राहुल और प्रियंका गांधी के विरोध-प्रदर्शन में कैसा था माहौल

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कांग्रेस दफ़्तर की शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने क़िलेबंदी कर दी थी.
कांग्रेस मुख्यालय की तरफ़ जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी और दिल्ली पुलिस के जवान उस तरफ़ जाने वालों को रोक रहे थे.
दोपहर क़रीब ढाई बजे काली टी-शर्ट पहने युवाओं का एक दल, जिसमें कई ने अपने कुर्तों और शर्ट के ऊपर ही काली टी-शर्ट पहनी हुई थी, एक बस की तरफ़ बढ़ रहा था. कांग्रेस के ये युवा कार्यकर्ता राजस्थान के धौलपुर से महंगाई के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे और अब वापस लौटने की जल्दी में थे.
क़रीब एक घंटा पहले दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और कई अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को धक्का-मुक्की के बाद गिरफ़्तार किया था.
काले रंग का सलवार सूट पहने प्रियंका गांधी ज़मीन पर ही बैठ गईं थीं. उनके भाई राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य सांसदों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर पार्टी कार्यालय से क़रीब 20 किलोमीटर दूर किंग्सवे कैंप थाने में पहुँचा दिया था.
बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं के पाँच अगस्त को काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने पर सवाल उठाए.
गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के दूसरे नेताओं ने आरोप लगाया कि इस दिन राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन हुआ था और कांग्रेस 'ये छुपा संदेश देना चाहती है कि हम रामजन्मभूमि के शिलान्यास का विरोध करते हैं.'
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस पर पलटवार किया और कहा, "महंगाई की मार के ख़िलाफ़ लड़ना जन अनुरागी भगवान राम का दिखाया रास्ता है."

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दिल्ली में शुक्रवार को जमकर बारिश भी हुई. दिल्ली पुलिस से टकराने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश बारिश ने ठंडा कर दिया था. नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस दफ्तर में गिने-चुने कार्यकर्ता ही थे.
इससे पहले इस 'प्रोटेस्ट' के लिए बड़ी तैयारी की गई थी. कांग्रेस दफ्तर में जहाँ भी जगह थी, वहाँ कार्यकर्ताओं के आराम करने के लिए बिस्तर बिछे थे जो बारिश में भीग रहे थे.

'लोकतंत्र के लिए काला दिन'
ये पहली बार नहीं था जब हाल के महीनों में कांग्रेस ने महंगाई और बेरोज़गारी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया हो. लेकिन इस बार कांग्रेस ने काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी काले रंग का ब्लाउज़ और काली बॉर्डर वाली साड़ी पहनकर प्रदर्शन करने निकलीं. राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं ने काली टी-शर्ट, कमीज़ या कुर्ते पहने थे.
कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सरकार पर संसद के भीतर अपनी आवाज़ दबाने के आरोप लगाए हैं. काली पोशाक पहनकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता ये संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि भारत का 'लोकतंत्र ख़तरे में हैं.'
राहुल गांधी कई बार हाल ही में अपने बयानों में सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा चुके हैं.
प्रदर्शन शुरू होने के कुछ देर बाद ही कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. कांग्रेस दफ़्तर में बैठे एक बुज़ुर्ग कार्यकर्ता कहते हैं, "ये लोकतंत्र के लिए काला दिन है. प्रदर्शन करना विपक्ष का अधिकार है लेकिन ये तानाशाह सरकार विपक्ष के नेताओं को ही गिरफ्तार कर रही है. हमारी आवाज़ को हर जगह दबाया जा रहा है."

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मीडिया से शिकायत
उधर, दिल्ली के जीटीबी नगर इलाक़े में किंग्सवे पुलिस कैंप की तरफ जाने वाली सड़कों की भी बैरिकेडिंग की गई थी और थाने की तरफ़ जाने वाली सड़क को पुलिस ने रोक दिया था.
कांग्रेस कार्यकर्ता थाने के बाहर पहुँचने की नाकाम कोशिशें कर रहे थे. ये कार्यकर्ता बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से प्रदर्शन में शामिल होने आए थे.
पेशे से चित्रकार और पक्के कांग्रेसी 80 वर्षीय बादल चित्रकार ने मीडिया का ध्यान खींचने के लिए अपनी पुरानी टाटा नैनो कार में आग लगाने की कोशिश की. जब हमने उनसे पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, "मीडिया ना कांग्रेस के नेताओं को दिखाती है और ना ही उनके विचारों को लोगों तक पहुँचाती है. मैं मीडिया का ध्यान खींचने के लिए अपनी कार में आग लगा रहा हूँ ताकि हमारी बात भी लोगों तक पहुँचे."
उत्तेजित आवाज़ में वो कहते हैं, "सरकार गांधी परिवार पर ज़ुल्म कर रही है. गांधीवादी विचारधारा को समाप्त करने का प्रयास कर रही है. मैं टीवी पर राहुल गांधी की गिरफ़्तारी की ख़बर देखकर यहाँ आया हूँ."
बादल की कार इससे पहले आग पकड़ती वहाँ तैनात पुलिसकर्मियों ने आग बुझा दी. इस दौरान मीडिया के कैमरे उनकी तरफ दौड़े और रिपोर्टरों ने उनसे बात भी की.

ईडी के कार्रवाई के बाद प्रदर्शन?
बादल कहते हैं, "ये मुझसे बात तो कर रहे हैं लेकिन मुझे दिखाएंगे नहीं. पत्रकार भी महंगाई को महसूस तो कर रहे हैं लेकिन इस पर बात नहीं कर रहे."
कांग्रेस ने ये प्रदर्शन ऐसे समय में किया जब वित्तीय मामलों की जांच करने वाली एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस नेताओं पर शिकंजा कस रही है.
नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से लंबी पूछताछ की गई है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से भी ईडी ने सवाल जवाब किए हैं.
ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि अपने नेताओं पर ईडी की कार्रवाई के बाद कांग्रेस महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दा उठा रही है.
इस पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट कहते हैं, "पिछले साल भर से रिकॉर्डतोड़ महंगाई बढ़ रही है, महंगाई, बेरोज़गारी के लिए कौन ज़िम्मेदारी है? पेट्रोल, डीज़ल, गैस सबकुछ महंगा हो रहा है. सरकार जवाब देने को तैयार नहीं है. हम सिर्फ़ अपनी बात रख रहे हैं लेकिन सरकार हमें ही हर तरह से निशाना बना रही है, हमें हिरासत में ले रही है लेकिन वो अपने मक़सद में कामयाब नहीं होगी."

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क्यों नहीं जुड़ते आम लोग?
शुक्रवार को कांग्रेस ने महंगाई के ख़िलाफ़ देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था. कांग्रेस के प्रदर्शन में पार्टी के कार्यकर्ता तो थे लेकिन आम लोग नज़र नहीं आए. आम लोग कांग्रेस से क्यों नहीं जुड़ पा रहे हैं इस सवाल पर सचिन पायलट ने कुछ नहीं कहा.
बीबीसी के रेडियो पॉडकास्ट दिनभर में बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद से बात करते हुए वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राधिका रामाशेषन ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों से लोगों को जोड़ने में नाकामयाब ही रही हैं.
राधिका कहती हैं, "जब बीजेपी विपक्ष में थी दस साल तक तब वो भी महंगाई बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन करती थी लेकिन वो भी बहुत तूल नहीं पकड़ता था. जनता उससे जुड़ नहीं पाती थी. फिर जब अन्ना हज़ारे, किरण बेदी और केजरीवाल ने ये मुद्दा उठाया तब जनता इससे जुड़ी. दरअसल, राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता इतनी कम हो गई है कि जब वो महंगाई जैसे मुद्दे उठाते हैं, तब जनता को भरोसेमंद नहीं लगता.''
''महंगाई बड़ा मुद्दा है, बेरोज़गारी उससे भी बड़ा मुद्दा है लेकिन राजनीतिक दलों से लोग इन मुद्दों पर भी जुड़ नहीं पा रहे हैं. लोगों को लगता है कि दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए ये मुद्दे उठा रहे हैं. मुझे लगता है कि राजनीतिक दल इन मुद्दों से लोगों को जोड़ने में बहुत कामयाब नहीं होंगे."

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'राहुल गांधी के आरोपों में है दम'
कांग्रेस के प्रदर्शन के समय पर सवाल उठाते हुए राधिका कहती हैं, "कांग्रेस ऐसे समय पर ये मुद्दा उठा रही है, जब संसद का सत्र चल रहा है. ऐसे समय में कांग्रेस ये प्रोटेस्ट करती रहती है. पुलिस नेताओं को हिरासत में भी लेती है. इस प्रोटेस्ट में भी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया. लेकिन जनता के बीच में वो अपना संदेश बिल्कुल नहीं पहुंचा रहे हैं."
राहुल गांधी ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए कहा है कि सरकार उन्हें 'डराने की कोशिशें कर रही है लेकिन वो डरेंगे नहीं.' राहुल ने सरकार पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने के आरोप भी लगाए हैं.
राधिका मानती हैं कि इन आरोपों में बहुत हद तक दम है. वो कहती हैं, "लोकतंत्र बचने के दावे में दम है क्योंकि हमने जो संसद और संसद के बाहर दृश्य देखे हैं उनसे लग रहा है कि कहीं ना कहीं लोकतंत्र कमज़ोर तो रहा है. उदाहरण के तौर पर जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने जा रहे थे ठीक उसी समय उन्हें ईडी ने नेशनल हेराल्ड मामले में पूछताछ के लिए बुला लिया. इससे लगता है कि सरकार विपक्ष को दबाने और डराने के तरीक़े अपना रही है. ये लोकतंत्र के लिए बहुत शुभ संकेत नहीं हैं."
राधिका कहती हैं, "विपक्ष भले ही बार-बार एक ही मुद्दे पर प्रोटेस्ट कर रहा हो लेकिन ये उनका हक़ है. जिस तरह से पुलिस ने हिरासत में लिया, ख़ासकर जिस तरह का व्यवहार किया वो लोकतंत्र के लिए बहुत शुभ संकेत नहीं है. ऐसे में राहुल गांधी जब लोकतंत्र के कमज़ोर होने की बात करते हैं तो सही ही लगते हैं."

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बीजेपी ने उठाए सवाल, कांग्रेस का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ऐसे समय में प्रदर्शन कर रही है जब संसद में सत्र चल रहा है और पार्टी संसद में महंगाई पर बहस से बच रही है.
इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि कांग्रेस ने प्रोटेस्ट उसी दिन किया जिस दिन अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ था.
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अमित शाह ने कहा, "आज ही के दिन इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामजन्मभूमि का शिलान्यास किया था. साढ़े पांच सौ साल पुरानी समस्या का बहुत शांतिपूर्ण तरीके से समाधान हुआ. कांग्रेस ने आज का दिन विरोध के लिए चुना और काले कपड़े पहनकर विरोध किया. वो ये छुपा संदेश देना चाहते हैं कि हम रामजन्मभूमि के शिलान्यास का विरोध करते हैं. वो अपनी तुष्टिकरण की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं."
इस पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा, 'देशभर के गरीबों और मध्य वर्ग के ऊपर पड़ रही महँगाई की मार के खिलाफ लड़ना जन अनुरागी भगवान राम का दिखाया रास्ता है. जो महँगाई बढ़ाकर दुर्बल जन को कष्ट देता है वह भगवान राम पर वार करता है.'
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कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से आम लोगों के ना जुड़ पाने के सवाल पर हरियाणा से आए कांग्रेस के एक युवा कार्यकर्ता कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी ने हर मुद्दे का सांप्रदायिकीकरण कर दिया है. सांप्रदायिकता के आगे लोगों को मुद्दे दिख नहीं पा रहे हैं. बीजेपी महंगाई का भी सांप्रदायिकीकरण कर देगी."

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'संसद में सरकार को घेर नहीं पा रही कांग्रेस'
किंग्सवे कैंप के पास आम लोगों को कांग्रेस के प्रदर्शन के बारे में बहुत जानकारी नहीं थी. यहां ई-रिक्शा चलाने वाले एक युवक ने कहा, "महंगाई से परेशानी तो है लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध नहीं. अगर पेट्रोल दो सौ रुपए लीटर हो जाएगा तब भी मैं नरेंद्र मोदी का ही समर्थन करूंगा क्योंकि वो राष्ट्र को आगे बढ़ा रहे हैं."
राधिका रामाशेषन मानती हैं, 'कांग्रेस इस समय ना संसद के भीतर मुद्दे उठा पा रही है और ना ही संसद के बाहर लोगों को जोड़ पा रही है.'
राधिका रामाशेषन कहती हैं, "हर राजनीतिक दल को ये अधिकार है कि वो संसद और संसद के बाहर मुद्दों पर चर्चा करे. संसद में भी मुद्दे उठाते हुए अपना पक्ष आक्रामकता से रखना चाहिए लेकिन अभी कांग्रेस ये नहीं कर पा रही है. दुर्भाग्यवश कांग्रेस के पास विपक्ष में होते हुए ऐसे तेज़तर्रार वक्ता नहीं है जैसे बीजेपी के पास थे."
राधिका रामाशेषन कहती हैं, "भाजपा संसद के बाहर प्रदर्शन करती थी जो बहुत सफल नहीं होते थे लेकिन संसद के भीतर उसके पास अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे नेता थे जो अपना पक्ष बहुत प्रभावी तरीके से रखते थे. कांग्रेस की बदक़िस्मती है कि उसके पास ऐसे प्रभावी वक्ता नहीं हैं जो सरकार को एक तरह से ऐसे मुद्दों पर घेर सकें. इसी वजह से कांग्रेस संघर्ष का रास्ता अपना रही है. लेकिन ये इतना घिसा पिटा हो गया है कि अब सत्र शुरू होने से पहले ये प्रश्न उठता है कि कब कांग्रेस प्रोटेस्ट करने वाली है और कब पुलिस से उनका मुक़ाबला होने वाला है. कहीं ना कहीं इन प्रदर्शनों की गंभीरता कम नज़र आती है."
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