पीएम मोदी की चर्चित टिप्पणी पर रूस ने कहा, इसमें कुछ भी नया नहीं

मोदी और पुतिन

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ख़ास बातें

  • भारत में रूस के राजदूत ने पीएम मोदी के बयान पर कहा है कि इसमें कुछ भी नया नहीं था
  • पीएम मोदी ने एससीओ में पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है
  • पीएम मोदी के भाषण का हवाला फ़्रांस के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में भी दिया था
  • रूस के राजदूत ने कहा है कि पीएम मोदी ने पुतिन से 'हमारे राष्ट्रों के बीच अटूट मित्रता का हवाला दिया था'
  • राजदूत ने कहा कि अगर यूक्रेन हथियार भेजने की रिपोर्टें पुष्ट हुईं तो इससे पाकिस्तान और रूस के संबंधों पर असर पड़ेगा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई सलाह पर रूस ने कहा है कि 'उसमें कुछ भी नया नहीं था.'

पीएम मोदी ने उज़्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन की बैठक से अलग रूसी राष्ट्रपति पुतिन से एक बैठक में कहा था कि 'यह युद्ध का दौर नहीं है.'

भारत में रूस के राजदूत देनिस अलिपोव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिमी देशों को जो ख़ुद के लिए सही लगता है, वो वही करते हैं.

पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में राष्ट्रपति पुतिन को सलाह दी थी कि 'यह दौर युद्ध का नहीं है.' इस बयान को आधार बनाकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस पर हमला बोला था.

मैक्रों ने अपने आधे घंटे से भी अधिक लंबे भाषण के दौरान पीएम मोदी का ज़िक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने सही कहा था कि यह युद्ध का दौर नहीं है. उनका लगभग पूरा भाषण रूस-यूक्रेन युद्ध पर आधारित था.

उनके अलावा अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भी पीएम मोदी की टिप्पणी का हवाला दिया था. उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि यह सिद्धांतों पर आधारित बयान है.

उन्होंने कहा था कि यह ऐसा संदेश है, जिसमें हर देश को इसके इर्द-गिर्द केंद्रित होना चाहिए चाहे वो रूस, यूक्रेन या अमेरिका के बारे मे कुछ भी महसूस करते हों.

भारत में रूस के राजदूत देनिस अलिपोव

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रूसी राजदूत ने क्या कहा

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भारत में रूस के राजदूत देनिस अलिपोव ने कहा कि इस बयान ने बहुत ध्यान खींचा लेकिन इस 'दृष्टिकोण में नया कुछ भी नहीं था.'

उन्होंने ध्यान दिलाया कि पीएम मोदी लगातार बेहद ऊंचे और साफ़ स्वर में दोहराते रहे हैं कि भारत रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखेगा.

अलिपोव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'हमारे राष्ट्रों के बीच अटूट मित्रता का हवाला दिया था.'

रूस के राजदूत ने कहा कि पश्चिमी नेताओं ने पीएम मोदी के उस बयान का हवाला दिया जो 'उनकी कहानी के लिए ठीक लगता है और उन्होंने उन बयानों से दूरी बना ली जो उन्हें पसंद नहीं है.'

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि यूक्रेन को लेकर रूस का दृष्टिकोण भारत से बिल्कुल अलग नहीं है क्योंकि मॉस्को बीते 15 सालों से 'धैर्यपूर्वक अपनी वैध सुरक्षा चिंताओं को ख़त्म करने को लेकर' उसके साथ एक शांतिपूर्ण समझौता चाहता था.

युद्ध को लेकर अलिपोव ने कहा कि यह नेटो और अमेरिका का गढ़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि जब वॉशिंगटन ने इराक़ पर सामूहिक विनाश के हथियारों का 'झूठा बहाना' बनाकर हमला किया था तब इस तरह का शोर क्यों नहीं हुआ.

मोदी और पुतिन

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पाकिस्तान पर क्या बोले

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अलिपोव से पूछा गया था कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि पाकिस्तान यूक्रेन में हथियार ट्रांसफ़र कर रहा है, इस पर उनका क्या कहना है.

इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के हथियार कहीं भेजे गए हैं तो इससे रूस और पाकिस्तान के संबंधों पर ख़ासा असर पड़ेगा.

रूस के राजदूत ने कहा, "अभी तक सभी अपुष्ट रिपोर्ट हैं. मुझे तथ्य मालूम नहीं है. अगर इसकी पुष्टि होती है तो इस बात में कोई शक नहीं है कि इससे पाकिस्तान और हमारे संबंधों पर असर होगा."

इसके अलावा रूसी राजदूत ने चेतावनी भी दी कि अगर जी-7 देश कच्चे तेल के दामों को तय कर देते हैं और वो सही नहीं हुए तो रूस वैश्विक बाज़ार में तेल की सप्लाई बंद कर देगा.

प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान अलिपोव ने कहा, "अगर हम मानते हैं कि दाम सही नहीं हैं और हमें स्वीकार्य नहीं हैं तो हम वैश्विक बाज़ार में और अमेरिका के दामों को समर्थन करने वालों को तेल की सप्लाई रोक देंगे."

उन्होंने कहा कि रूस अपने व्यापारिक हितों के लिए हानिकारक किसी भी तंत्र का पालन नहीं करेगा.

पुतिन

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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन इसका उस पर बहुत कम प्रभाव ही देखा गया है. जी-7 देश और यूरोपीय संघ रूसी कच्चे तेल और उसके रिफ़ाइंड उत्पादों पर एक क़ीमत तय करने का विचार कर रहे हैं.

इस महीने की शुरुआत में जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने एक बयान जारी किया था कि यह क़ीमतें ख़ासतौर पर डिज़ाइन की गई हैं ताकि रूसी राजस्व और यूक्रेन युद्ध में उसके पैसे की क्षमता को कम किया जा सके.

भारत में रूस के राजदूत अलिपोव ने कहा कि क़ीमतें तय कर देने से वैश्विक बाज़ार में तेल की कमी हो जाएगी और तेल के दाम तेज़ी से ऊपर चढ़ेंगे.

अमेरिका ने भारत से भी कहा है कि वो भी रूसी तेल के ख़िलाफ़ क़ीमतें तय करने के गठबंधन में शामिल हो. हालांकि भारत साफ़ कह चुका है कि वो इस प्रस्ताव पर कोई भी फ़ैसला लेने से पहले 'ध्यान से इसकी जांच करेगा.'

अलिपोव ने कहा कि "भारत ने अब तक इस योजना को लेकर सावधानी भरा रुख़ अपनाया है. यह भारतीय हितों के लिए लाभदायक बिल्कुल भी नहीं होगा."

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा कोई भी क़दम उठाया जाता है तो भारत अपना हित साधेगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, जी-7 के देश रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि रूस अपना तेल सस्ता न कर सके.

रूस

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हालांकि कहा जा रहा है कि जी-7 की यह योजना फ़िलहाल बहुत प्रभावी नहीं होगी. जी-7 दुनिया के सबसे धनी देशों का समूह है. इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ़्रांस, इटली और कनाडा हैं. जी-7 की इस योजना के साथ ईयू भी खड़ा है. जी-7 देश चाहते हैं कि चीन और भारत को रूस से सस्ता तेल ना मिले.

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जी-7 के प्राइस कैप की योजना के बीच रूस ने भारत को और सस्ते में तेल देने की बात कही है. भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ''भारत जी-7 के इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा.''

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जी-7 दो प्राइस कैप लगाने की बात कर रहा है. एक कच्चे तेल पर होगा और दूसरा रिफ़ाइंड प्रोडक्ट पर. कच्चे तेल पर प्राइस कैप इसी साल पाँच दिसंबर से लग सकता है और रिफ़ाइंड प्रोडक्ट पर अगले साल पाँच फ़रवरी से लग सकता है.

आर्थिक मामलों पर लिखने वाले जाने-माने स्तंभकार स्वामीनाथन अय्यर का कहना है कि यूरोप पिछले 50 सालों के सबसे भयावह ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और इसका असर भारत पर भी बहुत बुरा पड़ने वाला है.

स्वामीनाथन अय्यर ने लिखा है, ''भारत का व्यापार घाटा एक महीने में 30 अरब डॉलर तक पहुँच गया है. यह रक़म बहुत बड़ी है. हम बहुत मुश्किल घड़ी में प्रवेश कर रहे हैं. केवल यूरोप ही नहीं बल्कि हम भी संकट में समाते जा रहे हैं. अगर 12-13 महीनों तक यही स्थिति रही तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा. ऐसे में भारत को संकट से नहीं बचाया जा सकता है.''

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