादव का जो नीलम देवी की बेटी और पति हैं.

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नीलम देवी की बीते शनिवार हत्या कर दी गई थी. हत्यारे ने नृशंसता की सारी हदें पार कर दीं. चीत्कार करती महिला का वीडियो भी पिछले दिनों वायरल हो गया.
हत्यारे ने कुल्हाड़ी से इतने वार किए कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके मुँह से सिर्फ़ एक ही शब्द निकलता कि 'शकील मियाँ मार देलकई'- यानी शकील मियाँ ने मार डाला.
नीलम देवी की हत्या और अभियुक्त (शकील और ज़ुबैर) को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें चल रही हैं. कोई इसे दिल्ली के श्रद्धा मर्डर केस से जोड़ रहा है तो कोई कुछ और कह रहा है. मृतका के गाँव छोटी दिलौरी में भी नेताओं की आवाजाही बढ़ गई है.
प्रशासन मुस्तैद है कि इलाक़े में सांप्रदायिक सौहार्द्र न बिगड़े. गाँव में जगह-जगह अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती है.

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क्या और कब का है मामला?
ये घटना शनिवार 3 दिसंबर की शाम लगभग 7 बजे की है.
बिहार के भागलपुर ज़िले के पीरपैंती बाज़ार से नीलम देवी अपने गाँव लौट रही थीं. रास्ते में ही उन पर हमला हुआ.
उनके परिजनों तक ये ख़बर पहुँची कि उन्हें किसी ने बेरहमी से काट डाला है. चेहरे से लेकर पूरी देह पर इतने वार किए गए हैं कि गिनना मुश्किल है.
आनन-फ़ानन में ग्रामीण और परिजन उन्हें लेकर थाने और फिर अस्पताल की ओर बढ़े, लेकिन ख़ून का बहना जैसे रुक ही नहीं रहा था. बाद में उनकी मौत हो गई.
महिला ने साँस उखड़ते-उखड़ते एक शख़्स का नाम लिया जो इस मामले में मुख्य अभियुक्त है. नाम है शेख़ शकील.

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घटना पर सियासत
अभियुक्त को सोमवार को काफ़ी मशक़्क़त के बाद पुलिस ने पकड़ लिया है. दूसरे नामजद अभियुक्त शेख़ ज़ुबैर को पुलिस 4 दिसंबर को ही गिरफ़्त में ले चुकी है.
लेकिन अभियुक्तों के मुस्लिम समुदाय से होने और पीड़ित पक्ष के हिंदू (यादव) समुदाय से ताल्लुक़ रखने को लेकर सूबे की सियासत गर्माती नज़र आ रही है.
पुलिस की मानें तो मुख्य अभियुक्त शेख़ शकील ने अपना गुनाह क़बूल भी कर लिया है. पुलिस हमले में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार (कुल्हाड़ी) को बरामद भी कर चुकी है.
इस मामले को लेकर सूबे का विपक्ष, सरकार पर ख़ासा हमलावर है. 5 दिसंबर की शाम सूबे के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा भी मृतका के घर पहुँचे.
वहाँ पहुँचकर उन्होंने कहा- सरकार जाति और धर्म के आधार पर अपराधियों को संरक्षण दे रही है. इससे समाज में अराजकता और अशांति फैलेगी. सीमावर्ती इलाक़े में हो रहे कांड अब मध्य बिहार में होने लगे हैं. इन सब घटनाओं के लिए सीएम नीतीश कुमार ज़िम्मेदार हैं.
घटना के प्रकाश में आते ही बिहार प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल भी महागठबंधन की सरकार पर ताबड़तोड़ हमले बोल रहे हैं. सरकार पर तुष्टिकरण और सीएम नीतीश कुमार के सत्तालोलुप होने का आरोप लगा रहे हैं.
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क्या कह रही है पुलिस?
इस मामले में भागलपुर के एसपी सिटी स्वर्ण प्रभात ने पत्रकारों को बताया, "पीरपैंती थाना क्षेत्र के अंतर्गत 3 दिसंबर की शाम एक महिला की हत्या कर दी गई थी. मृतका के परिजनों के बयान के आधार पर दो लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. दोनों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
मामला न्यायालय के पास है. जाँच के क्रम में यह पता चला है कि महिला और अभियुक्त के बीच घनिष्ठ संबंध रहा था. दोनों की खेती अगल-बगल थी और महिला ने अभियुक्त से अपनी बेटी की शादी के लिए कुछ पैसे लिए थे."
उन्होंने बताया, ''मृतका पैसे नहीं लौटा पा रही थी. इसलिए उनके बीच काफ़ी विवाद हो रहे थे. एक महीने पहले भी दोनों के बीच काफ़ी लड़ाई-झगड़ा हुआ था. इसी विवाद को लेकर अभियुक्त ने मृतका पर तेज़ और धारदार हथियार से वार किया. महिला गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गई.
उन्हें अस्पताल ले जाया गया और अस्पताल ले जाने के क्रम में महिला की मौत हो गई. घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीपीओ और एसडीओ ने घटनास्थल का दौरा किया है. हम परिवार से लगातार संपर्क में हैं. पुलिस हर संभव मदद के लिए तत्पर है.''

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रुपये के लेन-देन और नीलम देवी और शकील के एक-दूसरे से परिचित होने के बारे में मृतका की बेटी नीतू कुमारी कहती हैं- ''पैसे के लेन-देन की कहीं कोई बात नहीं है.
मम्मी के सबसे नज़दीक मैं रही हूँ. वो बासा (खेती की जगह) भी जाती थी तो मैं साथ जाती थी और बाज़ार भी हमको लेके जाती थी. हमारा उससे (शकील) से कोई रिश्ता-नाता नहीं था.
जैसे रोड पर चलने वाले किसी ऐरे-गैरे से बात हो जाती है तो उससे भी वैसे ही कभी बात हो गई. वो मेरे गाँव का भी आदमी नहीं था और ना ही मेरी बिरादरी का था.''
वहीं अभियुक्त शकील की बहू बीबी रवीना मृतका की बेटी के दावे को सिरे से ख़ारिज करती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मृतका का उनके घर आना-जाना था और उनके ससुर भी मृतका के घर आते-जाते थे. उन्होंने दोनों के संबंधों पर भी सवाल उठाए.

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उन्होंने ये भी दावा किया कि पैसे के लेन-देन के कारण सारा विवाद हुआ था.
बीबीसी से बातचीत में नीलम देवी के पति अशोक यादव ने कहा, "हमारा उस शख़्स से कोई लेना-देना नहीं. हमारा उससे कोई संपर्क और जुड़ाव नहीं था. इधर वो आता-जाता था तो हम कैसे रोक देते? हम चाहते हैं कि उसको फाँसी हो."
हालाँकि मीडिया में उन्होंने पहले कहा था कि शकील उनके घर में घुसने की कोशिश करता था, उनके बीच इसको लेकर कहा-सुनी भी हुई थी.

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वहीं जब हमने अभियुक्त की पत्नी निसारुन ख़ातून से शकील और नीलम देवी के एक-दूसरे से परिचय को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने कहा कि वो हमारे घर पर 10-11 साल से आती-जाती थी.
उन्होंने दोनों के बीच प्रेम का भी दावा किया और ये भी आरोप लगाया कि मृतका ने उनके पति से पाँच लाख रुपए लिए थे और बाद में पैसे देने से इनकार करने लगी.
उन्होंने कहा कि ये सारा मामला पैसे के लेन-देन का है.
इस मामले में पीरपैंती के थानाध्यक्ष राजकुमार ने बताया, "यहाँ मामला पैसे के लेन-देन और उससे बढ़े विवाद का ही है. अभियुक्त ने भी मृतका (नीलम देवी) को 2 लाख रुपए देने की बात कही है. अब इस बीच मृतका पैसे देने से इनकार कर रही थी.
रही बात दोनों के एक-दूसरे को जानने-पहचानने की, तो इसमें पुलिस का क्या हस्तक्षेप? हमारी तो बस यही कोशिश है कि इलाक़े में इसको लेकर सांप्रदायिक सौहार्द्र न बिगड़े. कहीं हिंसा न हो जाए.
सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की बातें चल रही हैं, लेकिन यह मामला अपराध से जुड़ा है. मृतका भी बयान देकर गई है, दोनों अभियुक्त हमारी गिरफ़्त में हैं. तमाम चीज़ों के मद्देनज़र गाँव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है."

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इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय नागरिक व इस मामले में शुरू से रिपोर्ट कर रहे शंकर दयाल ठाकुर बीबीसी से बातचीत में कहते हैं - ''यह एक आपराधिक घटना थी. हत्यारे ने नृशंसता की सारी हदें पार कर दीं. इसके लिए एक ही शब्द है बर्बर.
घटना को दो धर्मों से जोड़कर देखा जाने लगा. सोशल मीडिया पर बात का बतंगड़ बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन स्थानीय प्रबुद्ध लोगों और प्रशासन ने मामले को समय से संभाल लिया.
मुख्य अभियुक्त को तो ग्रामीणों ने ही पकड़कर पुलिस को सौंपा. वरना वो शायद ही पुलिस की पकड़ में आता. दोनों अभियुक्त अब सलाख़ों के पीछे हैं. अन्यथा मामला सांप्रदायिक हो सकता था. रही बात दोनों के पूर्व परिचय की तो गाँव-देहात के इलाक़े में कौन किसको नहीं जानता-पहचानता? दोनों एक-दूसरे को सालों से जानते थे.''
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