टोमेटो फ्लू : केरल से शुरू हुई बीमारी से जुड़े 8 सवालों के जवाब

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- Author, प्रेरणा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पहली बार में लग सकता है कि ये टमाटर से होने वाली कोई बीमारी है लेकिन विडंबना ये है कि इस फ़्लू का मंडी से लेकर आपके फ्रिज में नज़र आने वाले टमाटर से कोई लेना देना नहीं है.
6 मई, 2022 - केरल के कोल्लम ज़िले में टोमेटो फ़्लू का पहला मामला सामने आया.
26 जुलाई, 2022 - केरल में पांच साल से कम उम्र वाले कुल 82 बच्चों को टोमेटो फ़्लू होने की पुष्टि.
24 अगस्त, 2022 - देश में टोमेटो फ़्लू के 100 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं.
केरल के अलावा अब तक ओडिशा, तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्यों में टोमेटो फ़्लू के केस सामने आए हैं.
केरल के बाद सबसे अधिक मामले फ़िलहाल ओडिशा में रिपोर्ट हुई हैं, जहां कुल 26 बच्चों में इस फ़्लू की पुष्टि की गई है.
ये सभी बच्चे 1 से 9 साल की उम्र के हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को ''टोमेटो फ़्लू'' से संबंधित एडवाइज़री जारी कर दी है. इसमें बीमारी, इसके लक्षण और बचाव संबंधित कई जानकारियां दी गई हैं.
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बीबीसी ने तिरुवनंतपुरम के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कम्युनिटी मेडिसीन के असोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर अनीश टीएस से इस विषय में बातचीत की है.
नीचे दिए गए सवाल और जवाब इसी बातचीत और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी एडवाइज़री पर आधारित है.

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पहला सवाल - नाम में ''टोमेटो'' क्यों?

इस फ़्लू में शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टमाटर जैसे सुर्ख लाल रंग के फोड़े उभरने लगते हैं.
शुरुआत में इन फफोलों का आकार छोटा होता है लेकिन धीरे-धीरे ये बड़े होने लगते हैं और बिल्कुल छोटे लाल टमाटर की तरह नज़र आते हैं.
यही वजह है कि केरल के कुछ स्थानीय लोगों ने इस बीमारी को ''तक्काली पनी'' का नाम दे दिया. ''तक्काली पनी'' एक मलयाली शब्द है, जिसका अंग्रेज़ी में अर्थ होता है ''टोमेटो फ़्लू''.
केरल में किसी भी नई बीमारी को नाम देने का एक पुराना चलन है.
हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसे हाथ, पैर और मुंह की बीमारी (HFMD) कहता है.
''टोमेटो फ़्लू'' बस आम बोल चाल की भाषा में दिया गया नाम है, जिसे जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर जैकब जॉन जैसे विशेषज्ञ नहीं पसंद करते.
डॉ जैकब जॉन और उनके जैसे दूसरे लोगों का मानना है कि ये नाम भ्रमित करने वाले हैं. हमें किसी भी बीमारी को टोमेटो या ब्रिंजल फ़्लू जैसे नाम नहीं देने चाहिए.

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दूसरा सवाल - ''टोमेटो फ़्लू'' क्या है?

''टोमेटो फ़्लू'' किसी अलग या नए तरह की बीमारी नहीं है, बल्कि ये एक हाथ, पैर और मुंह की बीमारी है.
इसे अंग्रेज़ी में HFMD यानी हैंड, फुट, माउथ डिजीज कहते हैं. एचएफएमडी कॉक्सैकीवायरस और एंटरोवायरस, इन दो वायरसों के समूहों के कारण होती है.
आमतौर पर छोटे बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते हैं.
ये कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन वायरल बीमारियों में हमेशा वायरस के म्यूटेशन की संभावना होती है, यानी वायसर का रूप बदलता है.
वायरस म्यूटेट करते हैं तो ख़तरा भी बढ़ता है. जैसे चीन और ताइवान में वायरस म्यूटेशन के कारण कई लोगों की जान चली गई थी.
हालांकि भारत में अब तक ''टोमेटो फ़्लू'' से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन डॉक्टर और वायरोलॉजिस्ट इस पर नज़र बनाए हुए हैं.

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तीसरा सवाल: क्या हैं लक्षण?

इसके लक्षण भी बाकी वायरल संक्रमण से मिलते जुलते हैं.
शुरुआत हल्के बुख़ार से होती है, फिर भूख नहीं लगना, थकान महसूस करना और गले में खराश जैसे लक्षण सामने आने लगते हैं.
बुख़ार के दो तीन दिनों के बाद आमतौर पर जीभ, मसूढ़े, गालों के अंदर, हथेली और एड़ियों पर छोटे-छोटे लाल छाले या फफोले निकलते हैं.
ये फफोले मंकीवायरस में होने वाले रैशेज़ जैसे ही नज़र आते हैं.

चौथा सवाल: कैसे होता है संक्रमण?

नज़दीकी संपर्क, गंदगी या फिर बिना साफ सफाई के कोई भी चीज़ मुंह के अंदर डाल लेने, दूसरे के इस्तेमाल किए कपड़े पहनने आदि से ये बीमारी हो सकती है.
ज़्यादा छोटे बच्चों में गंदी नैपी के इस्तेमाल से भी ये संक्रमण फैल सकता है.

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पाँचवाँ सवालः जाँच कैसे होती है और इलाज क्या है?

टोमेटो फ़्लू के लक्षण भी डेंगू, चिकनगुनिया से मिलते जुलते हैं इसलिए डॉक्टर मॉलिक्यूलर और सेरोलॉजिकल टेस्ट करने के लिए देते हैं.
अगर जाँच में डेंगू , चिकनगुनिया, ज़ीका वायरस, ज़ोस्टर वायरस या हर्पीस में से कोई भी बीमारी नहीं निकलती है, तब डॉक्टर मरीज़ में टोमेटो फ़्लू की पुष्टि करते हैं.
फिलहाल इसका कोई खास एंटी वायरल इलाज नहीं है.
डॉक्टर सहायक उपचारों का ही सहारा ले रहे हैं. जैसे बुखार के लिए एंटीबॉयटिक्स, रैशेज़ में खुजली या खरोंच के लिए एंटीसेप्टिक या एंटीबायोटिक क्रीम का इस्तेमाल.
इसके अलावा वायरस की पहचान होते ही बच्चे को दस दिनों के लिए क्वारंटाइन कर देने की सलाह दी जाती है.
वायरस का संक्रमण तेज़ी से फैलता है इसलिए घर के बाकी सदस्यों से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की ज़रूरत है.
खाने-पीने के अलग बर्तन, साफ बिस्तर, कपड़े आदि का ध्यान रखना आवश्यक है.
कई बार मुँह के अंदर फोड़े निकल जाने के कारण खाने में दिक्कत होती है. इस सूरत में बच्चे को ज़्यादा तरल खाना देना चाहिए.

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छठा सवाल - सबसे पहले केरल में ही क्यों आते हैं नए वायरस के मामले?

चाहे देश में कोरोना का पहला मामला हो, या मंकीवायरस, या नीपाह वायरस या अब टोमेटो फ्लू - शुरुआत केरल से ही होती है. ऐसा क्यों है?
डॉक्टर अनीश कहते हैं, ''दूसरे प्रदेशों को तुलना में केरल के लोग ज़्यादा जागरूक हैं. वो बीमारियों की जांच कराते हैं और फिर इनका पता भी चल जाता है.
हर साल केरल में सबसे अधिक डेंगू के मामले रिपोर्ट होते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि यहां के लोगों की इम्युनिटी कमज़ोर है. वजह है लोगों का ज़्यादा जागरूक होना और अस्पतालों की तरफ़ उनका रुख़ करना. कोरोनाकाल में भी यही हुआ.''
दूसरी वजह यहां की जलवायु भी हो सकती है. केरल का उष्णकटिबंधीय जलवायु (TROPICAL CLIMATE) वायरस और उसके संक्रमण के लिए काफी मुनासिब है.''
तीसरी और चौथी वजह है यहां का जनसंख्या घनत्व और माइग्रेशन. केरल के लोग बड़ी तादाद में विदेश जाते हैं. ''

सातवाँ सवाल: क्या वयस्कों को भी हो सकता है ''टोमेटो फ़्लू''?

इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता. एचएफएमडी से बच्चों को ज़्यादा ख़तरा है लेकिन संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने से वयस्कों को भी ये बीमारी हो सकती है.
बड़ों में अगर इस बीमारी से जुड़े कोई भी लक्षण नज़र आते हैं तो इसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत है.

आठवाँ सवाल: क्या विदेशों में भी ''टोमेटो फ़्लू'' के मामले सामने आए हैं?

अमेरिका की सरकारी संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक़ अमेरिका में भी ये बीमारी गरमी के मौसम में बहुत आम है.
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