द कश्मीर फ़ाइल्स विवाद: इसराइली राजदूत ने कहा- 'लपिड आपको शर्म आनी चाहिए'

अनुपम खेर

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इमेज कैप्शन, कश्मीर फ़ाइल्स का एक दृश्य

'कश्मीर फ़ाइल्स' को इसराइली फ़िल्म निर्माता और गोवा में हुए इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल के चीफ़ ज्यूरी नदाव लपिड ने 'प्रोपेगेंडा' और 'भद्दी' फ़िल्म बताया. उन्होंने कहा कि फ़ेस्टिवल के कॉम्पिटेटिव सेक्शन में इस फ़िल्म को शामिल करने के फ़ैसले ने उन्हें 'हैरान' और 'परेशान' किया है.

लपिड का ये बयान सोशल मीडिया देखते ही देखते वायरल हो गया और इसे लेकर लोग खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

लपिड के बयान पर भारत में इसराइल के राजदूत नओर गिलोन ने भारत से माफ़ी मांगी है और कहा है कि भारत की मेज़बानी और दोस्ती के बदले लपिड के इस तरह का बयान देने पर मैं शर्मिंदा हूं और माफ़ी मांगता हूं.

'लपिड आपको शर्म आनी चाहिए'

सिलसिलेवार ट्वीट कर गिलोन ने नदाव लपिड के नाम एक खुला पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कहा, "नदाव लपिड के कश्मीर फ़ाइल्स को लेकर दिए गए बयान और उसे लेकर आलोचना पर मेरा नदाव को खुला पत्र."

"ये ख़त हिब्रू में नहीं लिख रहा हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि मेरे भारतीय भाई और बहन मेरी बात समझें. ये ख़त थोड़ा लंबा है इसलिए पहले मैं मुद्दे की बात कह देता हूं- 'आपको (नदाव लपिड) शर्म आनी चाहिए.'

भारतीय संस्कृति में कहा जाता है कि मेहमान भगवान होता है. आपने जजों के पैनल की अध्यक्षता करने के भारतीय निमंत्रण का दुरुपयोग किया है.

साथ ही भारत ने आप पर जो विश्वास किया, आपका सम्मान और आतिथ्य सत्कार किया ये उसका अपमान है. हमारे भारतीय दोस्तों ने फौदा सिरीज़ के अभिनेता लियो रैज़ और निर्माता एवी इज़ाशैरोफ़ को भी बुलाया था ताकि इस सीरीज़ को सेलिब्रेट किया जाए. मुझे लगता है आपको बतौर इसराइली आमंत्रित करने का एक कारण ये भी था.

नओर गिलोन

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इमेज कैप्शन, भारत में इसराइल के राजदूत नओर गिलोन

अपने व्यवहार को "उचित" ठहराने के लिए आपके इंट्रोस्पैक्ट करने की आदत को समझ सकता हूं, लेकिन मैं यह नहीं समझ सकता कि आपने क्यों इसके बाद एक चैनल को बोला कि मैं (नओर गिलोन) और मंत्री (अनुराग ठाकुर) दोनों ने मंच पर कहा कि हम दोनों देशों में समानता है-" हम एक जैसे दुश्मन से लड़ रहे हैं और बुरे पड़ोसी के साथ रह रहे हैं."

हमने इसराइली और भारत की समानता पर बात की. मंत्री (अनुराग ठाकुर) ने अपने इसराइल दौरे के बारे में बात की, वहां की उच्च तकनीक की बात की और फिल्म उद्योग की दुनिया में साथ काम करने के आशाओं पर बात की. मैंने भी कहा कि हम लोग भारतीय फ़िल्में देख कर बड़े हुए हैं.

मैंने ये भी कहा था कि हमें विनम्र होना चाहिए कि भारत में बेहतरीन फ़िल्म संस्कृति होने के वाबजूद वो इसराइली कंटेंट देख रहे हैं. (फौदा और भी कई शो)

मुझे फ़िल्मों के बारे में नहीं पता लेकिन मुझे ये पता है कि ये बयान असंवेदनशील और अभिमान से भरा हुआ है जो एक ऐतिहासिक घटना के पूरे तरह से अध्ययन के बिना दिया गया. ये भारत में एक ताज़ा घाव की तरह है जो कई लोगों को लगा और कई अब तक उसकी क़ीमत चुका रहे हैं.

नदाव लिपिड

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इमेज कैप्शन, नदाव लपिड

एक होलोकास्ट सर्वाइवर का बेटा होने के नाते आपके बयान पर भारत में जो प्रतिक्रिया आई उससे मैं बेहद दुखी हूं, लोग सिंडलर्ज़ लिस्ट जैसी फ़िल्म और होलोकास्ट को शक की निगाह से देख रहे हैं. मैं आपके बयान की निंदा करता हूं, इसको किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता. हम कश्मीर के मुद्दे पर संवेदनशील हैं.

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वाईनेट को दिए आपके इंटरव्यू से कश्मीर फ़ाइल्स की आलोचना और इसराइल की राजनीति में जो कुछ हो रहा है उसे लेकर अपनी नापसंदगी को जिस तरह आपने जोड़ा है, वो साफ़ दिखता है.

मेरी सलाह- जैसा कि आप अतीत में कर चुके हैं, आपको इसराइल मे जो पसंद नहीं है खुल कर उसकी आलोचना करें लेकिन दूसरे देशों पर अपनी भड़ास ना निकालें. मुझे नहीं लगता कि इस तरह की तुलना करने के लिए आपके पास पर्याप्त तथ्य हैं.

आप इसराइल ये सोच कर वापस जाएंगे कि "आप बोल्ड हैं आपने अपनी बात मज़बूती से रखी है. लेकिन हम इसराइल के प्रतिनिधि जो यहां रह जाएंगे. आपको हमारे डीएम बॉक्स देखने चाहिए आपके 'निर्भीक' बयान के बाद हमारी टीम को इसकी कीमत चुकानी होगी."

"भारत और इसराइल के लोगों के बीच दोस्ती बहुत मज़बूत है और आपने जो नुकसान पहुंचाया है, हम उसे ठीक कर लेंगे. मुझे शर्म आती है और हम सभी अपने मेज़बान भारत से आपके बुरे तरीके के लिए माफ़ी मांगना चाहते हैं क्योंकि हमने उनकी उदारता और दोस्ती का ऐसे बदला दिया."

विवेक अग्निहोत्री

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फ़िल्म के डायरेक्ट और अभिनेता ने क्या कहा

कश्मीर फ़ाइल्स फ़िल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री की ओर से सीधे इस मामले पर तो प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन अग्निहोत्री ने मंगलवार को ऐसा ट्वीट किया है, जिसे इस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है.

विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, "सुप्रभात. सच सबसे ख़तरनाक चीज़ है. इससे लोग झूठ बोलने लगते हैं."

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इस फ़िल्म के अभिनेता अनुपम खेर ने इस बयान के बाद सीधे तौर पर नदाव लपिड को लेकर तो कुछ नहीं कहा लेकिन उन्हें एक ऐसा ट्वीट किया जो सीधे लपिड के बयान से जोड़ा जा रहा है.

अनुपम खेर ने लिखा है, "झूठ का क़द कितना भी ऊँचा क्यों ना हो.. सत्य के मुक़ाबले में हमेशा छोटा ही होता है."

इस ट्वीट के साथ उन्होंने कश्मीर फ़ाइल्स और शिंडलर्ज़ लिस्ट फ़िल्म की तस्वीर शेयर की है.

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शिंडलर्ज़ लिस्ट साल 1994 में आई फ़िल्म है जो होलोकास्ट में फंसे यहूदियों की कहानी बयां करती है. इस फ़िल्म को बेस्ट पिक्चर का ऑस्कर अवॉर्ड मिला था.

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा, "पीएम मोदी, उनकी बीजेपी सरकार, दक्षिणपंथी इकोसिस्टम सबने मिलकर कश्मीर फ़ाइल्स को प्रमोट किया. उस फ़िल्म को इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ने ख़ारिज कर दिया है. ज़्यूरी प्रमुख ने इसे- प्रोपेगेंडा और भद्दा बताया है- और इसे फ़िल्म फ़ेस्टिवल के लिए अनुचित बताया."

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लपिड के बयान को लेकर गुस्सा ज़ाहिर करते हुए फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा, "नदाव लपिड ने कश्मीर फ़ाइल्स के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया है मैं उसपर कड़ी आपत्ति जताता हूं. तीन लाख कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार दिखाने को भद्दा नहीं कहा जा सकता. मैं एक फिल्म निर्माता और एक कश्मीरी पंडित के रूप में आतंकवाद के पीड़ितों के प्रति इस बेशर्म कृत्य की निंदा करता हूं."

"अनुराग ठाकुर जी, मैं एक कश्मीरी पंडित जिसने नरसंहार देखा है, मांग करता हूं कि हमारी त्रासदी को अभद्र बताने वाले आईएफएफआई 2022 के ज़्यूरी प्रमुख नदाव लपिड के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए."

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वो बयान जिसे लेकर हंगामा बरपा

गोवा की राजधानी पणजी में आयोजित हुए 53वें फ़िल्म फ़ेस्टिवल के समापन समारोह में लेपिड ने कहा, "आमतौर पर मैं लिखा हुआ पढ़ कर नहीं बोलता, लेकिन आज मैं बिलकुल संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से अपनी बात कहना चाहता हूं. मैं फ़ेस्टिवल के निर्देशक और प्रोग्रामिंग प्रमुख को इसकी सिनेमाई समृद्धि, विविधता और जटिलता के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. इंटरनेशनल कंपटीशन में 15 फ़िल्में थीं इनमें से 14 फ़िल्मों में सिनेमेटिक गुणवत्ता थी और इन फ़िल्मों ने एक विस्तृत चर्चा पैदा की. हम सब 15वीं फ़िल्म ' कश्मीर फ़ाइल्स' को देखकर हैरान और परेशान हो गए, हमें लगा कि ये फ़िल्म एक प्रोपेगेंडा और भद्दी फ़िल्म है. इस तरह के प्रतिष्ठित फ़िल्म फ़ेस्टिवल के कंपटेटिव सेक्शन में इस फ़िल्म को शामिल करना अनुचित है."

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लपिड इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल के कंपटीटिव सेक्शन के चेयरमैन हैं. लपिड की फ़िल्म 'सिनॉनिम' को साल 2019 में 69वें बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में गोल्डेन बीयर अवॉर्ड दिया गया था.

उन्होंने कहा, "मैं मंच पर आप लोगों से खुल कर ये बात कहने में सहज महसूस कर रहा हूं क्योंकि फ़ेस्टिवल में जिस तरह की मूल भावना हम शेयर करते हैं उसमें आलोचनाओं को स्वीकार करना अहम होता है. आलोचना जीवन और कला का अहम हिस्सा है."

गोवा इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल एक सरकारी आयोजन है. जिसका आयोजन नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉपोरेशन और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ़ गोवा ने मिलकर किया. जब लपिड ने ये बात कही तो उस वक्त मंच पर सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, अभिनेता अक्षय कुमार, आशा पारेख, अयुष्मान खुराना मौजूद थे.

मोदी

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मोदी और भागवत ने की थी तारीफ़

इस साल मार्च में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'द कश्मीर फाइल्स' की तारीफ की थी.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि "कश्मीर फाइल्स में जो दिखाया गया है उस सत्य को सालों तक दबाने का प्रयास किया गया. कुछ लोग फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की बात करते हैं. आपने देखा होगा, इमरजेंसी इतनी बड़ी घटना, कोई फिल्म नहीं बना पाया. कई सत्य को दबाने का लगातार प्रयास किया गया. जब हमने भारत विभाजन के दिन 14 अगस्त को हॉरर डे के रूप में याद करने का फ़ैला लिया तो कई लोगों को बड़ी मुसीबत हो गई. कैसे भूल सकता है देश. क्या भारत विभाजन पर कोई ऑथेंटिक फिल्म बनी?

दिल्ली के पांच सितारा होटल में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लिए इस फ़िल्म का खास प्रीमियर रखा गया था.

मोहन भागवत ने कहा कश्मीर फ़ाइल्स को लेकर कहा था कि जो लोग सत्य की चाह रखते हैं या जो लोग सत्य के भूखे हैं, उन्हें द कश्मीर फाइल्स फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस फ़िल्म की तारीफ़ करते हुए लिखा था, " अपने ही देश में अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए कश्मीरी पंडितों के बलिदान, असहनीय पीड़ा और संघर्ष की सच्चाई इस फिल्म के माध्यम से पूरी दुनिया के सामने आई है, जो एक बहुत ही प्रशंसनीय प्रयास है. "

कश्मीर फाइल्स

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कश्मीर फाइल्स को लेकर विवाद

इस साल मार्च में रिलीज़ हुई फिल्म कश्मीर फ़ाइल्स को लेकर तब से ही बहस चल रही है. कई लोगों ने इस फ़िल्म के वक्त और तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया था. एक वर्ग का मानना था कि इस फ़िल्म को प्रोपेगेंडा के तहत बनाया गया है वो भी ऐसे वक्त में जब देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ होने वाल अपराधों की नफ़रत की ख़बर आए दिन सामने आती है.

वहीं कई लोगों का ये मानना था कि फिल्म कश्मीरी पंडितों के साथ 90 के दशक में हुई ज़्यादती को दर्शाती है.

फिल्म पर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा था, "हमें ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि वो लोग वापस आएं लेकिन मुझे नहीं लगता कि जो फिल्म बना रहे हैं वो इन लोगों की वापसी चाहते हैं. इस फिल्म से वो चाहते हैं कि वो लोग हमेशा बाहर रहें."

उमर अब्दुल्ला का कहना था कि उस समय कश्मीर छोड़कर जाने वालों में सब मजहब के लोग शामिल हैं. इसमें सिख और मुस्लिम भाई बहन भी शामिल हैं. कुछ ऐसे मुसलमान भी हैं जो अब तक वापिस नहीं आए हैं.

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