अमेरिका: इस ख़तरनाक परमाणु बिजली संयंत्र को लेकर इतना विवाद क्यों है

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- Author, रीड सेल्स
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ये लगभग समुद्र पर बना है. लॉस एजेंल्स और सैन फ्रांसिस्को के बीच आधे रास्ते में स्थित 'डिएब्लो केनयन' कैलिफोर्निया का आख़िरी सक्रिय परमाणु बिजली संयंत्र है.
लेकिन इस गुरुवार तक ऐसा लग रहा था कि इसके दिन बचे-खुचे ही हैं.
अपनी स्थापना के वक्त से ही ये परमाणु बिजली संयंत्र विवादित रहा है.
1960 के दशक में इसकी स्थापना के समय कैलिफोर्निया में काफी मजबूत परमाणु विरोधी आंदोलन उठ खड़ा हुआ था.
इसकी सुरक्षा को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं. भूकंप के लिहाज से अज्ञात खतरे वाले क्षेत्र में होने से जुड़ी एक के बाद एक कई रिपोर्टों के आने के बाद ये हमेशा विवाद में रहा.
साल 2016 तक इसका प्रबंधन करने वाली कंपनी, राज्य प्रशासन, पर्यावरण और यूनियन से जुड़े समूहों के बीच इसे बंद करने पर सहमति कायम हो गई थी.
उस वक्त इसे 2025 तक बंद करने पर सहमति बनी थी. लेकिन आखिरी वक्त में आए एक बदलाव से ये इसके आगे और पांच साल तक चल सकता है.
इस गुरुवार को कैलिफोर्निया सरकार ने पैसिफिक गैस एंड इलेक्ट्रिक कंपनी (पीजीएंडई) को 14 अरब डॉलर का कर्ज दिया ताकि यह 2030 तक चलता रहा. राज्य के गवर्नर गेविन न्यूसम ने इस योजना को बढ़ावा दिया था.
प्लांट पर इस फैसले का विरोध क्यों?
इस फैसले ने उन लोगों के गुस्से को और भड़का दिया, जो इसे अमेरिका का सबसे खतरनाक न्यूक्लियर पावर प्लांट मानते हैं. इसकी वजह है. यह प्लांट ऐसे इलाके में है, जहां भूकंप आने की आशंका रहती है.
इस प्लांट से थोड़ी दूर के शहरों में बड़ी तादाद में लोग रहते हैं. लेकिन पीजीएंडई इस खतरों की आशंकाओं से इनकार कर रही है.
लेकिन इस प्लांट के समर्थकों ने इस प्लांट को 2030 तक जारी रखने के फैसला के स्वागत किया है. उनका कहना है कि जब हीट वेव की वजह से बिजली की खपत काफी बढ़ जाएगी तो कंपनी से बिजली की सप्लाई काफी मददगार साबित होगी.
इसके साथ ही यह कैलिफोर्निया के क्लाइमेट गोल को हासिल करने में मदद करेगी. डिएब्लो केनयन के बिना यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा. राज्य में ऊर्जा का यह सबसे बड़ा स्रोत है. पिछले साल इसने नौ फीसदी बिजली पैदा की थी.
2021 में गवर्नर न्यूसम ने नाटकीय ढंग से अपना रुख बदलते हुए डिएब्लो केनयन को बंद करने की डेडलाइन बढ़ा दी थी.
साथ ही उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच अपने इस आइडिया के लिए समर्थन जुटाना भी शुरू किया था. बहरहाल ये योजना ठोस रूप में दो सप्ताह पहले रखी गई.

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परमाणु बिजली संयंत्र के समर्थकों का तर्क
पिछले बुधवार को इस मुद्दे को थोड़ी और हवा मिली,जब इलेक्ट्रिक नेटवर्क के ऑपरेटरों ने नागरिकों से अपील की कि वे हीट वेव के दौरान एयर कंडीशनिंग का सीमित इस्तेमाल करें. ज्यादा बिजली खर्च होने पर राज्य में ब्लैकआउट का खतरा पैदा हो सकता है.
न्यूसम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है,'' भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना बेहद जरूरी है.'' कैलिफोर्निया ने उन दर्जनों परियोजनाओं के लिए 54 हजार मिलियन डॉलर खर्च किए हैं ताकि ये राज्य 2045 तक न्यूक्लियर न्यूट्रेलिटी हासिल कर सके.
न्यूक्लियर एनर्जी की जरूरत के संदर्भ में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है. खुद राष्ट्रपति जो बाइ़डन ने 2050 तक क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और उत्सर्जन घटाने के लिए 370 अरब डॉलर की मंजूरी वाला कानून पारित किया था.
सेव क्लीन एनर्जी की प्रवक्ता इजाबेल बोएमेक ने गुरुवार को कहा कि डिएब्लो केनयन को जारी रखने का मतलब ये है कि हम वातावरण में करोड़ों टन कार्बन उत्सर्जित करने से बच जाएंगे.
दूसरी ओर इस प्लांट को जारी रखने का विरोध भी हो रहा है. 'फ्रेंड्स ऑफ अर्थ' नाम के पर्यावरण संगठन ने इसे जल्दबाजी में किया गया लापरवाह फैसला बताया, जो किसी के भी समझ के बाहर है.
संगठन के अध्यक्ष एरिक पिका और विशेषज्ञों का एक पूरा समूह मानता है कि ये देश के सबसे खतरनाक परियोजनाओं में से एक है.

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लोगों की जिंदगी से खेलने के आरोप
जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि इससे रेडियोधर्मी विकिरण फैलने का खतरा है. एरिक कहते हैं यह भूकंप की आशंका वाले क्षेत्र में हैं और बड़ी आबादी के नजदीक है.जो कंपनी इसका प्रबंधन कर रही है, उसका ध्यान इसे बंद करने की प्रक्रिया पूरी करने पर है.
इसने इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव पर कोई निवेश नहीं किया है.
इस प्लांट से सबसे नजदीकी शहर सैन लुई ओबिप्सो है. यह प्लांट से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर है और यहां 48 हजार लोग रहते हैं. लॉस एजेंल्स और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहर कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर हैं.
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पर्यावरण और परमाणु नीति कार्यक्रम के निदेशक रहे डेनियल हरशिम ने न्यूज़ एजेंसी एपी से कहा कि इस प्लांट को बंद करने में देरी का मतलब है बड़ी तादाद में लोगों की जिंदगी में खतरे में डालना .
डिएब्लो केनयन में परमाणु रियेक्टरों का बनना 1968 में शुरू हुआ था. उस दौरान इसका भारी विरोध हुआ था. जब इसका काम काफी तेजी से चल रहा था तो एक बड़े खतरे के बारे में पता चला.
हॉसग्री फॉल्ट जो समुद्र तट पर प्लांट से 5 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद था वो 7.5 की तीव्रता का भूकंप पैदा करने में सक्षम था. जबकि प्लांट सिर्फ 6.7 की तीव्रता को बरदाश्त करने की क्षमता के साथ बनाया जा रहा था.

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कंपनी का दावा
यह संयंत्र भूकंप को झेल सकेगा या नहीं. इस बार में शक और पुख्ता हुआ जब 2008 में एक नया सिस्मिक फॉल्ट मिला. इसे शोरलाइन नाम दिया गया और यह डियेब्लो केनयन से महज 600 किलोमीटर दूर था.
2014 में दुर्घटना की आशंका एक बार फिर सामने आई, जब एपी ने एक गोपनीय रिपोर्ट जारी की. इस पर माइकल पेक ने दस्तखत किया था. वह यूएस न्यूक्लियर रेगुलेटरी कमीशन के इंस्पेक्टर के तौर पर प्लांट में दो साल पहले तक काम कर चुके थे.
इस दस्तावेज में ये नहीं कहा गया था कि ये रिएक्टर असुरक्षित हैं. लेकिन इसमें ये संकेत जरूर दिए गए थे कि इसे चलाए रखना परमाणु सुरक्षा के खिलाफ हो सकता है. हालांकि एनआरसी और पीजीएंडई ने तुरंत इस आशंका को खारिज करने की कोशिश की.
बीबीसी मुंडो ने जब इस संबंध में सवाल किए तो पीजीएंडई ने कहा कि डियेब्लो केनयन एक सुरक्षित प्लांट बना रहेगा.
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