आर्यन ख़ान ड्रग्स मामले में क्यों एनसीबी पर सवाल उठ रहे हैं?

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- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
ऐसा कम ही होता है कि किसी हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटी केस में जाँच के दौरान कोई हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ सेल्फी खींचकर उसे सोशल मीडिया पर डाल दे, या किसी छापेमारी की कार्रवाई के बाद कोई राजनीतिक कार्यकर्ता हाथ पकड़कर सेलिब्रिटी अभियुक्त को लाता हुआ दिखाई दे.
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को एक क्रूज पर हुई कथित रेव पार्टी में गिरफ्तार किए जाने के मामले में बिलकुल ऐसा ही हुआ, यही वजह है कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने वाली एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं.
महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनसीपी के नेता नवाब मलिक का आरोप है कि आर्यन ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद जो तस्वीर वायरल हुई थी वो केपी गोसावी नाम के शख़्स ने ली थी. नवाब मलिक का कहना है कि गोसावी एक प्राइवेट डिटेक्टिव हैं और उनके खिलाफ़ धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं.
गोसावी की हिरासत में बैठे आर्यन ख़ान के साथ ली गई सेल्फी वायरल होने के बाद एनसीबी ने पहले कहा कि तस्वीर में दिख रहे शख़्स से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है, लेकिन बाद में उसे एक गवाह बताया गया.
मलिक ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े एक वीडियो में जो शख़्स आर्यन ख़ान के दोस्त अरबाज़ मर्चेंट के साथ दिखाई दे रहा है वो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता मनीष भानुशाली हैं जिनकी फेसबुक प्रोफाइल पर उसकी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के साथ ली गई तस्वीरें मौजूद हैं.
इस वीडियो में भानुशाली मर्चेंट का हाथ पकड़ कर उन्हें लाते हुए नज़र आ रहे हैं.
इन आरोपों को आधार बनाकर नवाब मलिक ने आर्यन ख़ान की गिरफ़्तारी से जुड़े पूरे मामले को फ़र्ज़ी क़रार दिया है. मलिक ने कहा है कि ये पूरा मामला महाराष्ट्र सरकार और बॉलीवुड को बदनाम करने की बीजेपी की साज़िश है.

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'कुछ व्यक्ति स्वतंत्र गवाह के रूप में जुड़े थे'
एनसीबी नवाब मलिक के आरोपों को ख़ारिज कर चुका है.
एनसीबी के उप-महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा है कि मामले से जुड़े पंचनामे क़ानूनी प्रावधानों के अनुसार तैयार किए गए हैं और इस कार्रवाई के दौरान "कुछ व्यक्ति स्वतंत्र गवाह के रूप में जुड़े थे." क़ानून में स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने का प्रावधान है.
छह अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए ज्ञानेंद्र सिंह ने 10 लोगों के नाम लिए जिनको उन्होंने स्वतंत्र गवाह बताया. इनमें किरण गोसावी और मनीष भानुशाली के नाम शामिल हैं.
गोसावी और भानुशाली को लेकर लग रहे इल्ज़ामों के बारे में ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा था कि "एंजेंसी के ख़िलाफ़ लगाए गए कुछ आरोप निराधार हैं और ऐसा लगता है कि ये आरोप एनसीबी की पिछली कार्रवाइयों के कारण पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं".
साथ ही, ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि एनसीबी की कार्रवाई पेशेवर और क़ानूनी रूप से पारदर्शी और निष्पक्ष रही है, और रहेगी.
ज्ञानेंद्र सिंह ने कोई नाम तो नहीं लिया लेकिन जिस पिछली कार्रवाई का ज़िक्र किया है उसे नवाब मालिक के दामाद समीर शब्बीर ख़ान की इस साल जनवरी में ड्रग्स के एक मामले में हुई गिरफ़्तारी से जोड़कर देखा जा रहा है.
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'स्वतंत्र लोगों को गवाह बनाना चाहिए था'
उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं कि किसी भी जांच में सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता होनी चाहिए.
वे कहते हैं, "निजी जांचकर्ताओं और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की मौजूदगी से जांच की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर असर पड़ता है. अपने 36 साल के करियर में मैंने कभी भी निजी जांचकर्ताओं या राजनीतिक लोगों के हस्तक्षेप या उपस्थिति की अनुमति नहीं दी है."
मनीष भानुशाली ने कहा है कि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते उन्होंने इस मामले से जुड़ी जानकारी एनसीबी को दी थी.
विक्रम सिंह कहते हैं, "यदि कोई निजी जांचकर्ता या राजनीतिक कार्यकर्ता आपको जानकारी देना चाहता है तो उसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन ऐसे लोगों को कभी भी जांच का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता. यदि आप हितों के टकराव और निहित स्वार्थ वाले लोगों से जुड़े हैं तो इस बात का भरोसा नहीं किया जा सकता कि जांच निष्पक्ष और क़ानूनी तरीके से होगी."
विक्रम सिंह कहते हैं कि एनसीबी को ये सुनिश्चित करना चाहिए था कि इस जांच में निहित स्वार्थ वाले लोग और हितों के टकराव वाले लोग शामिल न हों. "उन्हें स्वतंत्र लोगों को गवाह के रूप में रखना चाहिए था."

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'आम लोग गवाह बनने से कतराते हैं'
जहाँ एक तरफ विक्रम सिंह का मानना है कि निजी जांचकर्ताओं या राजनीतिक कार्यकर्ताओं को किसी आधिकारिक जांच में शामिल करने से उस जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, वहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय का कहना है कि ज़्यादातर ऐसा देखा गया है कि "आम लोग पुलिस के गवाह बनने से कतराते हैं क्योंकि कोई भी अदालतों के चक्कर नहीं लगाना चाहता".
राय के अनुसार एनसीबी का यह कहना सही ही होगा कि ये लोग उनके इनफॉर्मर या मुखबिर थे.
वे कहते हैं, "ये सही ही होगा कि एनसीबी इन लोगों को अपने साथ ले गई होगी क्योंकि किसी बड़ी हस्ती के बेटे के ख़िलाफ़ गवाही देने वाला आसानी से कोई मिलता नहीं है. जो लोग दिखाई दे रहे हैं वो वही होंगे जिनकी इन्हीं सब चीज़ों से रोज़ी-रोटी चलती है."
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चर्चा में एनसीबी
पिछले कुछ समय से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो काफी चर्चा में रहा है. पिछले साल बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक कथित ड्रग रैकेट के खुलासे की जांच के तहत एनसीबी ने कई बॉलीवुड अभिनेताओं और अभिनेत्रियों से पूछताछ की थी.
कई दिनों चली पूछताछ के बाद एनसीबी ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार भी किया था. इसी कथित ड्रग्स केस की जांच के दौरान अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से भी पूछताछ की गई थी.
फ़िल्म और टीवी जगत से जुड़े कई बड़े नामों को एनसीबी ने अपनी जांच के दौरान पेश होने के लिए कहा था. कई दिनों तक हर रोज़ एनसीबी दफ्तर में इन सेलिब्रिटीज से पूछताछ चलती रही लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ गया. पिछले साल 28 दिन हिरासत में रहने के बाद रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ज़मानत पर रिहा कर दिया था.
इसी बीच कांग्रेस ने यह आरोप लगाया है कि एनसीबी की क्रूज पर की गई छापेमारी गुजरात की मुंद्रा बंदरगाह पर हुई ड्रग्स की ज़ब्ती के मुद्दे से ध्यान हटाने की एक कोशिश है.
16 सितंबर को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने गुजरात के कच्छ जिले में अडानी समूह के मुंद्रा पोर्ट पर दो कंटेनरों से करीब तीन हज़ार किलो हेरोइन ज़ब्त की थी जिसकी कीमत वैश्विक बाजार में क़रीब 21 हज़ार करोड़ रुपए बताई जा रही है.
विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि एनसीबी ड्रग्स कारोबार में लगे बड़े सौदागरों को छोड़कर छोटे-मोटे मामलों पर ध्यान लगा रहा है.
बहरहाल, गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद छह अक्टूबर को मुंद्रा पोर्ट से ड्रग्स की ज़ब्ती का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने हाथ में ले लिया है.
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