कांग्रेस अध्यक्ष को कौन चुनेगा, पार्टी नेताओं ने मांगी लिस्ट तो मिला ये जवाब- प्रेस रिव्यू

सोनिया और राहुल गांधी

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कांग्रेस ने अंदरूनी उठापटक के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है लेकिन अब पार्टी नेता चुनाव की प्रक्रिया को लेकर ही आमने-सामने हैं. कांग्रेस में छिड़े इस घमासान को आज कई अख़बारों ने प्रमुखता से छापा है. आज प्रेस रिव्यू में सबसे पहले पढ़िए देश की सबसे पुरानी पार्टी में चल रही इसी हलचल से जुड़ी ख़बर.

कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए 17 अक्टूबर को चुनाव होना है. लेकिन पार्टी के कुछ सांसदों और बड़े नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए मतदान करने वाले प्रतिनिधियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है.

वहीं, पार्टी ने इस मांग को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि आज तक ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, पार्टी की चुनाव समिति के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने कहा है कि इलेक्टोरल कॉलेज में शामिल प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रतिनिधियों की लिस्ट को पार्टी मुख्यालय में देखा जा सकता है और ये सूची उम्मीदवारों को भी उपलब्ध करवाई जाएगी.

पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी लिस्ट प्रकाशित करने की मांग को ख़ारिज करते हुए कहा, "ये पार्टी की अंदरूनी प्रक्रिया है, और इसे सबके देखने के लिए नहीं छापा जाना चाहिए. ऐसा पहले भी नहीं हुआ. और हम उसी प्रथा का पालन करेंगे."

बीते रविवार को हुई कांग्रेस कार्यकारिणी (सीडब्लूसी) की बैठक के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा भी ये मांग कर चुके हैं.

इसके बाद मनीष तिवारी ने बुधवार को कहा कि 'निष्पक्ष चुनाव' के हित में यही है कि मतदाता सूची जारी की जाए. ऐसा करने से संभावित उम्मीदवारों को भी मदद मिलेगी, जिन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए 10 प्रस्तावकों की ज़रूरत होती है. ये मांग करने के बाद मनीष तिवारी को शशि थरूर और वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का भी साथ मिला है.

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार 22 साल पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हुए थे. उस समय जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था.

जब सोनिया गांधी के सामने खड़े थे जितेंद्र प्रसाद

जितेंद्र प्रसाद के खेमे का आरोप था कि उनके नामांकन दाखिल करने से पहले और बाद में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्यों की सूची से छेड़छाड़ की गई थी. उनके समर्थकों ने ये भी आरोप लगाया था कि सूची में फ़र्ज़ी नाम थे और उन्हें डेलीगेट्स का पता तक नहीं बताया गया, जिससे वह अपने लिए समर्थन जुटाने में सफल नहीं हुए.

यहां तक कि प्रसाद ने पार्टी में चुनाव देखने वाली इकाई सीईए को पत्र लिखकर कांग्रेस डेलीगेट्स की सूची जारी करने में विफल रहने को लेकर सवाल खड़े किए थे.

एक बार फिर से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने यही आरोप लगाया है.

मनीष तिवारी

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कांग्रेस के 'जी-23' गुट के नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने सवाल किया, "मतदाता सूची जारी किए बिना चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी कैसे हो सकता है." उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम और पता पार्टी की वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से डाला जाना चाहिए.

वहीं कांग्रेस के संगठन चुनाव प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस डेलीगेट्स की सूची राज्यों में पार्टी मुख्यालय पर देखी जा सकती है. उन्होंने ये भी कहा है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को सूची सौंपी जाएगी.

हालाँकि, इस पर मनीष तिवारी ने सवाल किया है कि अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए क्या राज्यों में भटकना होगा.

वहीं, शशि थरूर ने कहा, "मुझे लगता है ये ज़रूरी है...सबको ये पता होना चाहिए कि कौन नामांकित कर सकता है और कौन वोट कर सकता है. इसमें कुछ गलत नहीं है." कार्ति चिदंबरम ने पार्टी में सुधार की मांग करने वालों का बचाव करते हुए लिखा है, "हर चुनाव में एक स्पष्ट मतदाता सूची होनी चाहिए. एक अनौपचारिक सूची वास्तव में सूची नहीं होती."

मनीष तिवारी की ओर से ये मांग ऐसे समय में की गई है जब बीते रविवार ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनके जी-23 समहू के सहयोगी आनंद शर्मा ने भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में यही मसला उठाया था. इस बैठक में ही कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखें तय की गई हैं. आनंद शर्मा ने तर्क दिया ता कि करीब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के करीब 9 हज़ार डेलीगेट्स को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. बता दें कि प्रदेश कांग्रेस के करीब 9 हज़ार नेता ही अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मतदान करेंगे.

अमेरिका में चिनूक हेलीकॉप्टरों पर रोक, भारत पर क्या असर होगा?

चिनूक हेलीकॉप्टर

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अमेरिका ने ईंधन के रिसाव की वजह से इंजन में आग लगने के मामले सामने आने के बाद चिनूक हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. भारतीय सेना में भी फिलहाल 15 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल हैं.

हालाँकि, भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की कार्रवाई का भारत में चिनूक हेलीकॉप्टरों के संचालन पर कोई असर नहीं होगा और ये पहले की तरह ही काम करेंगे.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना की ओर से चिनूक सीएच -47 हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय वायुसेना ने 'बोइंग इंडिया' और पेंटागन से अधिक जानकारी मांगी है. दरअसल अमेरिका की बड़ी कंपनी बोइंग ने सेना के लिए ये खास हेलिकॉप्टर तैयार किए हैं.

एक अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है, "भारतीय वायुसेना के चिनूक पहले की तरह ही संचालित हो रहे हैं...उनमें कोई दिक़्क़त नहीं आई है. हमें, जितनी जानकारी है, अमेरिका ने ईंधन रिसाव की वजह से कुछ चॉपर के इंजनों में लगी आग के बाद चिनूक का इस्तेमाल बंद कर दिया है."

अमेरिकी सेना लगभग 400 चिनूक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है.

भारतीय वायुसेना ने साल 2019-20 में अपने बेड़े में 8048 करोड़ रुपये में खरीदे गए 15 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल किए थे. एक अन्य अधिकारी के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि अगर सुरक्षा से जुड़े मामले सामने आते हैं तो नियमानुसार उस विमान या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल बंद करना होता है. अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के जिन चॉपर में इंजन से जुड़ी समस्या सामने आई है, उनमें कुछ नए उपकरण लगाए गए हैं.

भारतीय वायुसेना लद्दाख समेत विभिन्न अभियानों में अपने चिनूक बेड़े का बड़े पैमाने पर उपयोग करती है.

भारतीय वायुसेना ने चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद ऊंचाई वाले इलाकों में अपने एम-777 होवित्ज़र तोप और सैनिकों को पहुँचाने के लिए इन्हीं चिनूक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था.

सितंबर 2015 में अमेरिका के साथ सौदा होने के बाद आईएएफ़ ने बोइंग के बनाए 22 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों को भी अपने बेड़े में शामिल किया था. इन हेलीकॉप्टरों को 13 हज़ार 952 करोड़ रुपे में खरीदा गया था.

एनआईए ने दाऊद इब्राहिम के ऊपर रखा 25 लाख रुपये का इनाम

दाऊद इब्राहिम

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सिर पर नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 25 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है.

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, दाऊद इब्राहिम और उनके कई अन्य सहयोगियों के नाम पर इस इनामी राशि का एलान हुआ है. दाऊद इब्राहिम की 'डी कंपनी' की ओर से हथियारों, विस्फोटक, ड्रग्स और फर्ज़ी भारतीय नोट की तस्करी और पाकिस्तानी संगठनों के साथ मिलकर भारत में चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने से जुड़े मामले की जांच को लेकर ये घोषणा की गई है.

अख़बार ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि एनआईए ने दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम उर्फ़ हाजी अनीस, उनके करीबी सहयोगी जावेद पटेल उर्फ़ जावेद चिकना, शकील शेख़ उर्फ़ छोटा शकील और इब्राहिम मुश्ताक़ अब्दुल रज़ाक मेमन उर्फ़ टाइगर मेमन को लेकर भी इनाम की घोषणा की है.

दाऊद इब्राहिम पर जहां 25 लाख रुपये की घोषणा हुई है तो वहीं जांच एजेंसी ने छोटा शकील के सिर पर 20 लाख रुपये अनीस इब्राहिम, चिकना और मेमन पर 15-15 लाख रुपये का एलान किया है.

माना जाता है कि दाऊद इब्राहिम ने पाकिस्तान के कराची में ठिकाना बनाया है. वो 1993 मुंबई धमाकों के साथ कई अन्य मामलों के लिए भारत में वॉन्टेड हैं. दाऊद इब्राहिम के सिर पर संयुक्त राष्ट्र 2003 में ही 2.5 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा कर चुका है.

एनआईए ने इसी साल फ़रवरी महीने में दाऊद इब्राहिम और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ ताज़ा मामला दर्ज किया था. एनआईए को सूचना मिली थी कि डी कंपनी ने पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई और कुछ चरमपंथी संगठनों के साथ मिलकर भारत में एक स्पेशल यूनिट बनाई है. इसका मकसद बड़े-बड़े भारतीय राजनेताओं और कारोबारियों को निशाना बनाना और साथ ही यहाँ चरमपंथी हमलों को अंजाम देना है.

इस मामले में जांच के तहत एनआईए ने मई महीने में 29 ठिकानों पर छापेमारी की थी. एनआईए के केस के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक को 23 फरवरी को गिरफ़्तार किया था. नवाब मलिक पर आरोप है कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पार्कर की मदद से कुर्ला में एक स्थानीय निवासी से 300 करोड़ रुपये की ज़मीन हड़प ली थी.

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