ईरान ने फिर शुरू किया परमाणु कार्यक्रम, अब आगे क्या?

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ईरान का कहना है कि उसने यूरेनियम संवर्धन के लिए नए और उन्नत तकनीक वाले सेंट्रीफ्यूज उपकरणों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.
सेंट्रीफ्यूज को हिंदी में अपकेंद्रण यंत्र भी कहते हैं, जिसका इस्तेमाल यूरेनियम के रासायनिक कणों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए किया जाता है.
कई वैश्विक शक्तियों के साथ साल 2015 में किए गए परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने की दिशा में यह ईरान का अगला कदम है.
इससे पहले ईरान ने कहा था कि वो यूरेनियम का संवर्धन कर समझौते के तहत बताई गई सीमा से अधिक मात्रा में उर्जा उत्पादन करने लायक यूरेनियम बनाएगा. साथ ही हाल ही में उसने कहा था कि परमाणु संवर्धन के लिए शोध और विकास कार्यों से जुड़ी सभी सीमाओं को वो ख़त्म करेगा.
परमाणु एजेंसी के प्रवक्ता बेहरूज़ कमलवंडी का कहना है कि ऐसे 40 सेंट्रीफ्यूज ने अब काम करना शुरू कर दिया है. संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जाएगा.
अमरीकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने जुलाई में दो प्रतिबद्धताओं का पालन करना बंद कर दिया था.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान को एक नए समझौते पर बातचीत करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं, जिसके तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम अनिश्चित काल के लिए बंद करना होगा, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास की दिशा में हो रहे कामों को रोकना होगा.
लेकिन ईरान अब तक इससे इनकार करता रहा है.
साल 2015 में हुए समझौते में शामिल अन्य देश- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन और रूस इसे बरकरार रखना चाहते हैं और इसके लिए कोशिशें कर रहे हैं. लेकिन ईरान पर अमरीका के कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके कारण ईरान के तेल निर्यात में भारी गिरवाट आई है. इसकी मुद्रा की कीमत भी घटी है और मुद्रास्फीति की दर में बढ़ोतरी देखी गई है.
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ईरान ने क्या किया है?
परमाणु एजेंसी के प्रवक्ता बेहरूज़ कमलवंडी ने शनिवार को नई घोषणाएं कीं.
उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने 20-20 की संख्या में आईआर-4 और आईआर-6 सेंट्रीफ्यूज चालू किए हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले यूरेनियम का संवर्धन कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए और नए सेंट्रीफ्यूज विकसित किए जाएंगे.
बेहरूज़ कमलवंडी ने कहा कि ईरान अपने कदम वापस ले सकता था अगर अन्य देश समझौते का पालन करने को तैयार होते और उस पर प्रतिबंध नहीं लगा,ते.
इसी बीच ईरान ने कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वो परमाणु कार्यक्रमों पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को उसके काम पर अनुमति देना जारी रखेगा.
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अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने इसी साल, एक जुलाई को इस बात की पुष्टि की थी कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम के भंडारण की 300 किलोग्राम की सीमा का उल्लंघन किया है.
इसके छह दिनों के बाद ईरान ने यूरेनियम को 4.5 फीसदी कान्सन्ट्रेशन से संवर्धन करना शुरू कर दिया. उसका कहना था कि वो अपने बुशहर बिजली संयंत्र के लिए ईंधन बनाना चाहता है.
परमाणु समझौते के तहत इसकी सीमा 3.67 प्रतिशत तय की गई थी. परमाणु हथियारों के लिए यूरेनियम को 90 फीसदी या उससे अधिक तक संवर्धित किया जाता है.
2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान को साल 2026 तक यूरेनियम संवर्धन के लिए 5,060 से अधिक आईआर-1 सेंट्रीफ्यूज चलाने की अनुमति नहीं है. यह सेंट्रीफ्यूज सबसे पुराना और कम उन्नत मॉडल समझा जाता है.
समझौते के तहत अनुसंधान और विकास को इस तरह से जारी रखने की अनुमति दी जाती है कि संवर्धित यूरेनिमय तय मात्रा से अधिक जमा नहीं किया जा सके. यह आईआर-6 और आईआर-8 सेंट्रीफ्यूज के परीक्षण की भी अनुमति देता है. ये सेंट्रीफ्यूज यूरेनियम का संवर्धन ज़्यादा तेज़ी से कर सकता है. साल 2024 के बाद ईरान 30 आईआर-6 सेंट्रीफ्यूज तक का परीक्षण शुरू कर सकता है.
माना जाता है कि इस पूरी प्रक्रिया से परमाणु बम बनाने की गति में तेज़ी आ जाएगी.
परमाणु समझौते को पूरी तरह पालन करने के बदले फ्रांस ने ईरान को 15 बिलियन डॉलर का तेल खरीदने की पेशकश की है, जिसका ईरान के अधिकारियों ने स्वागत किया है. यह ईरान के लिए विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक मौक़ा होगा.
हालांकि एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि ट्रंप प्रशासन को फ्रांस की पेशकश पर संदेह है.
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7 बिंदुओं में समझिए 2015 का परमाणु समझौता
- ईरान में दो जगहों- नतांज़ और फोर्दो में यूरेनियम का संवर्धन किया जाता है. संवर्धन किए जाने के बाद इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा या फिर परमाणु हथियारों को विकसित करने के लिए किया जा सकता है.
- जुलाई 2015 में ईरान के पास 20 हज़ार सेंट्रीफ्यूज थे, जहां यूरेनियम का संवर्धन किया जाता था.
- ज्वाइंट एंड कम्प्लीट एक्शन प्लान के तहत इसकी संख्या 5,060 तक सीमित करने को कही गई थी. ईरान ने वादा किया था कि वो अपने यूरेनियम का भंडार घटाकर 300 किलोग्राम तक करेगा.
- जनवरी 2016 में ईरान ने यूरेनियम केंद्रों की संख्या कम की और सैंकड़ों किलोग्राम लो-ग्रेड यूरेनियम रूस भेजे थे.
- समझौते के तहत शोध और विकास के कार्यक्रम सिर्फ नतांज़ में अधिकतम आठ सालों तक किया जा सकेगा. वहीं, फोर्दो में अगले 15 सालों तक इस पर रोक लगाने की बात कही गई है.
- लेकिन अमरीका के इससे अलग होने के बाद समझौते में शामिल अन्य देशों पर ईरान को अलग-थलग करने का दबाव बनने लगा. ईरान और समझौते में शामिल कुछ देशों पर कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं.
- शुरुआत में ईरान का कहना था कि अगर दूसरे देशों का सहयोग मिलता है तो वो समझौते पर कायम रहेगा. लेकिन ऐसा नहीं हो सका, अंततः ईरान ने फिर से परमाणु संवर्धन की दिशा में काम करना शुरू कर दिया.
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