बिलकिस बानो बोलीं- "मुझे अकेला छोड़ दें", दोषियों के स्वागत की ख़बर से स्तब्ध है परिवार- प्रेस रिव्यू

बिलकिस बानो

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गुजरात में 2002 के दंगों में बिलकिस बानो नाम की मुस्लिम महिला से गैंग रेप के सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया है. अख़बारों में इस ख़बर की काफ़ी चर्चा है.

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा है कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की 76वीं वर्षगांठ पर लाल क़िले से देश को संबोधित करते हुए कहा था कि नारी का अपमान नहीं होना चाहिए, दूसरी तरफ़ उसी दिन गुजरात की बीजेपी सरकार ने सभी दोषियों को रिहा करने का फ़ैसला किया.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से बिलकिस बानो के पति ने गैंग रेप के दोषियों की रिहाई पर बात की है.

बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल ने अख़बार से कहा है कि पहले उनकी पत्नी को भरोसा नहीं हुआ कि ऐसा हुआ है. रसूल ने कहा कि कुछ देर बाद बिलकिस रोने लगीं और फिर ख़ामोश हो गईं. याकूब रसूल की प्रतिक्रिया को इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर जगह दी है.

इंडियन एक्सप्रेस ने बिलकिस से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ''मुझे अकेला छोड़ दें. मैंने अपनी बेटी सालेहा की आत्मा के लिए दुआ की है.''

बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल ने कहा, ''हमें जिसे हालत में छोड़ा गया है, उसमें कुछ भी महसूस करने की शक्ति नहीं बची है.''

2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंग रेप और उनके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या के मामले 2008 में 11 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा मिली थी. इन 14 सदस्यों में बिलकिस बानो की तीन साल की बेटी भी थी. अब गुजरात के एक पैनल ने इन्हें सज़ा में छूट दे दी है.

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याकूब रसूल ने कहा, ''जिस लड़ाई को हम वर्षों से लड़ रहे थे, वह एक क्षण में बिखर गई. अदालत की ओर से दी गई उम्र क़ैद की सज़ा को मनमानी तरीक़े से कम कर दिया गया. मैंने सज़ा कम करने की इस प्रक्रिया के बारे में आज तक सुना भी नहीं था.'' याकूब रसूल गुजरात में दाहोद के देवगढ़ बारिया में रहते हैं.

बिलकिस बानो अभी 41 साल की हैं. जब उनके साथ गैंग रेप हुआ था तब वह क़रीब 20 साल की रही होंगी.

11 दोषियों की रिहाई के बाद उन्हें फूल माला और मिठाई से स्वागत करने पर रसूल ने कहा कि अभी बिलकिस किसी से भी बात करने की स्थिति में नहीं है. हमें पता है कि सभी दोषी अपने घर पहुँच गए हैं. इन्हें परोल पर भी छोड़ा गया था. ऐसा कई बार हुआ. लेकिन हमें यह उम्मीद नहीं थी कि इस तरह से छोड़ दिया जाएगा.''

रसूल कहते हैं, ''2002 में जो कुछ हुआ वह भयावह था. बिलकिस के साथ जो बर्बरता हुई वह अकल्पनीय थी. उसने अपनी बेटी की हत्या अपनी आँखों के सामने देखी. एक माँ, एक महिला और एक इंसान के रूप में उसने सारी बर्बरता झेली. इससे बुरा और क्या हो सकता है?''

उन्होंने कहा, ''अब हम यही चाहते हैं कि हमें अकेला छोड़ दीजिए. हमें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है लेकिन अब कुछ करने की हिम्मत और वक़्त नहीं है.''

जेल एडवाइज़री कमिटी के प्रमुख और पंचमहल के डीएम सुजल मायात्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सज़ा में छूट का फ़ैसला सर्वसम्मति से लिया गया है.

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उन्होंने कहा, ''उम्र क़ैद की सज़ा में दोषियों ने 14 साल की क़ैद काट ली है. इनके आवेदन तीन महीने पहले आए थे. किसी अन्य केस की तरह सज़ा में छूट और वक़्त से पहले रिहाई के आवेदन को इस मामले में भी विचार किया गया. क़ैदियों का जेल में कैसा व्यवहार होता है और अन्य आचरणों के आधार पर फ़ैसला लिया जाता है. इनकी सज़ा में छूट की सिफ़ारिश राज्य सरकार के पास भेजी गई थी. हमने सोमवार को इन्हें रिहा करने का आदेश मिला था.''

नियमों के अनुसार, जेल एडवाइज़री कमिटी यानी जेएसी में आठ सदस्य होते हैं. जेएसी का प्रमुख ज़िले का डीएम होता है. गुजरात में दाहोद ज़िले के लिमखेड़ा तालुका में तीन मार्च, 2002 को बिलकिस बानो के साथ गैंग रेप हुआ था. इसी दिन उनके परिवार के 14 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. इनमें उनकी तीन साल की बेटी भी थीं. मारे गए लोगों में से छह लोगों का शव कभी नहीं मिला.

2004 में सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले की सुनवाई और जाँच को गुजरात से महाराष्ट्र ट्रांसफर करने का आदेश दिया था. बिलकिस बानो ने गुजरात में अपनी जान का ख़तरा बताया था. 21 जनवरी, 2008 को मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 13 लोगों को दोषी ठहराया था और इनमें से 11 को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. तीन साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस सज़ा पर मुहर लगा दी थी.

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए मुआवज़ा देने का आदेश दिया था. गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो को सरकारी नौकरी भी देने का आदेश दिया था. याकूब रसूल कहते हैं कि गुजरात सरकार ने 50 लाख रुपए का मुआवज़ा दे दिया था और चपरासी की नौकरी का भी ऑफर दिया था. लेकिन बिलकिस बानो ने कहा था कि नौकरी उनके पति को मिलनी चाहिए. राज्य सरकार बिलकिस के इस आवेदन पर विचार कर रही है.

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रेप के दोषी ने क्या कहा?

हिन्दी अख़बार दैनिक भास्कर ने अपने गुजरात संस्करण में पहले पन्ने पर बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए 11 लोगों की रिहाई की ख़बर पहले पन्ने पर लगाई है.

अख़बार ने लिखा है कि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने गुजरात सरकार के फ़ेसले की आलोचना की है. दैनिक भास्कर ने लिखा है कि गुजरात सरकार की माफ़ी नीति के तहत 15 अगस्त को जसवंत नाई, गोविंद नाई, शैलेश भट्ट, राधेश्याम शाह, विपिन जोशी, केशरभाई वोहानिया, प्रदीप मोढ़डिया, बाकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट और रमेश चांदना को रिहा किया गया.

सभी दोषी 14 साल से अधिक सज़ा काट चुके हैं. दैनिक भास्कर के अनुसार, नियमों के अनुसार, उम्र क़ैद की सज़ा पाए क़ैदियों को 14 साल की सज़ा पूरी होने पर सरकार सज़ा माफ़ कर रिहा कर सकती है. राधेश्याम शाह ने सज़ा माफ़ी की गुहार लगाई थी. 2002 में पाँच महीने की गर्भवती 21 वर्षीया बिलकिस बानो से 11 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था. दैनिक भास्कर के अनुसार, शैलेश भट्ट ने कहा कि मैं सत्तारूढ़ भाजपा का स्थानीय पदाधिकारी था, मुझे राजनीतिक साज़िश के तहत फंसाया गया.

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पीएम मोदी पर निशाना

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने बिलकिस बानों के साथ हुए गैंगरेप के दोषियों को रिहा करने की ख़बर पहले पन्ने की बॉटम ख़बर बनाई है. दैनिक जागरण ने विपक्षी पार्टियों की प्रतिक्रिया को इस ख़बर में जगह दी है.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सभी दोषियों के रिहा करने पर विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि बीजेपी के शासन में नए भारत की असली चेहरा यही है. स्वतंत्रता दिवस पर नारी शक्ति पर पीएम के भाषण के कुछ ही देर बाद इन दोषियों की रिहाई पर विपक्षी दलों ने कहा कि बीजेपी राज में नए भारत का यही असली चेहरा है.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात सरकार ने इस रिहाई का बचाव करते हुए कहा है कि इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है.

क़ैदियों को साल 1992 की माफ़ी नीति के तहत रिहा किया गया है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पीएम मोदी यह बताएं कि जब वह महिलाओं की सुरक्षा, आदर और सशक्तीकरण की बात करते हैं तो क्या वह ख़ुद इन बातों में भरोसा करते हैं.

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