क्या महंगाई पर कांग्रेस की हल्ला बोल रैली 2024 चुनाव की रिहर्सल है?

इमेज स्रोत, INCIndia
"नफरत से लोग बंटते हैं, देश बंटता है, देश कमजोर होता है. बीजेपी-संघ के नेता देश को बांटते हैं, जानबूझकर देश में भय पैदा करते हैं, नफरत पैदा करते हैं. हिंदुस्तान में डर बढ़ता जा रहा है. किस चीज का डर- भविष्य का डर, महंगाई का डर, बेरोजगारी का डर. ये डर बढ़ता जा रहा है, इसके कारण हिंदुस्तान में नफरत बढ़ती जा रही है."
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की महंगाई पर 'हल्ला बोल' रैली के दौरान पार्टी नेता राहुल गांधी ने ये बातें कहीं.
राहुल गांधी 7 सितंबर से भारत जोड़ो यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में महंगाई और बेरोजगारी के मामले में मोदी सरकार पर हमलावर थे लेकिन इसे 2024 के चुनाव से पहले कांग्रेस की तैयारी की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा, "आप चले जाइए आज किसी भी दुकानदार, मज़दूर और किसान से पूछ लीजिए कि यूपीए और आज के समय में क्या अंतर है. यूपीए के सरकार में 70 हज़ार करोड़ रुपये किसानों को दिए. नरेंद्र मोदी जी ने तीन काले क़ानून दिए. मज़दूरों के लिए यूपीए मनरेगा दिया. मोदी जी ने संसद में मनरेगा को लिए बोला ये बेकार है. आज उन्हें मनरेगा देना पड़ रहा है."
हल्ला बोल रैली या विपक्षी एकता की अपील?
कांग्रेस 7 सितंबर से कश्मीर से कन्याकुमारी तक की 3500 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा शुरू कर रही है. राहुल गांधी इस पूरी यात्रा के दौरान महंगाई, बेरोजगारी का मुद्दा उठाएंगे और सांप्रदायिक सदभाव को बढ़ाने की अपील करेंगे.
उन्होंने इस यात्रा के बारे में कहा, '' इस यात्रा का मकसद आम लोगों से मिलना और उन्हें सरकार की ओर से फैलाए जा रहे झूठ के बारे में बताना है. उन्हें बताना है सरकार किस तरह से केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है. मुझसे ईडी ने 55 घंटों तक पूछताछ की. लेकिन वो 100 साल तक भी मुझसे पूछताछ करें तो मुझे इसकी परवाह नहीं. हमें इस तरह की कार्रवाइयों के खिलाफ खड़ा होना है, ये देश सिर्फ दो लोगों का नहीं बल्कि किसानों, मजदूरों और बेरोजगार नौजवानों का है. ''
महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ अभियान भारत जोड़ो यात्रा का मकसद है. लिहाजा बेरोजगारी और महंगाई पर वार करते हुए राहुल गांधी ने कहा, '' आपको आज जो बेरोजगारी दिख रही है, वो आने वाले समय में और बढ़ेगी. आपको एक तरफ बेरोजगारी की चोट लग रही है और दूसरी तरफ महंगाई की. 2014 में एलपीजी सिलेंडर 410 रुपये का था आज 1050 रुपये का है. पेट्रोल 70 रुपये प्रति लीटर पर था आज तकरीबन 100 रुपये प्रति लीटर है. डीज़ल 55 रुपये प्रति लीटर था लेकिन आज 90 रुपये प्रति लीटर है. सरसों का तेल 90 प्रति लीटर बिक रहा था, आज ये 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. ''
उन्होंने कहा, '' हिन्दुस्तान मेंआम नागरिक बहुत मुश्किल में हैं. लोग बहुत दर्द सह रहे हैं जब विपक्ष इन बातों को संसद में उठाना चाहता है, तब मोदी सरकार विपक्ष को संसद में बोलने नहीं देती."

इमेज स्रोत, INCIndia
महंगाई-बेरोजगारी का मुद्दा और कांग्रेस की चुनावी तैयारी
राहुल ने भले ही इस रैली में मोदी राज में महंगाई, बेरोजगारी और सांप्रदायिकता बढ़ने के खतरे का मुद्दा उठाया लेकिन उन्होंने गुजरात, हिमाचल के विधानसभा चुनावों से लेकर 2024 में मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा चुनाव की तैयारियों के भी संकेत दे दिए. इसमें विपक्षी एकता की अपील भी दिख रही थी. ''
राहुल ने कहा,'' ये विचारधारा की लड़ाई है. हमारी पार्टी दूसरी पार्टियों के साथ मिल कर बीजेपी और संघ की विचारधारा को हराएगी''
भले ही भारत जोड़ो यात्रा को चुनावी राजनीति से अलग रखने की कोशिश हो रही है और कहा जा रहा है कि राहुल हिमाचल और गुजरात चुनाव में प्रचार से ब्रेक लेकर बढ़ती गरीबी, असमानता और सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ आयोजित इस यात्रा में हिस्सा लेंगे.
लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि इसका मकसद कहीं न कहीं 2024 के चुनाव से पहले कांग्रेस की तैयारियों से भी है. भारत जोड़ो यात्रा से त्कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए राहुल ने इस सप्ताह की शुरुआत में 22 शहरों की यात्राएं की थी. ये एक तरह से चुनाव से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जोश भरने की कवायद के तौर पर भी देखी जा रही है.
उन्होंने इसमें 'दिल्ली चलो' का भी नारा दिया था. इस अपील का असर रविवार को दिल्ली में महंगाई के खिलाफ उनकी 'हल्ला बोल रैली' में दिख रहा था, जहां कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जमा हुए थे. राहुल की रैली में पार्टी समर्थकों की खासी भीड़ दिख रही थी.

इमेज स्रोत, ANI
भारत जोड़ो यात्रा से कांग्रेस को चुनावी फायदा ?
गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल से लेकर आनंद शर्मा जैसे कांग्रेस के G-23 के नेताओं की नाराजगी और पार्टी से दूरी की वजह से कांग्रेस को जिन आलोचनाओं को सामना करना पड़ रहा है, उन्हें रामलीला ग्राउंड की रैली और भारत जोड़ो यात्रा की गहमागहमी कम कर सकती है.
ये इसका फौरी मकसद हो सकता है लेकिन कांग्रेस की सक्रियता देखने से लगता है कि 2024 के चुनाव से पहले उसने अपनी पूरी ताकत बटोरने की कोशिश शुरू कर दी है.
2022 के आखिर में गुजरात और हिमाचल में चुनाव हो सकते हैं. 2023 में नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं. लिहाजा कांग्रेस ने अभी से खुद को मजबूत करने की कोशिश नहीं की तो 2024 के चुनाव में विपक्ष तो दूर यूपीए का नेतृत्व करने में भी उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
अक्टूबर महीने में कांग्रेस अध्यक्ष का भी चुनाव होना है. अगर राहुल अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें आक्रामक नेतृत्वकारी की भूमिका में दिखना होगा. उस हिसाब से इस तरह की रैलियां और यात्राएं कांग्रेस के लिए कारगर साबित हो सकती हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
बीजेपी का वार
बीजेपी ने राहुल की इस रैली पर करारा हमला किया है.बीजेपी ने कहा, ''2014 के बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 फीसदी चुनाव हारे हैं. यूपी में उत्तर प्रदेश में नब्बे फीसदी से से ज्यादा इनकी सीटों पर जमानत जब्त हुई है. इस टीम का कप्तान कोई नहीं बनना चाहता है. एक बार फिर राहुल गांधी को लांच करने के लिए, ये योजना तैयार की गई है. ''
बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने नेशनल हेराल्ड मामले में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा ,'' राहुल गांधी डरे हुए हैं. यही डर उनके भाषण में दिख रहा था. उनके भाषण में नफरत और क्रोध झलक रहा था. यह परिवार बचाओ आंदोलन और परिवार बचाओ रैली थी. ''
पात्रा ने कहा,'' राहुल गांधी कह रहे हैं कि भारत की हालत खराब है. लेकिन कुछ दिन पहले ही भारत की यात्रा ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से आगे निकलते हुए दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन बई है. ''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
बीजेपी के एक और नेता और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा, '' यूपीए के समय मंदी क्या थी आज क्या है? दुनिया और भारत में क्या फर्क है? मंदी कम करने के लिए क्या हुआ है और दुनिया में क्या चल रहा है? युक्रेन-रूस युद्ध के बाद दुनिया में क्या चल रहा है और भारत में क्या, ये पता करके राहुल गांधी को बात करनी चाहिए'' .
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
विपक्षी एकता का मुश्किल सवाल हल कर पाएंगे राहुल?
राहुल ने हल्ला बोल रैली में कहा, "हमारी संस्थाएं मीडिया और न्यायालय पर दबाव है. हमारे पास एक ही रास्ता बचा है, सीधा जनता के बीच जाकर जनता को देश की सच्चाई बताना. जो जनता के दिल में है उसे गहराई से सुनना और समझना. इसलिए कांग्रेस पार्टी भारत जोड़ो यात्रा शुरू कर रही है. आप सब दूर-दूर से आए इसलिए आपको धन्यवाद करना चाहता हूं."
उन्होंने कहा, '' देश की हालत आपको दिख रही है, जब से बीजेपी की सरकार आई है, तब से देश में नफरत और क्रोध बढ़ता जा रहा है. मीडिया देशवासियों को डराती है, इससे नफरत पैदा होती है. आज हमारा देश जिन मुश्किलों से गुजर रहा है, इसका पूरा श्रेय भाजपा की गैर-जिम्मेदार सरकार को जाता है. लेकिन हम अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे, आम जनता का साथ निभाएंगे, उनकी आवाज बुलंद करेंगे.''
राहुल ने भले ही महंगाई के खिलाफ हल्ला बोल रैली में कहा कि आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा को हराना है. लेकिन लोगों का कहना है कि इसके लिए राहुल को विपक्षी एकता कायम करने के लिए भारी मशक्कत करनी होगी.
2022-23 में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों की रिहर्सल के तौर पर शुरू की जाने वाली भारत जोड़ो यात्रा तमिलनाडु से शुरू होगी, जहां सत्तारुढ़ डीएमके के साथ उसका चुनावी गठबंधन है.
महाराष्ट्र में एनसीपी और कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ है. लेकिन क्या वह 2024 में तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े विपक्षी दलों को जोड़ पाएगी. आने वाले दिनों में विपक्षी एकता का क्या तस्वीर हो सकती है उसका कुछ संकेत उस भारत जोड़ो यात्रा से मिल सकता है, जिसकी वॉर्मिंग-अप रविवार में महंगाई के खिलाफ पार्टी की हल्ला बोल रैली के साथ की गई.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















