ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से हटे ट्रंप

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राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अमरीका को अलग किया. बराक ओबामा के कार्यकाल में किए गए इस समझौते से अलग होते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अप्रासंगिक और बेकार करार दिया.
डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि साल 2015 में जब ईरान के साथ हुए समझौते के बाद आर्थिक प्रतिबंधों में जो रियायतें दी गई थीं, उसे वो दोबारा लगाएंगे.
ट्रंप का ये क़दम उनके यूरोपीय सहयोगियों और कुछ सैन्य सलाहकारों के सुझाव के ख़िलाफ़ है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि परमाणु समझौते से हटने के अमरीका के इस कड़े क़दम का वो पूरा समर्थन करते हैं.
ईरान ने की निंदा
ईरान के राष्ट्रपति रूहानी ने ट्रंप के इस फ़ैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है.
अमरीका के इस क़दम के जवाब में ईरान ने कहा है कि वो यूरोनियम संवर्धन का काम दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा है जो कि परमाणु ऊर्जा और हथियार दोनों के लिए ज़रूरी है.

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ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा, ''अमरीका ने बता दिया है कि वो अपने कहे का सम्मान नहीं करता. मैंने ईरान के आणविक ऊर्जा संगठन को आदेश दिया है कि यूरेनियम के औद्योगिक स्तर पर संवर्धन का काम शुरू करने की तैयारी करे.''
उन्होंने कहा कि वो अपने सहयोगियों और परमाणु समझौते में शामिल अन्य देशों के साथ बातचीत के लिए ''कुछ हफ़्ते ही'' इंतज़ार करेंगे.
उधर अमरीका ने कहा है कि ईरान पर दोबारा आर्थिक प्रतिबंध तुरंत नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि इसके लिए 90 और 180 दिन का इंतज़ार किया जाएगा.
अमरीका ने कहा है कि उन्हीं उद्योगों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे जिनकी चर्चा 2015 के डील में की गई थी.
इनमें ईरान का तेल सेक्टर, विमान निर्यात, क़ीमती धातु का व्यापार और ईरानी सरकार के अमरीकी डॉलर ख़रीदने की कोशिशें शामिल हैं.
डोनल्ड ट्रंप ने पहले शिकायत की थी कि समझौता ईरान की परमाणु गतिविधियों पर एक नियत समय के लिए रोक लगाता है और ये मिसाइलों के विकास को रोकने में नाकाम रहा है. साथ ही इससे ईरान को 100 अरब डॉलर मिल गए जिसका इस्तेमाल उसने हथियार हासिल करने, चरमपंथ को बढ़ावा देने और पूरे मध्य पूर्व में दमन के लिए लिए किया.
प्रतिक्रिया

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ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल रहे फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने अमरीका के इस फ़ैसले पर खेद प्रकट किया है.
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को छोड़ने के अमरीका के फ़ैसले पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हैं.
उन्होंने कहा कि अमरीका के इस फ़ैसले से परमाणु अप्रसार के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग जाता है. लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ईरान के साथ वो इससे जुड़े व्यापक महत्व वाले विषयों पर बात करेंगे जिसमें ईरान के हथियार कार्यक्रम और मध्यपूर्व में स्थिरता संबंधी बातचीत शामिल है.
यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख फ़ेडेरिका मोघेरिनी ने कहा कि संघ परमाणु समझौते को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है.
ट्रंप के इस फ़ैसले पर अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री और समझौते के लिए हुई बातचीत में शामिल रहे जॉन कैरी ने ट्वीट कर कहा है कि कुछ साल पहले दुनिया के सामने जो चुनौतियां थीं, इस क़दम ने हमें वहीं पहुंचा दिया है.
क्या है समझौता?

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जुलाई 2015 में ओबामा प्रशासन में हुए इस समझौते के तहत ईरान पर हथियार ख़रीदने पर पाँच साल तक प्रतिबंध लगाया गया था, साथ ही मिसाइल प्रतिबंधों की समयसीमा आठ साल तय की गई थी.
बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया और बचे हुए हिस्से की निगरानी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों से कराने पर राज़ी हो गया था.
समझौते पर दस्तख़त करने वाले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस समझौते से अलग न होने की अपील की थी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने हाल की अमरीकी यात्रा के दौरान भी कहा था कि वे मानते हैं कि ईरान के साथ हुआ समझौता 'बेस्ट' नहीं था, लेकिन इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं था.

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इन देशों ने ये संकेत भी दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहे जो भी फ़ैसला करें, वे ईरान के साथ हुए तीन साल पुराने समझौते पर कायम रहेंगे.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी कह चुके हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म किया तो अमरीका को ऐतिहासिक रूप से पछताना होगा.
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