पीएम नरेंद्र मोदी के एक फ़ोन कॉल से क्यों परेशान हुआ चीन?

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरू दलाई लामा को बुधवार को जन्मदिन की बधाई दी और इस बारे में ट्वीट भी किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "आज फ़ोन पर परम पावन दलाई लामा को 87वें जन्मदिन की बधाई दी. हम उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दलाई लामा को किया गया फ़ोन कॉल चीन को नागवार गुज़रा है.
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चीन ने भारत से क्या कहा
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से जब दलाई लामा के लिए भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की बधाई पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो चीन के प्रवक्ता ने कहा, "भारत के 14वें दलाई लामा की चीन विरोधी अलगाववादी प्रवृत्ति को पूरी तरह स्वीकार करना चाहिए और तिब्बत से जुड़े मामलों पर चीन से की गई प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए."
चीन के प्रवक्ता ने कहा, "भारत को तिब्बत से जुड़े मसलों का इस्तेमाल करके चीन के आंतरिक मामलों में दखलअंदाज़ी नहीं करनी चाहिए और सचेत होकर बोलना चाहिए और क़दम उठाने चाहिए."
चीन की इस टिप्पणी पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने अपने जवाब में कहा है कि दलाई लामा को भारत में सम्मानित मेहमान का दर्जा प्राप्त है और वो एक सम्मानित धर्मगुरू हैं जिनके भारत में बड़ी तादाद में अनुयायी हैं.
भारत ने और क्या कहा
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "परम पावन दलाई लामा को सभी सम्मान और अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है. भारत और दुनियाभर में बहुत से अनुयायी दलाई लामा का जन्मदिन मनाते हैं. प्रधानमंत्री की तरफ़ से 87वें जन्मदिवस के अवसर पर दी गई शुभकामनाओं को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए."
दलाई लामा 1959 में तिब्बत से भागकर भारत पहुंचे थे. तिब्बत इस समय चीन के नियंत्रण में है और चीन तिब्बत को अपना हिस्सा मानता है. दलाई लामा भारत पहुंचने के बाद से ही हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बौद्ध मठ में रहते हैं. चीन दलाई लामा को अलगाववादी नेता मानता है.

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चीन भारत में दलाई लामा की गतिविधियों पर नज़र रखता है और चीन का विदेश मंत्रालय इससे पहले भी उन्हें लेकर टिप्पणियां करता रहा है.
चीन पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि दलाई लामा को लेकर चीन की ये टिप्पणी सामान्य मानी जाती यदि भारत और चीन के बीच मौजूदा समय में तनाव नहीं होता.
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिटिश कोलंबिया में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर और चीन मामलों के जानकार स्वर्ण सिंह कहते हैं, "चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जो प्रतिक्रिया दी है वो रूटीन लगती है लेकिन मौजूदा समय में भारत चीन के बीच तालमेल बिगड़ा हुआ है और इसी तनाव के चलते भारत की चीन नीति में परिवर्तन आया है, ये उसी का जारी रहना है."
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी चीन की टिप्पणी का जवाब दिया है. दलाई लामा का विषय चीन के लिए बहुत संवेदनशील रहा है और चीन दलाई लामा को लेकर प्रतिक्रिया देता रहा है.
भारत ने कहा, "दलाई लामा तिब्बती लोगों के सिर्फ़ सबसे बड़े नेता ही नहीं हैं बल्कि तिब्बत के लोग उनकी पूजा भी करते हैं. दलाई लामा का भारत में होना भारत के लिए तिब्बत कार्ड को बहुत ही प्रभावी बना देता है. प्रधानमंत्री की तरफ़ से दलाई लामा को जन्मदिन की बधाई देना और फिर इस बारे में ट्वीट करना ज़ाहिर तौर पर चीन के लिए एक संदेश है."
"भारत ने ये संदेश दिया है कि चीन जिन मुद्दों को लेकर संवेदनशील है भारत उनका इस्तेमाल भी अपनी कूटनीति में कर सकता है. भारत ने ये साफ़ कर दिया है कि वो तिब्बत जैसे मुद्दों को उठाने में संकोच नहीं करेगा."

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जुलाई में लेह का दौरा करेंगे दलाई लामा
इस समय लाखों तिब्बती भारत में रहते हैं. साल 2010 से तिब्बती लोगों और चीन की बातचीत बंद है. तिब्बती लगातार ये मांग करते रहते हैं कि जब भी चीन के नेता भारत आएं तो उन पर तिब्बत के लोगों से बातचीत करने का दबाव बनाया जाए.
स्वर्ण सिंह कहते हैं, "तिब्बत के लोग अपने मुद्दों को उठाना चाहते हैं. लेकिन भारत का चीन के प्रति रवैया हमेशा इस बात पर निर्भर रहता है कि दोनों देशों के बीच संबंध कैसे हैं. इससे ही तय होता है कि दोनों देशों के बीच इन मुद्दों को सामने लाया जाएगा या नहीं लाया जाएगा."
"भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और इससे उपजे तनाव को दो साल से अधिक हो गए हैं और कई दौर की वार्ता के बाद भी कोई प्रगति होती नज़र नहीं आ रही है. ऐसे में ये लगता है कि भारत चीन के प्रति अपनी नीति में हुए बदलाव को ठोस तरीक़े से ज़ाहिर कर रहा है."
दलाई लामा 14-15 जुलाई को लेह का दौरा करेंगे और बौद्ध मठ में जाएंगे. दलाई लामा की लेह यात्रा को लेकर भी चीन असहज हो सकता है.
स्वर्ण सिंह कहते हैं, "जब कभी भी दलाई लामा की इस तरह की यात्रा होती है या उनकी तरफ़ से कोई टिप्पणी आती है तो चीन उस पर औपचारिक ऐतराज ज़ाहिर करता है."
हालांकि दलाई लामा की इस यात्रा के दौरान भारत और चीन के रिश्तों में तनाव है और माहौल बदला हुआ है.
स्वर्ण सिंह मानते हैं कि ऐसा हो सकता है कि दलाई लामा की लेह यात्रा को लेकर चीन की तरफ़ से तीखी टिप्पणी आए.
स्वर्ण सिंह कहते हैं, "जम्मू-कश्मीर के विघटन के बाद लेह-लद्दाख को लेकर और सीमा को लेकर चीन की तरफ़ से टिप्पणियां आती रही हैं. हाल ही में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जब ये कश्मीर में सम्मेलन के आयोजन की बात उठी तो चीन ने इसका खुला विरोध किया."

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"लेह में तिब्बती लोग रहते हैं, लेह की सीमा चीन के साथ लगी है और लेह के भारत के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन के बाद चीन ने लेह को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की है. इस संदर्भ में देखा जाए तो दलाई लामा की लेह यात्रा चीन को चिंता में ज़रूर डालेगी."
दलाई लामा एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व हैं और वो जहां भी जाते हैं उनके बयानों की चर्चा होती है.
ऐसे में विश्लेषक ये भी मानते हैं कि दलाई लामा की लेह यात्रा को लेकर चीन असहज ज़रूर हो रहा होगा.
स्वर्ण सिंह कहते हैं, "बहुत संभव है दलाई लामा की लेह यात्रा को लेकर चीन की तरफ़ से प्रतिक्रिया आए."
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