जिग्नेश मेवाणी को गिरफ्तार करवाने वाले असम के अरूप कुमार डे कौन हैं?

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
असम पुलिस ने बुधवार की देर रात गुजरात के वडगाम से विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी को पालनपुर सर्किट हाउस से गिरफ्तार कर लिया है.
दरअसल, विधायक जिग्नेश मेवाणी की ये गिरफ्तारी उनके 18 अप्रैल के दो ट्वीटस की वजह से हुई है जिनमें उन्होंने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नाथूराम गोडसे का समर्थक' बताया था.
हालांकि मेवाणी के ट्विटर अकाउंट से पता चलता है कि 18 अप्रैल को उनके द्वारा पोस्ट किए गए दो ट्वीट पर 'कानूनी मांग' का हवाला देते हुए ट्वीटर ने रोक लगा दी हैं.
इसका मतलब ये हुआ कि मेवाणी के ट्वीटस फिलहाल नहीं देखे जा सकते हैं. इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा तत्परता से की गई कार्रवाई और शिकायतकर्ता की भूमिका की काफी चर्चा हो रही है.
विधायक मेवाणी के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने वाले अरूप कुमार डे बोडोलैंड इलाके में भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं.
फिलहाल वे 40 सीटों वाली बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के कार्यकारी सदस्य हैं.
बीजेपी नेता अरूप कुमार डे ने 19 अप्रैल (मेवाणी के ट्वीटस के एक दिन बाद) को कोकराझार थाने में एक शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसे पुलिस ने उसी दिन मामला दर्ज कर लिया.
कोकराझार पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए अपने अधिकारियों को उसी दिन गुजरात भेज दिया और 20 अप्रेल की रात करीब 11 बजे विधायक मेवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया.

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क्या शिकायत की गई
शिकायतकर्ता अरूप कुमार डे ने इस पूरे मामले पर बीबीसी से बात करते हुए कहा, "जिस व्यक्ति ने मोदी जी के खिलाफ इतनी बुरी तरह ट्वीट किया है उसके खिलाफ तो शिकायत करनी ही थी. उन्होंने मोदी जी के लिए गोडसे की पूजा करने जैसी बात बोल दी है. उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था. यह कोई बीजेपी या फिर व्यक्तिगत शिकायत की बात नहीं थी. मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं और हमारे मोदी जी के खिलाफ कोई बोलेगा तो हमें भी आवाज उठानी पड़ेगी."
बीजेपी नेता अरूप ने पुलिस में की गई अपनी शिकायत में लिखा था, "गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने अपने ट्वीट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'गोडसे' की पूजा करते हैं और उन्हें भगवान मानते हैं जैसी बातें लिखी थी. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित ट्वीट में विधायक नें पीएम मोदी से गुजरात में हाल के दिनों में हुए दंगा प्रभावित इलाकों के लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए जनता से अपील करने की बात कही थी."
शिकायतकर्ता के अनुसार विधायक मेवाणी के इस ट्वीट की वजह से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और लोगों के एक निश्चित वर्ग के बीच सद्भाव बनाए रखने का प्रतिकूल माहौल बिगड़ सकता है.
कोकराझार पुलिस ने शिकायतकर्ता की इन बातों को ध्यान में रख धारा 120बी (आपराधिक साजिश), धारा 153(ए) (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295(ए) (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 504 (इरादे से जानबूझकर अपमान करना शांति भंग), 506 (आपराधिक धमकी) और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत तुरंत एक मामला दर्ज कर लिया.

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मेवाणी के खिलाफ ही मामला क्यों?
सोशल मीडिया पर खासकर विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग एक-दूसरे के खिलाफ काफी प्रतिक्रिया देते रहते है लेकिन जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ ही मामला क्यों दर्ज किया गया?
इस सवाल का जवाब देते हुए अरूप कहते हैं, "कई सारे लोग ऐसी प्रतिक्रियाएं देते रहते हैं लेकिन मैं अकेले तो सबके ख़िलाफ़ शिकायत नहीं कर सकता. लेकिन मेवाणी एक दलित नेता होने के बावजूद इससे पहले भी काफी खराब तरीके से बीजेपी और हमारे शीर्ष नेता मोदी जी के खिलाफ इस तरह की भद्दी बयानबाजी करते रहें है. मेरे पास उनकी सभी प्रतिक्रियाओं के सबूत है. जो लोग (कांग्रेस) विरोध कर रहें है करते रहें. उनकों यह मालूम होना चाहिए कि मेवाणी ने कितनी भद्दी टिप्पणी की है."
साल 2020 के अंत में हुए बीटीसी चुनाव में फकीराग्राम (गैर अनुसूचित जनजाति) सीट से जीत कर आए अरूप 2019 में बीजेपी में शामिल हुए थे. करीब 34 साल के अरूप जिस अंदाज और जोश के साथ बात कर रहें थे इससे उनके राजनीति में आने की महत्वकांक्षा आसानी से समझ आ जाती है.
वह कहते हैं, "मैं बीजेपी का एक समर्पित कार्यकर्ता हूं और मुझे राजनीति के क्षेत्र में बहुत काम करना है. मैं हमारे नेता मोदी जी और हिमंत बिस्व सरमा जी को अपना आदर्श मानता हूं. इसी वजह से राजनीति में आया हूं. अगर आगे भी कोई हमारे इन नेताओं के खिलाफ भद्दी टिप्पणी करेगा तो उनके खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवाऊंगा."
बीटीसी चुनाव में फकीराग्राम से यूपीपीएल के उम्मीदवार रहें मोतिउर रहमान कहते हैं, "तीन साल पहले तक अरूप कुमार डे बीटीसी में एक ठेकेदार थे. उन्होंने बीपीएफ के शासन के दौरान सरकारी ठेकेदारी में काफी कमाई की और जब उनके पास अच्छा खासा पैसा आ गया तो बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़ लिया. यह व्यक्ति बीजेपी का कोई पुराना कार्यकर्ता नहीं है. मूल रूप से अरूप का परिवार कोलकाता से यहां आकर बसा है. उनके पिता एक शिक्षक थे. बंगाली समुदाय से आने वाले अरूप ने असमिया युवती से शादी की है."

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बीटीसी चुनाव के दौरान
मोतिउर रहमान की माने तो अरूप ने काफी कम समय के अंदर असम बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध बना लिए है.
यही कारण था कि बीटीसी चुनाव के दौरान पहले के मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा समेत कई बड़े बीजेपी नेताओं ने अरूप के लिए चुनावी सभाएं की थी.
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 10 फ़रवरी, 2003 को अलगाववादी नेता हाग्रामा मोहिलरी की अध्यक्षता वाले विद्रोही संगठन बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर्स (बीएलटी) के साथ एक समझौता किया था जिसके आधार पर बीटीसी का गठन हुआ.
पश्चिम असम के चार ज़िलों कोकराझार, चिरांग, बाक्सा और उदालगुरी को शामिल कर 10 फ़रवरी 2003 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत बीटीसी का गठन किया गया था.
बीटीसी के गठन के बाद से ही यहां लंबे समय तक हाग्रामा मोहिलारी की पार्टी बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट का शासन रहा लेकिन 2020 में हुए बीटीसी चुनाव में छात्र आंदोलन से राजनेता बने प्रमोद बोडो की पार्टी यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने 40 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज कर बीजेपी (9 सीट) के साथ मिलकर काउंसिल का गठन कर लिया.

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लिहाजा बीजेपी ने अरूप को बीटीसी में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के विभाग का कार्यकारी सदस्य (ईएम) बना दिया.
बीटीसी में शासन करने वाले इन कार्यकारी सदस्यों का रूतबा और दर्जा किसी राज्य मंत्री से कम नहीं होता.
मोदी सरकार के साथ 27 जनवरी, 2020 को हस्ताक्षरित हुए एक और नए बोडो शांति समझौते के प्रावधानों को लागू करने के बाद यह इलाक़ा अब बोडोलैंड टेरिटोरियल क्षेत्र अर्थात बीटीआर के नाम से जाना जाता है.
फिलहाल असम की कोकराझार पुलिस के अधिकारी जिग्नेश मेवाणी को गुवाहाटी ले आई है.
इस दौरान विधायक मेवाणी की गिरफ्तारी को लेकर गुजरात कांग्रेस के नेताओं ने विरोध जताया है जबकि असम में भी कोकराझार जिला कांग्रेस के लोग विरोध पर्दशन करने की बात कर रहे हैं.
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