कर्नाटक में हिजाब विवाद फिर से गरमाया, छह लड़कियां कॉलेज से निलंबित

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक में हिजाब विवाद एक बार फिर से तूल पकड़ता हुआ दिख रहा है. इस बार दक्षिण कन्नड़ ज़िले के एक सरकारी कॉलेज में छह लड़कियों को हिजाब के कारण कॉलेज से निलंबित कर दिया गया है.
एक दूसरे कॉलेज में कुछ लड़कियों ने क्लास में दाखिल होते वक़्त हिजाब हटाने से मना किया तो उन्हें वापस घर भेज दिया गया.
दक्षिण कन्नड़ ज़िले के इस सरकारी कॉलेज में 40 मुस्लिम लड़कियां पढ़ती हैं जिनमें सिर्फ़ छह लड़कियों ने हिजाब पहना था.
जबकि कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन सब को ऐसा नहीं करने की 'पर्याप्त रूप से चेतावनी' दी थी. इस कॉलेज के कैंपस में तो हिजाब पहनने की अनुमति है लेकिन क्लासरूम, लैबोरेटरी और लाइब्रेरी में ये मना है.
कॉलेज की डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन और पुत्तुर विधानसभा सीट से एमएलए संजीत मतनडूर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हिजाब के मुद्दे पर कर्नाटक हाई कोर्ट के फ़ैसले के आधार पर राज्य सरकार ने कुछ निर्देश दिए थे. इन आदेशों का उल्लंघन करने पर उन लड़कियों को दो या तीन बार चेतावनी दी गई थी."
मेंगलुरु यूनिवर्सिटी कॉलेज का मामला
हमपनकट्टा के मेंगलुरु यूनिवर्सिटी कॉलेज में भी ऐसा ही मामला सामने आया है.
इस कॉलेज के प्रिंसिपल ने 16 लड़कियों को घर वापस जाने के लिए कह दिया क्योंकि वे एक बार फिर से हिजाब पहनकर ही गेट पर पहुंची थीं.
लड़कियों के इस समूह ने ज़िले के डिप्टी कमिश्नर से भी मुलाकात की लेकिन उन्हें कहा गया कि सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है.
मेंगलुरु यूनिवर्सिटी कॉलेज में मुस्लिम समाज की 43 लड़कियों में से 13 ने क्लास में हिस्सा नहीं लिया.
शुक्रवार सुबह डिप्टी कमिश्नर ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, कॉलेज और पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक की. मीटिंग में ये फ़ैसला किया गया कि छात्राओं की काउंसिलिंग के बाद उन्हें 'मेमो' ज़ारी किया जाएगा.
मेंगलुरु यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पीएस यदापादिताया ने बीबीसी हिंदी को बताया, "परीक्षा में शामिल होने के लिए क्लास में कम से कम 75 फ़ीसदी उपस्थिति ज़रूरी होती है और छात्रों को इस बारे में आगाह करना हमारी ज़िम्मेदारी है. ये फ़ैसला किया गया था कि पहले उन्हें काउंसिलिंग दी जाएगी और फिर भी नियमों में पालन करने में नाकाम रहे तो हम उन्हें मेमो ज़ारी करेंगे. अगर छात्र क्लास में हिस्सा नहीं लेंगे तो इससे पढ़ने-लिखने का माहौल डिस्टर्ब होगा."
यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट ने पिछले महीने फ़ैसला किया था कि 15 मार्च के हाई कोर्ट के फ़ैसले का अध्ययन करने के बाद डिग्री कोर्स की छात्राओं के लिए भी राज्य सरकार का आदेश लागू किया जाएगा.
दिक्कत कहां है?
उडुपी ज़िले के एक सरकारी कॉलेज में छह लड़कियों को हिजाब पहनकर क्लास में शामिल होने से रोका गया जिसके बाद राज्य के कई हिस्सों में हिजाब को लेकर तनाव का माहौल रहा.
मामला कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंचा. चीफ़ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने अपने फ़ैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.
हिजाब को लेकर कुछ लड़कियों और कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के बीच हुए विवाद में छात्रों का एक धड़ा भी कूद पड़ा था. छात्रों का समूह कॉलेज कैंपस में भगवा रंग की शॉल और पगड़ी पहनकर दिखा.
राज्य के कुछ हिस्सों में प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी. हिंसा पर काबू पाने के लिए कुछ जगहों पर पुलिस को अश्रु गैस और लाठी चार्ज का सहारा लेना पड़ा.
उप्पिनांगाडी में छात्रों के समूह ने प्रिंसिपल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया. इन छात्रों का कहना था कि केवल हिजाब को लेकर लड़कियों को चेतावनी दी जा रही है.
हालांकि लड़कियों पर हिजाब पहनने का जो आरोप लगाया जा रहा है, उसके कई पहलू हैं जिस पर तस्वीर साफ़ नहीं है.
क्या लड़कियों ने क्लासरूम में हिजाब पहनी या फिर ब्रेक के दौरान हिजाब लगाया. कॉलेज के प्रिंसिपल शेखर एमडी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "लड़कियों ने ब्रेक के दौरान हिजाब पहनी थी."
हिजाब विवाद की शुरुआत
लेकिन छात्र संगठन कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया से जुड़े सादिक जराथर का कहना है, "लड़कियों ने क्लास ख़त्म होने के बाद चेंजिंग रूम में जाकर हिजाब पहना और फिर जब वे अपना बैग लाने के लिए क्लासरूम गईं तो लड़कों के एक समूह ने वहीं पर विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने लड़कियों के क्लासरूम में हिजाब पहनने पर एतराज किया."
कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया के प्रेसिडेंट अथुवुल्ला पुंजलकट्टे ने बीबीसी हिंदी से कहा, "अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने ये पूरा मुद्दा उठाया क्योंकि वे भी नहीं चाहते थे कि लड़कियां कैंपस में हिजाब पहनें. क्लासरूम में लेक्चर के दौरान हिजाब न पहनने के नियम का लड़कियां पालन कर रही थीं."
हालांकि एबीवीपी ने इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है. एबीवीपी के पूर्व राज्य सचिव प्रतीक मली कहते हैं, "एबीवीपी कभी भी इस मुद्दे में शामिल नहीं रहा है."
एबीवीपी के राज्य सचिव मणिकांत कालासा ने बीबीसी हिंदी से कहा, "यहां कॉलेजों में ये हो रहा है कि लड़कियां मांग कर रही है कि उन्हें क्लासरूम में हिजाब पहनने दिया जाए. चूंकि इसकी इजाजत नहीं है इसलिए जैसे ही लेक्चरर अपना लेक्चर ख़त्म करके क्लास से निकलते हैं, लड़कियां हिजाब पहन लेती हैं. जब अगली क्लास शुरू होती है और लेक्चरर क्लासरूम में दाखिल होते हैं, वे हिजाब हटा लेती हैं."
मणिकांत कहते हैं, "कुछ और छात्रों ने भी इस तौर-तरीके पर एतराज जताया था. यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट का फ़ैसला पूरी तरह से स्पष्ट है. क्लासरूम के भीतर हिजाब की बिलकुल ही इजाजत नहीं है."
मीडिया पर हमला
कर्नाटक के तटीय इलाकों में जब से हिजाब के मुद्दे पर माहौल गरमाना शुरू हुआ है, छात्रों का एक गुट मीडिया को लेकर भी नाराज़ रहा है. कन्नड़ टेलीविज़न चैनलों के दो पत्रकारों के साथ कॉलेज के ऑफ़िस में कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई और उनके मोबाइल फ़ोन से वीडियो जबरन डिलीट कराए गए.
एक राष्ट्रीय स्तर के न्यूज़ नेटवर्क के स्थानीय चैनल के पत्रकार अजित कुमार बताते हैं, "मैं प्रिंसिपल से मिला था. उनकी बाइट रिकॉर्ड की. प्रिंसिपल के चेंबर से बाहर निकलने के बाद मैं कैंपस का सामान्य विजुअल रिकॉर्ड कर रहा था तभी अचानक छात्रों का एक ग्रुप सामने आया और मुझे घेर लिया. वे मेरे साथ धक्का-मुक्की करने लगे. मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास प्रिंसिपल का परमिशन है. ये ग्रुप हिजाब पहने वाली लड़कियों के समर्थकों का था. उन्होंने मुझसे कहा कि हम देखेंगे कि आप इसकी न्यूज़ रिपोर्ट कैसे बनाएंगे."
"वे मुझे धक्का देकर कॉलेज के एक ऑफ़िस रूम में ले गए. वहां मेरे मोबाइल फोन से जबरन वीडियो फुटेज डिलीट कराए गए. मेरे एक अन्य सहयोगी पत्रकार के साथ भी उन्होंने ऐसा ही बर्ताव किया."
अजित कुमार ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी.
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