बीरभूम की घटना से बैकफ़ुट पर सरकार, ममता ने शुरू की डैमेज कंट्रोल की कवायद

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, रामपुरहाट (पश्चिम बंगाल) से, बीबीसी हिंदी के लिए
बंगाल में अपने 11 वर्षों के शासनकाल के दौरान बीरभूम जिले में सामूहिक हत्या की पहली घटना ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस सरकार को बैकफ़ुट पर धकेल दिया है. इस घटना ने विपक्ष को उनके ख़िलाफ़ एक मज़बूत हथियार भी दे दिया है. यही वजह है कि इस घटना की सूचना मिलते ही ममता बिना देरी किए डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गई हैं.
राज्य में ऐसी सामूहिक हत्याओं की घटना कोई नई नहीं है. लेफ़्ट फ़्रंट सरकार के कार्यकाल में ख़ासकर वर्ष 2000 के बाद ऐसी जो घटनाएं हुई हैं उनको सीपीआईएम के कथित अत्याचारों के ख़िलाफ़ मुद्दा बना कर ही ममता ने सत्ता में पहुंचने की राह बनाई थी. ऐसे में शायद वो अपने हथियार से ख़ुद मात नहीं खाना चाहतीं.
सीपीएम, कांग्रेस और ख़ासकर बीजेपी, बीरभूम की घटना को सरकार की कथित नाकामी का मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है. राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी इस घटना को बर्बर बताते हुए क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने में जुटे हैं.
यहां इस बात का ज़िक्र ज़रूरी है कि ममता ने सीपीएम के ख़िलाफ़ अभियान में नानूर कांड को प्रमुखता से उठाया था. वो नानूर के अलावा पश्चिम मेदिनीपुर के छोटा आंगड़िया और नंदीग्राम की सामूहिक हत्याओं पर सवाल उठाते हुए लगातार यह साबित करने की मुहिम चलाती रहीं कि वाममोर्चा के शासनकाल के दौरान राज्य में क़ानून और व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है.
ममता की कार्रवाई से साफ़ है कि वो इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष के हाथ से यह मुद्दा छीन लेना चाहती हैं.

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मुआवजे़ का चेक साथ लाई थीं ममता बनर्जी
गुरुवार को ममता जब मौके पर पहुंचीं तो अपने साथ मुआवजे़ का चेक भी ले आई थीं. अमूमन ऐसे मामलों में मुआवजे़ के एलान के कई दिन बाद पीड़ितों को पैसे मिल पाते हैं. उन्होंने पांच-पांच लाख के चेक के साथ ही जले हुए घरों की मरम्मत के लिए भी एक लाख का चेक पहले दिया था. लेकिन एक पीड़िता ने जब कहा कि 'इसमें क्या होगा, हमारी जीवनभर की पूंजी भी घर के साथ जल गई है' तो ममता ने फ़ौरन ये रक़म दोगुनी कर दी.
ममता से बातचीत के दौरान पीड़ितों ने आरोप लगाए कि इलाके के कद्दावर टीएमसी नेता और पार्टी के ब्लॉक प्रमुख अनवारूल हुसैन ही आग़जनी में शामिल हैं. इस पर ममता ने मौके पर मौजूद पुलिस महानिदेशक मनोज मालवीय को फ़ौरन अनवारूल की गिरफ़्तारी का निर्देश दिया, यही वजह थी कि ममता के कोलकाता लौटने के कुछ देर बाद ही अनवारूल को गिरफ़्तार कर लिया गया.
गांववालों ने पुलिस के ख़िलाफ़ भी लापरवाही बरतने की शिकायत की थी. एक पीड़िता साजिन ख़ातून ने आरोप लगाया, 'पुलिस अगर समय पर पहुंच गई होती तो इतने लोगों को ज़िंदा जलने से बचाया जा सकता था.'
ममता ने भी माना कि इस मामले में पुलिस से लापरवाही हुई है और भरोसा दिया कि दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा. आख़िरकार, देर शाम तक रामपुरहाट थाने के प्रभारी त्रिदीप प्रमाणिक और एसडीपीओ सायन अहमद को निलंबित का दिया गया. पहले उनको काम करने से रोका गया था जिसे तकनीकी भाषा में 'क्लोज़ करना' कहा गया था.

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ममता के निर्देश पर पुलिस ने गुरुवार शाम से ही पूरे राज्य में अवैध हथियारों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया और रात होते-होते आसनसोल से एक अवैध कारखाना पकड़े जाने और भरी तादाद में हथियार बरामद होने की ख़बरें आईं.
मंगलवार सुबह इस घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता फ़िरहाद हकीम को हेलिकाप्टर से मौके पर भेज दिया और पहली नज़र में दोषी दो पुलिसवालों को हटा दिया. फ़िरहाद ने मौके का दौरा किया, पीड़ितों से बात की और अस्पताल जाकर घायलों से मुलाक़ात की.
विपक्ष में रहते हुए सामूहिक हत्याकांड के ख़िलाफ़ मुख़र रही हैं ममता
विपक्ष में रहते ममता सीपीएम के ख़िलाफ़ अपने अभियान के दौरान लगभग हर जगह नानूर और नेताई के सामूहिक हत्याकांडों का ज़िक्र करना नहीं भूलती थीं.
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, 'इस ताजा घटना से पहले हम इस बात का गर्व से दावा करते थे कि पार्टी के सत्ता में आने के बाद सामूहिक हत्याकांड की कोई घटना नहीं घटी है. इस मामले में भले हमारे समर्थकों की ही मौत हुई हो, सबसे दुखद बात यह है कि इनमें बेकसूर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.'

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तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम ज़िला समिति के एक नेता कहते हैं, "अब हमारे ख़िलाफ़ इसी घटना के ज़रिए बीजेपी भी क़ानून-व्यवस्था की नाकामी का मुद्दा उठा रही है.''
बीरभूम में ही तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य नेता कहते हैं, "हमने कभी ऐसी घटना की कल्पना तक नहीं की थी. ममता बनर्जी ने इस घटना की वजह का पता लगाने के निर्देश दिए हैं. हम प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर इसकी जांच कर रहे हैं."
राजनीतिक पर्यवेक्षक सुकुमार पाल कहते हैं, "बीरभूम की घटना से पहले भी दो पार्षदों की हत्या के मामले में ममता ने कथित दोषी पुलिसवालों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की थी. शायद वो इसके ज़रिए पुलिस महकमे को भी एक कड़ा संदेश देना चाहती हैं ताकि स्थानीय स्तर पर राजनीति, अपराध और प्रशासन के कथित गठजोड़ को तोड़ा जा सके."
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