कोविड: ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.4 और BA.5 कितने ख़तरनाक हैं?

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बीते दो साल से कोरोना की एक लहर थमती नहीं है कि दूसरी लहर हिलोरें मारने लगती हैं. ये वायरस अपना रूप यानी वेरिएंट इतनी बार बदल चुका है कि इसका लगातार नामकरण किया जा रहा है. मौजूदा दौर में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट का ख़तरा बना हुआ है.
दरअसल, कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से ही कोविड में म्यूटेशन और शेप-शिफ्टिंग होता देखा गया है. वायरस के नए जेनेटिक वेरिएशन जो बार-बार सामने आते हैं उन्हें वेरिएंट्स कहा जाता है.
कोरोना के कई बड़े वेरिएंट पहले ही सामने आ चुके हैं जैसे अल्फा और डेल्टा. डेल्टा की वजह से काफ़ी तबाही मचते देखी गई थी, भारत में भी इस वेरिएंट ने कहर मचाया था.
हाल के दौर में BA.4 और BA.5 के बारे में एक्सपर्ट चिंतित हैं. ओमिक्रॉन वेरिएंट से मिलते जुलते ये वेरिएंट्स हैं. डब्ल्यूएचओ ने मार्च में इन्हें मॉनिटरिंग लिस्ट में जोड़ा था और यूरोप में 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' बताया गया है.
ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.4 और BA.5 कहां फैल रहे हैं?
सब वेरिएंट्स BA.4 और BA.5 साल की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में पाए गए थे. अब ये दूसरे वेरिएंट की तुलना में तेज़ी से फैलता हुआ दिख रहा है. अधिकांश यूरोपीय देशों में ये देखने को मिला है. पुर्तगाल में BA.5 हावी है.
अमेरिका में अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों नए सब वेरिएंट्स का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. ब्रिटेन में भी इन दोनों की वजह से कोरोना संक्रमण के आंकड़ों में वृद्धि की शुरुआत देखी जा सकती है. ऑस्ट्रेलिया में भी इसके मामले मिले हैं. भारत में भी BA.4 और BA.5 के मामले सामने आए हैं.
BA.4 और BA.5 कितना ख़तरनाक हैं?
फिलहाल, एक्सपर्ट्स इस बात को पुख्ता तौर पर नहीं बता पा रहे हैं कि ये सब वेरिएंट्स अलग-अलग देशों को कैसे प्रभावित करेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन का BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट्स दूसरी तरह के कोविड से अधिक घातक नहीं है.
दुनियाभर में बहुत सारे लोगों में इंफेक्शन के बाद इम्युनिटी डेवलप हुई है साथ ही साथ वैक्सीनेशन की वजह से भी, इस बीमारी का ख़तरा पहले से कम हुआ है. लेकिन नया सब वेरिएंट्स अधिक तेज़ी से फैलता दिखाई दे रहा है. इसकी एक वजह ये भी है कि लोगों में प्रतिरक्षा कमज़ोर हो रही है.
बहुत सारे देशों ने कोरोना से जुड़ी पाबंदियां हटा ली हैं, मतलब ये है कि लोग एक दूसरे से ज़्यादा मिलजुल रहे हैं और इससे वायरस के तेजी से फैलने की आशंका बढ़ रही है. ऐसा बताया जा रहा है कि BA.4 और BA.5 से लोग तब भी संक्रमित हो सकते हैं जब वो पहले से ही ओमिक्रॉन के किसी दूसरे वेरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं.
नए संक्रमण की लहर से अस्पतालों में लोगों की संख्या बढ़ सकती है और मौतों का आंकड़ा भी बढ़ सकता है.
BA.4 और BA.5 से बचाव कैसे कर सकते हैं?
दूसरे कोविड वेरिएंट्स की ही तरह गंभीर बीमारी वाले लोगों में और बुज़ुर्गों में संक्रमण तेज़ी से फैलने की आशंका ज़्यादा है, तो ऐसे लोगों के लिए बचाव सबसे ज़रूरी है. साथ ही वैक्सीनेशन से भले ही पूरी तरह से संक्रमण से सुरक्षा न मिले लेकिन वैक्सीनेशन की वजह से इस वायरस से लड़ने में सबसे ज़्यादा मदद मिलती है.
डेल्टा, अल्फा, बीटा, गामा वेरिएंट के वक्त में भी वैक्सीनेशन ने लोगों को गंभीर तौर पर बीमार पड़ने से बचाया था. ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना की रोकथाम के लिए पूरी तरह से वैक्सीनेटेड होना ज़रूरी है.
बीबीसी की ब्राज़ील सेवा से बात करते हुए ब्राज़ीलियन सोसाइटी ऑफ इम्युनाइजेशन के डायरेक्टर डॉक्टर कफोरी ने कहा, ''वैक्सीन सामान्य लक्षण वाले, हल्के लक्षण वाले या बिना लक्षण वाले कोरोना के मामलों के मुकाबले गंभीर मामलों में ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती है.''
इसका मतलब ये हुआ कि टीकों का मुख्य लक्ष्य इंफेक्शन को रोकना नहीं बल्कि शरीर में कोरोना संक्रमण से हुए नुक़सान को कम करना है.
फ्लू को रोकने वाले टीके भी ऐसे ही काम करते हैं, जिनका दशकों से इस्तेमाल हो रहा है. कई देशों में लोग हर साल ये वैक्सीन लेते हैं.
ये वैक्सीन संक्रमण को रोकती नहीं है, लेकिन ये बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों या किसी ना किसी बीमारी से जूझते लोगों में संक्रमण से हो सकने वाली गंभीरता को कम करती है.

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डेल्टा वेरिएंट से दुनियाभर में हुई थी मौतें
इससे पहले भारत समेत दुनियाभर में डेल्टा वेरिएंट ने कहर मचाया था. डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट से ही जुड़ा है, जिसकी सबसे पहले भारत में ही पहचान की गई थी. डेल्टा वेरिएंट क्या है?
भारत में डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले पाया गया था, जिसे वैज्ञानिक तौर पर B.1.617.2 कहा गया.
यही डेल्टा वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण बना था. माइक्रो बायोलॉजिस्ट के मुताबिक़ कोविड-19 एक आरएनए वायरस है, लिहाज़ा इसकी म्यूटेट करने की क्षमता बहुत ज़्यादा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, 'डेल्टा वेरिएंट में हमने देखा कि वो ना सिर्फ़ तेज़ी से फैलता है, बल्कि वो इम्युनिटी को भी चकमा दे सकता है.' भारत सरकार के मुताबिक डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला यूरोप में देखने को मिला था.
डेल्टा वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण बना था. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे तेज़ी से फैलने वाला और बीमारी को गंभीर बनाने वाला बताया. दूसरी लहर में भारत ने कोरोना सा सबसे भयानक और घातक रूप देखा था.
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