तेलंगाना: पीएम मोदी की तस्वीर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद कहां तक आ पहुंचा? - प्रेस रिव्यू

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को अपनी तेलंगाना यात्रा के दौरान कामारेड्डी के ज़िलाधिकारी को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाई थी.
दरअसल, निर्मला सीतारमण ने उचित-मूल्य की दुकान (पीडीएस शॉप) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर नहीं नज़र आने पर ज़िलाधिकारी से सवाल किया था. अब टीआरएस ने सीतारमण पर पलटवार किया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, निर्मला सीतारमण के इस व्यवहार पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने अपने अंदाज़ में पीएम मोदी की तस्वीर लगाकर ही जवाब दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, टीआरएस ने ज़िलाधिकारी को फटकार लगाने पर सीतारमण की आलोचना की है. निर्मला सीतारमण की यात्रा के एक दिन बाद यानी शनिवार को पलटवार करते हुए टीआरएस कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर सिलेंडर के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगा दी. तस्वीर के साथ लिखा, "मोदी जी- 1105 रुपये."
सोशल मीडिया पर भी इन तस्वीरों को पोस्ट किया गया.
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क्या है मामला
बीजेपी की 'लोकसभा प्रवास योजना' के तहत निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को ज़हीराबाद संसदीय क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में शिरकत की. इसी दौरान वह बिरकुर गांव में एक उचित-मूल्य की दुकान पर पहुंचीं. सीतारमण ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि जो चावल खुदरा बाज़ार में 35 रुपये प्रति किलो मिलता है, उन्हें उसी एक किलो चावल के लिए कितने रुपये देने पड़ते हैं? इस पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि वे एक रूपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करते हैं.
इसके बाद निर्मला सीतारमण ने कामारेड्डी के ज़िलाधिकारी जितेश वी पाटिल से पूछा कि क्या उन्हें पता है कि बाकी के 34 रुपये में से राज्य सरकार कितना वहन करती है और केंद्र सरकार कितना?
जैसे ही कलेक्टर ने निर्मला सीतारमण को जवाब देना शुरू किया, सीतारमण ने उन्हें रोक दिया. उन्होंने कहा, "आप स्पष्ट तौर पर अपना जवाब दें. आप तेलंगाना कैडर के आईएएस अधिकारी हैं...क्या आपको अपना जवाब सोचने के लिए समय चाहिए होगा? मेरे मीडिया को संबोधित करने से पहले इन आधे घंटों में आप अपना जवाब तैयार कर लें. मैं उन्हें यह कह सकती हूं कि कलेक्टर खुद भी तुरंत इसका जवाब नहीं दे सके, उन्हें मुश्किल हुआ और उन्होंने जवाब तलाशा."
इसके बाद वह उनसे कहती हैं कि उचित-मूल्य की दुकान पर जो चावल 35 रुपये प्रति किलो की दर से मिलता है उसमें से 29 रुपये केंद्र सरकार वहन करती है, राज्य 5 रुपये और आम लोगों को यह एक रुपये देकर एक किलो मिलता है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर क्यों नहीं है?
इसके बाद निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री की तस्वीर को लेकर ज़िलाधिकारी पाटिल से सवाल किया. उन्होंने ज़िलाधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि ज़िले में जितनी भी उचित-मूल्य की दुकानें हैं, वहां पीएम मोदी की तस्वीर स्पष्ट तरीक़े से नज़र आए.
उन्होंने कहा, "हमारे लोग यहां आकर फ़्लैक्स लगाकर जाएंगे. बतौर ज़िलाधिकारी, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि फ़्लैक्स ना तो हटे और ना ही फाड़ा जाए."
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए ज़ालधिकारी पाटिल ने कहा कि सीतारमण से मुलाक़ात के दौरान और इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वो कभी भी डरा हुआ महसूस नहीं कर रहे थे.
उन्होंने बताया, "उन्होंने पीडीएस पर कुछ मांगा, जो ठीक उसी वक़्त पर मेरे पास नहीं था. उन्होंने कहा कि वो आधे घंटे तक मेरे जवाब का इंतज़ार करेंगी लेकिन वह चली गईं."

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प्रधानमंत्री की आलोचना करना आज के समय में जोखिम भरा है - पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि लोकतंत्र में, सकारात्मक सोच के साथ की गई आलोचना एक मौलिक अधिकार है.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रहे जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण ने मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा था, "आज के समय में चीज़ें काफ़ी ख़राब हो चुकी हैं और मुझे ये बिल्कुल स्वीकार करना चाहिए कि अगर मैं किसी चौराहे पर खड़ा हूं और अगर मुझे प्रधानमंत्री का चेहरा पसंद नहीं है तो हो सकता है कि मेरे ऊपर छापेमारी की कार्रवाई हो जाए, मुझे गिरफ़्तार कर लिया जाए और बिना मुझे कोई वजह बताए, जेल में डाल दिया जाए."
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, पूर्व जज के इस बयान पर कैबिनेट मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई है.
किरेन रिजिजू ने ट्वीट करके इस संबंध में अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.
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उन्होंने लिखा है, "वो लोग जो हर समय बिना किसी रोक-टोक के प्रधानमंत्री के लिए गालियां देते रहते हैं, वे भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में बोल रहे हैं. वे कांग्रेस काल में लगे आपातकाल के बारे में कभी बात नहीं करेंगे. साथ ही कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं की आलोचना करने की भी उनमें कोई हिम्मत नहीं होती है."
रिजिजू ने आगे लिखा है, "मुझे नहीं पता कि सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज ने सच में ऐसा ही कहा है या नहीं. लेकिन अगर यह सच है तो उनका यह बयान उस संस्था का अपमान है, जिसकी उन्होंने इतने सालों तक सेवा की."
किरेन रिजिजू के बयान के बाद जब इंडियन एक्सप्रेस ने पूर्व जस्टिस से प्रतिक्रिया जाननी चाहिए तो उन्होंने कहा, "मैं उन प्रशासनिक अधिकारियों के बारे में बात कर रहा था जो अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब तक आलोचना मर्यादा में रहते हुए की जाए, वह सर्विस रूल्स के आड़े नहीं आती है. लेकिन बेशक कानून के शासन को लेकर मेरी चिंता अपनी जगह बनी हुई है. साथ ही सरकार कैसे अपने आलोचकों को जवाब देती है, इसे लेकर भी."

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रेज़रपे, पेटीएम और कैश-प्री के ठिकानों पर छापे
प्रवर्तन निदेशालय ने चाइनीज़ लोन ऐप के ज़रिए धोखाधड़ी की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फिनटेक कंपनियों जैसे पेटीएम, रेज़रपे और कैश-फ्री के बेंगलुरू स्थित छह दफ़्तरों पर छापेमारी की कार्रवाई की है.
दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के अनुसार, ईडी ने अपने एक बयान में कहा है कि चीनी कंपनियों के मर्चेंट आईडी और बैंक खातों से 17 करोड़ रुपये ज़ब्त हुए हैं.
ईडी के मुताबिक़, चीन के लोगों के नियंत्रण वाले रेज़रपे प्राइवेट लिमिटेड, कैशप्री पेमेंट्स और पेटीएम पेमेंट सर्विस लिमिटेड और अन्य कंपनियों में तलाशी की कार्रवाई की गई थी. ये कंपनियां पेमेंट-गेटवे और बैंकों के पास रखे गए अलग-अलग मर्चेंट आईडी और खातों के ज़रिए संदिग्ध और अवैध व्यवसाय चला रही थीं.
इस मामले में छापेमारी अभी भी जारी है.

शबाना आज़मी, जावेद अख़्तर और नसीरुद्दीन शाह टुकड़े-टुकड़े गैंग के स्लीपर-सेल- नरोत्तम मिश्रा
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आज़मी, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और गीतकार जावेद अख़्तर को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के स्लीपर सेल का एजेंट बताया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, ''शबाना आज़मी , नसीरुद्दीन शाह और जावेद अख़्तर जैसे लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग के स्लीपर सेल के एजेंट हैं जो सिर्फ़ बीजेपी शासित राज्यों में हुई घटनाओं पर ही हल्ला मचाते हैं, जबकि कांग्रेस शासित राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में हो रही घटनाओं पर मौन रहते हैं.''
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उन्होंने कहा, ''उदयपुर (राजस्थान) में कन्हैयालाल की हत्या हुई थी, तब क्या कोई कुछ बोला था! अभी हमारी बेटी को झारखंड में ज़िंदा जला दिया गया, वह बोलीं कुछ, वह नहीं बोलीं.''
मिश्रा ने कहा, ''बीजेपी शासित राज्य में कोई घटना हो जाए, तो फिर नसीरुद्दीन शाह सहित इन लोगों को देखिए. देश में रहने पर डर लगेगा. फिर एक अवार्ड वापसी गैंग भी है, वो भी सक्रिय हो जाएगा और गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाएगा.''
उन्होंने कहा, ''ये लोग ख़ुद ही अपनी मानसिकता का परिचय देते हैं. इन्हें सभ्य एवं धर्मनिरपेक्ष कैसे कहा जा सकता है?''
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