हिजाब मामले में कहाँ-कहाँ उबाल? कोलकाता से जयपुर तक विरोध

मुर्शिदाबाद

इमेज स्रोत, Kabita Mahato

इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिजाब को लेकर हिंसक हुई भीड़

कर्नाटक के हिजाब विवाद की आंच देश के दूसरे हिस्सों में पहुँच चुकी है. कुछ जगहों से इसको लेकर मुस्लिम महिलाओं के धरना प्रदर्शन की ख़बरें सामने आ रही हैं जबकि कुछ जगहों पर हिजाब के कारण छात्राओं को शैक्षणिक परिसरों में प्रवेश से रोके जाने की घटना भी सामने आई है.

इन सबके बीच जिन पाँच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उन राज्यों से किसी बड़े प्रदर्शन की ख़बरें सामने नहीं आई हैं. ख़ासकर उत्तर प्रदेश में इसका बहुत असर नहीं दिख रहा है. लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में हिजाब मामले को लेकर अब तक क्या क्या हुआ है, बीबीसी हिंदी ने इसका पता लगाने की कोशिश की है.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिजाब को लेकर हिंसक हुई भीड़

इमेज स्रोत, Kabita Mahato

इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिजाब को लेकर हिंसक हुई भीड़

कोलकाता से प्रभाकर मणि तिवारी

पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद ज़िले के सूती स्थित बहुतली हाई स्कूल के हेडमास्टर दीनबंधु मुखर्जी ने जब छात्राओं से हिजाब की बजाय स्कूल ड्रेस पहन कर आने को कहा तो उनके परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे.

शुक्रवार की इस घटना के बाद शनिवार को सैकड़ों लोगों ने स्कूल को घेर लिया और हेडमास्टर को भीड़ के हवाले करने की मांग करने लगे. क़रीब दो साल तक बंद रहने के बाद हाल में ही तमाम स्कूलों को खोला गया है.

घेराव और विवाद की सूचना मिलने के बाद मौक़े पर पहुँची पुलिस भीड़ को शांत करने का प्रयास करने लगी. लेकिन बातचीत के दौरान ही भीड़ ने पुलिसवालों पर पथराव शुरू कर दिया.

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठी भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े. स्थानीय लोगों का दावा है कि पुलिस ने हवा में फायरिंग भी की. लेकिन पुलिस ने इससे इनकार किया है. इस मामले में 18 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

शनिवार के बाद रविवार को भी उग्र भीड़ ने मौक़े पर प्रदर्शन किया और नारे लगाए. लेकिन पुलिस ने उनको तितर-बितर कर दिया. दो दिनों की छुट्टी के बाद सोमवार को स्कूल खुल गया. लेकिन हेडमास्टर फ़िलहाल स्कूल नहीं जा रहे हैं.

मुर्शिदाबाद

इमेज स्रोत, Kabita Mahato

क्या कह रही राज्य सरकार?

श्रम राज्य मंत्री ज़ाकिर हुसैन कहते हैं, "बहुतली स्कूल में हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और इसकी जांच की जा रही है."

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हेडमास्टर ने छात्राओं से बुर्क़ा की बजाय स्कूल ड्रेस पहन कर स्कूल आने को कहा था. स्कूल से लौटने के बाद छात्राओं ने जब घरवालों को यह बात बताई तो लोग उत्तेजित हो उठे. अगले दिन सुबह सैकड़ों लोगों ने स्कूल का घेराव कर लिया. एक स्थानीय व्यक्ति तहीदुल इस्लाम कहते हैं, "हेड मास्टर ने छात्राओं से बुर्क़ा की जगह स्कूल ड्रेस पहनने को कहा था. इससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी भड़क उठी."

एक अभिभावक मोहम्मद ताहिर कहते हैं, "हेड मास्टर के कथन से हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है. मेरी लड़की हमेशा हिजाब का इस्तेमाल करती है. कोई हमसे यह अधिकार कैसे छीन सकता है?"

विवाद के केंद्र में रहे हेड मास्टर दीनबंधु मुखर्जी ने ऐसा क्या कहा था?

हेडमास्टर ने बीबीसी से बातचीत में माना कि उन्होंने तमाम छात्रों से अनुशासन को ध्यान में रखते हुए स्कूल ड्रेस पहन कर आने को कहा था.

वह बताते हैं, "मैंने शुक्रवार सुबह प्रार्थना के बाद तमाम शिक्षकों के सामने ही कहा था कि कई लोग बिना स्कूल ड्रेस के अपनी मर्जी का कपड़ा पहन कर आए हैं. इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. सबको स्कूल ड्रेस पहन कर आना होगा और अगर स्कार्फ़ का इस्तेमाल करना ज़रूरी है तो ड्रेस से मैचिंग सफ़ेद रंग की स्कार्फ़ के इस्तेमाल की इजाज़त दी जा सकती है. हमें स्कूल ड्रेस में छात्रों की तस्वीरें खींच कर विभाग को भेजनी होती है. मैंने हिजाब शब्द का इस्तेमाल ही नहीं किया था."

मुर्शिदाबाद

इमेज स्रोत, Kabita Mahato

हेडमास्टर ने मांगी माफ़ी

दीनबंधु बताते हैं कि विवाद बढ़ने पर पुलिस और प्रशासन के कहने पर उन्होंने माफ़ी भी मांगी थी.

वह कहते हैं, "मैंने कहा कि अगर मेरी बातों से किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँची है तो मैं उसके लिए माफ़ी मांगता हूं. लेकिन मेरा मक़सद सिर्फ़ स्कूल परिसर में अनुशासन बहाल करना है."

हेड मास्टर ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के साथ बैठक में अब यह मामला सुलझ गया है.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, बांग्लादेश की सीमा से लगे मुर्शिदाबाद ज़िले की कुल आबादी में क़रीब 66 फ़ीसद अल्पसंख्यक हैं. यह बंगाल में सबसे ज़्यादा है. वैसे एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान भी इस इलाक़े ने काफ़ी सुर्खियां बटोरी थी.

सूती के तृणमूल कांग्रेस विधायक ईमानी विश्वास बताते हैं, "सूती में झड़प हुई थी. स्थानीय लोगों के मुताबिक़ हेडमास्टर ने छात्राओं से बुर्के़ की जगह स्कूल यूनिफॉर्म में आने को कहा था. बाद में हालात पर काबू पा लिया गया."

शनिवार को स्कूल के घेराव की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी, स्थानीय विधायक और नेता मौक़े पर पहुँच गए. जंगीपुर के पुलिस अधीक्षक भोला नाथ पांडेय ने पत्रकारों को बताया था कि इस मामले में 18 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. बीबीसी ने सोमवार को कई बार जंगीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. भोला नाथ पांडेय से बात करने की कोशिश की. उनको व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजा. लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

मुर्शिदाबाद ज़िले के सूती स्थित बहुतली हाई स्कूल के हेडमास्टर दीनबंधु मुखर्जी

इमेज स्रोत, Kabita Mahato

इमेज कैप्शन, मुर्शिदाबाद ज़िले के सूती स्थित बहुतली हाई स्कूल के हेडमास्टर दीनबंधु मुखर्जी

अब भी चौकसी

ज़िले के सुती थाना, जिसके तहत वह इलाक़ा आता है, के ऑफिसर इंचार्ज बिप्लब कर्मकार ने बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में बताया, "हेडमास्टर की कथित विवादास्पद टिप्पणी के कारण स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी पैदा हो गई थी. लोग काफ़ी आक्रामक हो गए थे. लेकिन हमने मौक़े पर पहुँच कर काफ़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया."

उन्होंने बताया कि अब हालात काफ़ी हद तक सामान्य है. इलाक़े में पुलिस की गश्त जारी है.

मुर्शिदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार सुकुमार महतो बताते हैं, "हेडमास्टर दीनबंधु मुखर्जी क़रीब आठ साल से यहाँ हैं. इस दौरान उन्होंने स्कूल का पूरा तरह कायाकल्प कर दिया है. कई पूर्व छात्र अब प्रशासनिक सेवा समेत बेहतर जगहों पर नौकरियां कर रहे हैं.''

''उनके ख़िलाफ़ पहले कभी कोई शिकायत नहीं आई थी. राज्य सरकार ने दो साल पहले उनको बेस्ट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया था. स्कूल में तीन हज़ार से ज़्यादा छात्र और 40 से ज़्यादा शिक्षक हैं. यह झारखंड सीमा से तीन और बांग्लादेश सीमा से क़रीब 20 किलोमीटर दूर है."

मध्य प्रदेश

इमेज स्रोत, SNiyazi

भोपाल से शुरैह नियाज़ी

मध्य प्रदेश में हिजाब को लेकर सोमवार को दतिया के पीजी कॉलेज में लड़कियों के बुर्के़ पहने एक वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद हिंदुवादी संगठन के कार्यकर्ता इसका विरोध करने लगे और कॉलेज में नारेबाज़ी की. इसके बाद कॉलेज के प्रिंसिपल ने आदेश निकाल कर बुर्के़ पर पाबंदी लगा दी.

इस आदेश में लिखा है कि कॉलेज में जो भी प्रवेश करेगा वह शालीन कपड़ों में होगा और बुर्क़ा पहनकर नहीं आएगा. प्रदेश में इस तरह का आदेश पहली बार आया है, जहाँ पर बुर्क़ा पहनने की इजाज़त नही दी गई है.

वहीं इस आदेश की एक कॉपी नोटिस बोर्ड पर लगा गई है.

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दतिया के पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा निकाले गए आदेश की जांच के लिए दतिया कलेक्टर को निर्देशित किया है. नरोत्तम मिश्रा ने एक बार फिर कहा है कि, प्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि हिजाब पर प्रदेश में कोई पाबंदी नहीं है और इस लेकर सरकार के पास कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, इसलिए कोई भ्रम न फैलाएं.

जयपुर

इमेज स्रोत, MOharsinghmeena

इमेज कैप्शन, जयपुर के चाकसू में बुर्का पहन कॉलेज पहुंचीं स्टूडेंट्स

जयपुर से मोहर सिंह मीणा

हिजाब को लेकर विवाद जयपुर तक पहुँच गया है. जयपुर ज़िले के चाकसू में एक निजी कॉलेज की छात्राएं बुर्क़ा पहन कर मंगलवार को कॉलेज पहुंचीं तो उन्हें कॉलेज प्रशासन ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया.

उनके साथ कुछ अन्य छात्र भी कॉलेज यूनिफॉर्म में नहीं थे, उन्हें भी कॉलेज यूनिफॉर्म का हवाला देते हुए प्रवेश नहीं दिया. विवाद बढ़ने पर पुलिस ने मामला शांत कराया.

चाकसू थाना अधिकारी यशवंत सिंह का कहना है, "कॉलेज प्रशासन ने यूनिफॉर्म का नियम बनाया हुआ है. लड़कियों समेत कुछ अन्य छात्र भी कॉलेज बिना यूनिफॉर्म के पहुँचे थे. उन्हें भी कॉलेज प्रशासन ने यूनिफॉर्म में ही कॉलेज आने लिए कहा था."

उन्होंने बताया, "जानकारी मिलने पर मौक़े पर पहुँची पुलिस ने मामला शांत करवाया. इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है."

वहीं सीकर में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) ने अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (एडीएम) को ज्ञापन सौंपा है. एसएफ़आई ने इस मामले को लेकर प्रदर्शन भी किया है. एसएफ़आई के सीकर शहर अध्यक्ष का कहना है कि हिजाब प्रतिबंध को निरस्त कर कर्नाटक में अध्ययन के प्रतिकूल वातावरण को सुनिश्चित करना चाहिए.

एडीएम को दिए ज्ञापन के अनुसार हिजाब पहनने वाली छात्राओं को स्कूल और कॉलेज में प्रवेश देने से मना करना सरासर ग़लत है. संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए एसएफआई ने हिजाब पहनने पर पाबंदी का फ़ैसला सभी धर्मों को मिली आचरण और व्यवहार की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ बताया है.

हैदराबाद

हैदराबाद से बीबीसी संवाददाता सुरेखा अब्बूरी

हैदराबाद में भी मुस्लिम महिलाएं और छात्र संगठन प्रदर्शन के ज़रिए कर्नाटक की मुस्लिम छात्राओं का समर्थन कर रही हैं. मंगलवार को हैदराबाद में इंडियन नेशनलिस्ट मूवमेंट और वीमेन एम्पावरमेंट नाम की संस्थानों द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया था, मगर पुलिस ने रैली के आयोजन को मंज़ूरी नहीं दी.

आयोजकों में शामिल सईदा नसीमा सुल्ताना ने कहा, "पुलिस ने पहले मंज़ूरी दी थी मगर ठीक एक दिन पहले पुलिस ने कहा कि किसी राजनीतिक पार्टी को भी इस मुद्दे पर रैली करने की अनुमति नहीं दी जा रही है इसलिए आपको भी नहीं दी जा सकती."

वहीं नौ फ़रवरी को कुछ छात्र संगठनों ने चारमीनार के पास प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन में शामिल छात्राओं का कहना था, "हिन्दू मुस्लिम के बीच भेदभाव नहीं है, जिस तरह से हिन्दू धर्म में तिलक और प्रार्थना होती है है, वैसे ही हम मुस्लिम महिलाओं के लिए बुर्का, हिजाब और नमाज़ है. शिक्षा आपके लिए जितनी माएने रखती है, उतना ही हमारे लिए भी है."

हैदराबाद

नौ फ़रवरी को सैदाबाद कॉलोनी के मैदान में भी महिलाएं इकट्ठा हुईं और उन्होंने नमाज़ अदा करते हुए कर्नाटक की छात्राओं के समर्थन करने की बात कही.

अपनी पहचान छिपाते हुए एक महिला ने कहा, "हमारे घर्म में लड़कियां सातवीं आठवीं कक्षा से ही हिजाब पहनने लगती हैं और मैंने भी तभी से शुरू किया. आज तक कहीं इसको लेकर आपत्ति नहीं हुई, मगर आज अचानक ये मुद्दा क्यों उठ रहा है? स्कूलों में जिस तरह से यूनिफार्म होता है, उसी तरह से हिजाब को भी शामिल किया सकता है. जिस रंग का यूनिफार्म है, उसी रंग का हिजाब भी तो उसमें शामिल किया जा सकता है."

इन महिलाओं ने कहा कि हिजाब उनका हक़ है और वो इसमें अपने आपको सुरक्षित महसूस करती हैं और इस पर पाबंदी लगाना उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा. हालांकि हैदराबाद पुलिस कमिश्नर आनंद ने इन प्रदर्शन पर पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)