#TheKashmirFiles पर क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मार्च को रिलीज़ हुई फ़िल्म #TheKashmirFiles पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
बीजेपी के संसदीय बोर्ड की मीटिंग में आज अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़िल्म को लेकर विस्तार से बात की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हमारे देश का दुर्भाग्य है कि इतिहास को सही परिपेक्ष्य में समाज के सामने सही समय पर रखना, जिसमें किताबों का महत्व होता है, कविताओं का महत्व होता है, साहित्य का महत्व होता है और वैसा ही फ़िल्म जगत का भी महत्व होता है.
"आज़ादी के बाद दुनिया के सामने महात्मा गांधी को सचमुच में, सारी दुनिया मार्टिन लूथर की बात करती है, नेल्सन मंडेला की बात करती है लेकिन दुनिया महात्मा गांधी की चर्चा बहुत कम करती है."
नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर उस समय किसी ने हिम्मत करके महात्मा गांधी के पूरे जीवन पर एक फ़िल्म बनाई होती और उसे दुनिया के सामने रखा होता तो शायद हम संदेश दे पाते. पहली बार एक विदेशी ने जब महात्मा गांधी पर फ़िल्म बनाई और पुरस्कार पर पुरस्कार मिले तो दुनिया को पता चला कि महात्मा गांधी कितने महान थे.
पीएम मोदी ने तंज़ भरे अंदाज़ में कहा कि "बहुत से लोग फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन की बात तो करते हैं लेकिन आपने देखा होगा कि इमरजेंसी पर कोई फ़िल्म नहीं बना पाया क्योंकि सत्य को लगातार दबाने का प्रयास होता रहा. भारत विभाजन, जब हमने 14 अगस्त को एक हॉरर डे रूप में याद करने के लिए तय किया तो बहुत से लोगों को बड़ी दिक़्क़त हो गई."
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पीएम मोदी ने कहा कि आख़िर देश ये सब कैसे भूल सकता है, उन सबसे भी तो सीखने को मिलता है.
नरेंद्र मोदी ने कहा,"भारत विभाजन की वास्तविकता पर क्या कभी कोई फ़िल्म बनी...! अब इसलिए आपने देखा होगा कि इन दिनों जो नई फ़िल्म 'द कश्मीर फ़ाइल्स' आई है, उसकी चर्चा चल रही है. और जो लोग हमेशा फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन के झंडे बुलंद किए रहते हैं, वो पूरी जमात बौखलाई हुई है बीते पांच-छह दिनों से और इस फ़िल्म की तथ्यों और बाकी चीज़ों के आधार पर विवेचना करने के बजाय, उसके ख़िलाफ़ मुहिम चलाए हुए हैं."
फ़िल्म को लेकर आ रही अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया पर पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अगर कोई सच को उजागर करने का साहस करे तो, उसको जो सत्य लगा उसने प्रस्तुत करने की कोशिश की लेकिन उस सत्य को ना कोई समझने के लिए तैयार है, ना स्वीकारने करने के लिए. साथ ही कोशिश ये भी की जा रही है कि दुनिया इसे ना देखे और इसके लिए पांच-छह दिनों से षड़यंत्र चल रहा है.

मोदी ने कहा, "मेरा विषय कोई फ़िल्म नहीं है, मेरा विषय है कि जो सत्य है उसे सही स्वरूप में देश के सामने लाना देश की भलाई के लिए होता है. उसके कई पहलू हो सकते हैं. किसी को कोई एक पहलू नज़र आ सकता है तो किसी दूसरे को दूसरा पहलू. अगर आपको ये फ़िल्म ठीक नहीं लगती है तो आप दूसरी फ़िल्म बनाएं. कौन मना करता है लेकिन उन्हें हैरानी हो रही है कि जिस सत्य को इतने सालों तक दबा कर रखा, उसे तथ्यों के आधार पर बाहर लाया जा रहा है तो उसके ख़िलाफ़ पूरी कोशिश लग गयी है."
पीएम मोदी ने कहा, "ऐसे समय जो सत्य के लिए जीने वाले लोग हैं, उनके लिए सत्य के ख़ातिर खड़े होने की ज़िम्मेदारी होती है और मैं आशा करूंगा कि ये ज़िम्मेदारी सब लोग निभाएंगे."
कश्मीर का चित्रण
कश्मीर पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं और कई फ़िल्में भी बनाई जा चुकी हैं. इनमें से कुछ कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर केंद्रित भी हैं, पत्रकार राहुल पंडिता कहते हैं कि कश्मीर फ़ाइल्स पर आ रही प्रतिक्रिया इसलिए तीख़ी है क्योंकि पंडित समुदाय को हमेशा लगा है कि उनकी कहानी की दबाया जाता रहा है.
राहुल पंडिता कहते हैं, "अगर में कह सकूं तो मैं इसे इमोशनल कैथार्सिस यानी जज़्बाती विरेचन कहूंगा." वे इस बात से भी हैरान हैं कि भारत के अन्य हिस्सों के लोगों को कश्मीर के उस दौर के बारे में इतनी कम जानकारी है.
लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि भारत में दलितों, पूर्वोत्तरी राज्यों के लोगों और वामपंथी विचारधारा वाले लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा का चित्रण, मुख्यधारा के सिनेमा में कम ही होता है.
संजय काक ख़ुद एक कश्मीरी पंडित हैं और एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मकार भी हैं.
वे कहते हैं, "मैं हैरान हूं कि लोग ये कह रहे हैं कि ये कहानी पहले नहीं सुनाई गई है. ये सच है कि बॉलीवुड ने ये कहानी नहीं की है लेकिन बॉलीवुड तो ऐसी कहानियों पर फ़िल्में बनाता ही नहीं है."
"बॉलीवुड ने दिल्ली में 1984 में हुए दंगों पर भी कोई फ़िल्म नहीं बनाई है. और न हीं गुजरात में 2002 में हुए दंगों पर. इस देश में हज़ारों ऐसी कहानियां हैं जिन्हें मुख्यधारा में जगह नहीं मिली है."

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कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पीएम मोदी के संबोधन को री-ट्वीट करते हुए लिखा है- "ये 'फ़्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन' तब कहाँ गया जब अपना हक़ माँगते देश के किसानों और रोजगार माँगते नौजवानों पर ज़ुल्म ढाये?
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मोदी के साथ वायरल हुई थी फ़िल्म के निर्देशक की तस्वीर
ये फ़िल्म 11 मार्च को रिलीज़ हुई और 12 मार्च को विवेक अग्निहोत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक तस्वीर वायरल हो गई.
फ़िल्म के प्रोड्यूसर अभिषेक अग्रवाल ने नरेंद्र मोदी के साथ एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला. और ख़ास यह रहा कि फ़िल्म #TheKashmirFiles के लिए उनसे तारीफ़ मिली. शुक्रिया मोदी जी."
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अभिषेक के इस ट्वीट को रि-ट्वीट करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, "मैं आपके लिए बेहद खुश हूं अभिषेक कि आपने भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण सच को प्रोड्यूस करने का साहस दिखाया. #TheKashmirFiles की अमेरिका में स्क्रीनिंग होना, ये साबित करता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया का मूड बदल रहा है."
ये तस्वीर वायरल होने के बाद कई तरह की प्रतिक्रियाएं आयीं. कुछ में फ़िल्म को लेकर विवेक अग्निहोत्री की तारीफ़ की गईं. वहीं कुछ लोगों ने इसे राजनीति से दूर रखने की अपील की.
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फ़िल्म को लेकर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने क्या कहा
फ़िल्म को लेकर कई तरह के विवाद चल रहे हैं. कुछ लोगों का आरोप है कि फ़िल्म को सही से प्रमोशन प्लेटफ़ॉर्म नहीं दिया गया लेकिन फ़िल्म के निर्देशक का कहना है, "देखिए अगर फ़िल्म का प्रमोशन ज़रूरी होता तो मैं ख़ुद कॉल करता लेकिन यह ज़रूरी नहीं है. मैं गया नहीं. लोग मुझे कहते भी थे कि मैं जाता क्यों नहीं प्रमोशन करने के लिए. हालांकि मैं मार्केट के डायनमिक्स को समझता हूं लेकिन एक सवाल जो मैं भारत के लोगों से जानना चाहता हूं वो ये कि लोगों ने कश्मीर के नाम पर तरह-तरह की चीज़ें की हैं. बात की है. बहुत बहुत तरह की फ़िल्में और दूसरी चीज़ें की हैं तो मुझे विश्वास था कि कश्मीर के लिए लोगों का दिल धड़कता है."
उन्होंने कहा,"मुझे विश्वास था कि इस फ़िल्म का स्टार कश्मीर ही है. मुझे लगा कि जो लोग कश्मीर को दिन-रात भुनाते हैं, उनके दिल में इतना कश्मीर तो होगा कि वे इस बात की चिंता ना करें कि फ़िल्म में कौन से स्टार हैं और कौन से नहीं."
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