संभलः 'गैंगरेप कर भाग गए और फिर बेटी की हत्या कर दी'

मृतका के परिवार के लोग

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    • Author, शहबाज़ अनवर
    • पदनाम, संभल से, बीबीसी हिंदी के लिए

"उन्होंने मेरी बेटी का गैंगरेप किया. मेरी बेटी और मैं इंसाफ़ के लिए छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों से मिले. मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. गैंगरेप के क़रीब सवा महीने बाद 24 अगस्त को उन्होंने मेरी बेटी की हत्या कर दी. आरोपी समय से पकड़े जाते तो शायद मेरी बेटी ज़िंदा होती. वह इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन अब मैं चाहती हूं कि दोषियों को सरकार उसी तरह फांसी दे जिस तरह उन्होंने मेरी बेटी को फंदे से लटकाकर मारा."

संभल जनपद की तहसील चंदौसी के थाने के तहत आने वाले कुढ़ फतेहगढ़ की रहने वाली रीना देवी ने जितनी भी देर हमसे बात की, उनके चेहरे पर कभी गुस्से के भाव आ जाते तो कभी दुख के.

ये वही रीना देवी हैं, जिनकी नाबालिग बेटी का शव बीते 24 अगस्त को छत के पंखे के कुंदे से लटका मिला था.

रीना देवी ने पुलिस में शिकायत की थी कि उनकी कक्षा आठ में पढ़ने वाली नाबालिग (लगभग 16 वर्ष) बेटी के साथ पड़ोस में ही रहने वाले तीन सगे भाइयों और उनके एक रिश्तेदार ने 12 जुलाई की रात में गैंगरेप किया.

इसके बाद 15 जुलाई को सिर्फ़ एक अभियुक्त सोवेंद्र के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज की गई थी.

बाद में मजिस्ट्रेट के समक्ष हुए बयानों के बाद 25 अगस्त को बाकी तीन अभियुक्तों वीरेश गुर्जर, विपिन गुर्जर और जीनेश गुर्जर के नाम भी जांच में जोड़ दिए गए.

हालांकि, इस प्रकरण में अभियुक्तों की समय से गिरफ्तारी नहीं होने पर, लापरवाही के आरोप में संबंधित थाना इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है.

पुलिस उप महानिरीक्षक शलभ माथुर ने बताया, "इस मामले में प्रथम दृष्यता लापरवाही पाते हुए विवेचक को सस्पेंड किया गया था. इसमें और कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को भी सस्पेंड किया जा रहा है. गांव में पीड़ित परिवार के घर पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस तैनात की गई है."

मृतका का घर

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क्या हुआ था उस दिन?

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संभल जनपद की तहसील चंदौसी में थाना कुढ़ फतेहगढ़ के गांव में 24 अगस्त को अचानक से इस घर से रोने-चिल्लाने की आवाज़ें आने लगीं. आवाज़ें सुनकर लगभग पूरा गांव वहां जमा हो गया.

कमरे में रीना देवी की 16 साल की बेटी का शव पंखे से लटका हुआ था.

रीना देवी ने बीबीसी को बताया, "मैं गांव के ही एक सरकारी स्कूल में रसोइये का काम करती हूं. उस दिन जब मैं ड्यूटी से लौटी तो मेरी बेटी घर के सबसे पीछे के कमरे में पंखे से लटकी हुई थी."

बेटी को इस हालत में देखकर रीना देवी बेहोश हो गई थीं.

उनके बड़े बेटे तरुण ने बताया, "मैं चंदौसी में मजदूरी करता हूं. जब मुझे इस बारे में पता चला तो मैं तुरंत ही घर आया. गांव वाले घर के सामने जमा थे. पुलिस को फ़ोन किया जा चुका था. बाद में जब पुलिस आई तो उन्होंने ही मेरी बहन का शव ऊपर से नीचे उतारा और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया."

मृतका का घर

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क्या है पूरा मामला?

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पीड़ित घरवालों का आरोप है कि उनकी बेटी की इस हालत के लिए उनके पड़ोस में रहने वाला एक युवक और उनके तीन बेटे ज़िम्मेदार हैं.

रीना देवी बताती हैं, "12 जुलाई को मेरी बेटी घर के भीतर अपनी छोटी बहन के साथ सो रही थी. गर्मी की वजह से मैं अपने छोटे बेटे रतन के साथ घर के बाहर चबूतरे पर सो रही थी. घर के सामने ही झोपड़ी में मेरा बड़ा बेटा तरुण और अरुण सो रहे थे. मेरी छोटी बेटी उठकर बाहर आई और उसने बताया कि भीतर उसकी बड़ी बहन नहीं है. हमने उसे सभी जगह तलाशा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया. बाद में वह घर की छत पर मिली."

"उस समय तो उसने हमें कुछ नहीं बताया लेकिन बाद में उसने बताया कि हमारे पड़ोसी सतपाल के घर रहने वाले सोवेंद्र के अलावा सतपाल के तीन बेटों वीरेश, जीनेश और विपिन ने जंगल में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया."

रीना देवी ने बताया, "हमने 14 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस ने केवल एक अभियुक्त सोवेंद्र के ख़िलाफ ही रिपोर्ट दर्ज की जबकि गुनाहगार वो तीन भाई भी थे. मजिस्ट्रेट के सामने मेरी बेटी का बयान दर्ज हुआ, जिसके बाद अन्य तीनों के नाम भी जांच में शामिल कर लिए गए, लेकिन उनमें से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई."

कोतवाली

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"गिरफ्तारी होती तो शायद मेरी बहन ज़िंदा होती"

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क़रीब सात साल पहले पिता की मौत के बाद से घर का बड़ा भाई तरुण ही सारी ज़िम्मेदारियां उठा रहा था.

तरुण ने बीबीसी से बताया, "मेरी बहन हर रोज़ मां के साथ अधिकारियों से मिलकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रही थी, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी. आरोपी लगातार खुलेआम घूम रहे थे और हमारे परिवार को धमकियां दे रहे थे. 24 अगस्त को उन्होंने आख़िरकार मेरी बहन की जान ही ले ली."

सम्भल पुलिस ने प्रकाशित किया गया खंडन

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क्या कहती है पुलिस?

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इस पूरे मामले में शुक्रवार को डीआईजी मुरादाबाद शलभ माथुर ने थानाध्यक्ष को सस्पेंड करने की जानकारी मीडिया को दी.

बीबीसी ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक (एसपी) चकरेश मिश्र से जब बात की तो उन्होंने कहा, "देखिये डीआईजी साहब इस बारे में पहले ही बाइट दे चुके हैं."

फिर भी उन्होंने इस पूरे प्रकरण में पुलिस पर उठ रहे सवालों के बारे में कहा, "घटना के फौरन बाद ही 15 जुलाई को रीना देवी की तहरीर पर दुष्कर्म के अलावा पॉक्सो एक्ट सहित कईं अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी. जहां तक मृतका की हत्या का सवाल है तो शुरू में परिजनों ने जो बताया उसी के अनुसार रिपोर्ट दर्ज की गई और आरोपियों के ख़िलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराएं भी बढ़ाई गईं."

एसपी ने बताया कि अभियुक्तों का चालान कर दिया गया है. परिवार की सुरक्षा के लिए घर के पास ही पुलिस भी तैनात कर दी गई है.

नवागत थानाध्यक्ष सीवी सिंह ने बताया कि मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग डैथ (लटककर मौत) आया है.

रात डेढ़ बजे अंतिम संस्कार करवाने का आरोप पर पुलिस का इकार

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मृतका के शव को 24 अगस्त की शाम करीब चार बजे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

रीना देवी कहती हैं, "मेरी बेटी का पोस्टमार्टम रात तक हुआ और फिर देर रात क़रीब डेढ़ बजे जबरन उसका अंतिम संस्कार कराया गया."

हालांकि, रीना देवी के इस आरोप पर संभल पुलिस ने मीडिया को एक बयान जारी कर उसका खंडन किया है.

पुलिस के इस बयान में कहा गया है -"मृतका के शव का अंतिम संस्कार परिजनों और गांववालों ने अपनी इच्छा से किया. जबरदस्ती रात में अंतिम संस्कार का आरोप निराधार है. चिता के आसपास भी कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था."

मृतका के गांव के लोग

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क्या कहते हैं गांव के लोग?

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गांव में जाटव, गुर्जर, भुर्जी समाज सहित कई अन्य बिरादरियों के लोग रहते हैं. मृतका के घर से आरोपियों के घर की छत भी मिली हुई है.

अभियुक्तों के घर पर हमें कोई नहीं दिखा. ये लोग की खेती-किसानी का काम है और आर्थिक रूप से बेहतर बताए जाते हैं.

इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान मुन्ने सिंह भी काफी आहत दिखे.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "गांव में 1526 वोट हैं. यहां कभी ऐसा कोई मामला नहीं हुआ, लेकिन बिटिया की मौत का बहुत अफ़सोस है. मेरे पास भी ये मामला आया था, लेकिन मैं इतने बड़े मामले में क्या कर सकता था."

बिटिया की मौत के लिए ज़िम्मेदारी किसकी बनती है, इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं, "देखिये सतपाल के घर में सोवेंद्र आकर रह रहा था. वह बहजोइ का रहने वाला है, उसके रिश्तेदारों के नाम वहां के कुछ थाने-तहसील में चल रहे थे, इसलिए वह यहां आकर रह रहा था."

मृतका के परिवार के बाहर की तस्वीर

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पहले रोटी को मशक्कत अब इंसाफ़ के लिए होगी मेहनत

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कुढ़ फतेहगढ़ से मृतका के गांव जाने वाला मार्ग ख़ूब हरा भरा है. सड़कें भी शानदार बनी हैं, लेकिन यहां दिन में भी सड़कों पर लोगों की कम ही आवाजाही दिखती है. गांव पहुंचते-पहुंचते रास्ता भी कुछ संकरा होता जाता है. बाद में गांव की आबादी शुरू होने के बाद एक तिराहे पर बाईं ओर एक संकरी गली के छोर पर मृतका का घर है.

सबसे बाहर एक छोटा सा चबूतरा, दरवाज़े से भीतर घुसे तो एक छोटा सा आंगन दिखता है जहां दाईं ओर एक हैंडपंप और धुलने के लिए कुछ बर्तन दिखाई देते हैं. चटाई बिछाकर जमीन पर आस पड़ोस और रिश्तेदार कुछ महिलाएं बैठी हैं.

रीना देवी का कहना है कि पहले रोटी के लिए मशक्कत होती थी, लेकिन अब इंसाफ के लिए भी मेहनत करनी होगी. हालांकि, रीना देवी ने ये भी बताया कि शुक्रवार को उनके घर पहुंचे डीएम ने उनकी कई तरह से मदद का आश्वासन दिया है.

मृतका के घर के बाहर बैठे लोग

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क्या कहते हैं तीन सगे भाइयों के रिश्तेदार

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इस मामले में अभियुक्त तीन सगे भाइयों के एक रिश्तेदार अपना फोटो नहीं खिंचवाने और नाम नहीं छापने की शर्त पर बात करने को तैयार हुए.

उन्होंने नाबालिग़ की मौत पर अफसोस जताया पर ये भी कहा कि जिन तीन सगे भाइयों पर ये आरोप है उनमें एक भाई विपिन तो घटना वाले दिन गांव में था ही नहीं.

'वह बाहर था. साहब कुछ लोग लड़की के घरवालों को उल्टी-सीधी राय भी दे रहे हैं,'

हालांकि एक पुलिस अधिकारी ख़ुद भी इस बात का दावा करते हैं कि नाबालिग़ की मौत वाले दिन दो भाइयों की लोकेशन भी गांव में नहीं मिली है, फिर भी जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी.

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