अखिलेश यादव की यह रणनीति क्या योगी के हिन्दुत्व पर पड़ेगी भारी?- प्रेस रिव्यू

अखिलेश यादव

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति में एक मज़बूत जातीय गठबंधन अहम भूमिका अदा कर सकता है. कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ के हिन्दुत्व पर अखिलेश यादव का यह समीकरण भारी पड़ सकता है.

अखिलेश यादव ने सभी ओबीसी से लेकर ब्राह्मणों तक को साधने की कोशिश की है. पूर्वांचल में अखिलेश यादव ने जिन 56 उम्मीदवारों की घोषणा की है, उनमें कई बीएसपी के बाग़ी हैं. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने आज अखिलेश यादव के जातीय समीकरण पर रिपोर्ट प्रकाशित की है. आज की प्रेस रिव्यू की लीड में इसी रिपोर्ट को पढ़िए.

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अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को हराने के लिए एक मज़बूत जातीय समीकरण तैयार किया है. 2017 के विधानसभा चुनाव में आज़मगढ़ की कुल 10 सीटों में से पाँच पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी.

पार्टी ने इन पाँचों में से चार विधायकों- आलम बदी, संग्राम यादव, नफ़ीस अहमद और दुर्गा प्रसाद यादव को फिर से मैदान में उतारा है. इस ज़िले में समाजवादी पार्टी के तीन अन्य उम्मीदवारों में पूर्व लोकसभा सांसद और यादवों में अच्छी पैठ रखने वाले रमाकांत यादव जो कि फूलपुर पोवई से लड़ेंगे, कमलकांत राजभर जो कि पूर्व बीएसपी नेता और दिवंगत सुखदेव राजभर के बेटे हैं, उन्हें दीदारगंज से उतारा गया है और लालगंज से बेचई सरोज को टिकट दिया गया है. तीन अन्य सीटों पर अभी उम्मीदवारों की घोषणा बाक़ी है.

योगी

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पड़ोस का अंबेडकरनगर, जो कि बहुजन समाज पार्टी का पारंपरिक गढ़ रहा है, वहाँ भी समाजवादी पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. वरिष्ठ ओबीसी नेता और विधायक लालजी वर्मा को कटेहरी और अचल राजभर को अकबरपुर से पार्टी ने उतारा है.

वरिष्ठ जाटव नेता और पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त को अलापुर में तो जलालपुर में बीएसपी सांसद रितेश पांडे के पिता राकेश पांडे मैदान में हैं. लालजी वर्मा, अचल राजभर और त्रिभुवन दत्त समाजवादी पार्टी में आने से पहले लंबे समय तक बहुजन समाजवादी पार्टी में थे. इनके आने से समाजवादी पार्टी की पहुँच ग़ैर-यादवों में बढ़ी है. राकेश पांडे के बेटे रितेश 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने से पहले जलालपुर से विधायक थे. राकेश पांडे भी पूर्व सांसद हैं और इलाक़े का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा हैं.

मऊ के घोसी में समाजवादी पार्टी ने दारा सिंह चौहान को उतारा है. चौहान ने हाल ही में योगी कैबिनेट से इस्तीफ़ा दिया था. चौहान बीएसपी से 2017 में बीजेपी में आए थे और मधुबन से चुनाव लड़े थे. गोरखपुर को योगी आदित्यनाथ का क़िला माना जाता है, वहाँ भी अखिलेश यादव ने सात सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.

मायावती

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चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के बीएसपी विधायक विनय शंकर तिवारी को भी समाजवादी पार्टी ने शामिल किया है. विनय शंकर तिवारी इस इलाक़े के दबंग ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं. हरिशंकर तिवारी के बारे में कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ को वही चुनौती दे सकते हैं.

तिवारी परिवार को योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ कैंपेन में उतारने से समाजवादी पार्टी इस बात को लेकर आशान्वित है कि यहां ठाकुर बनाम ब्राह्मण की स्थिति बन सकती है. योगी आदित्यनाथ की पहचान हिन्दुत्व के झंडाबरदार के अलावा ठाकुर की भी है. समाजवादी पार्टी ने योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ गोरखपुर सदर में उम्मीदवार की घोषणा अभी नहीं की है.

केशव प्रसाद मौर्य

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समाजवादी पार्टी की हालिया लिस्ट में काजल निषाद का भी नाम है. काजल भोजपुरी फ़िल्मों की अभिनेत्री हैं. काजल को समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर के कैंपियारगंज से उम्मीदवार बनाया है. इसके अलावा निषाद दिग्गज जमुना प्रसाद निषाद के बेटे अमरेंद्र निषाद को एक बार फिर से पिपराइच से उतारा गया है. इस इलाक़े में निषाद यानी मल्लाहों की अच्छी ख़ासी आबादी है.

सिद्धार्थनगर के इटावा से समाजवादी पार्टी ने विधानसभा के पूर्व स्पीकर माता प्रसाद पांडे को टिकट दिया है. वहीं देवरिया के पत्थरदेव सीट से एक और ब्राह्मण नेता शंकर त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. पूर्व सांसद दाऊद अहमद (लखीमपुर खीरी में मोहम्मदी), पूर्व बीएसपी विधायक पूजा पाल (कौशांबी में चैल), प्रयागराज के वर्तमान बीएसपी विधायक मुर्तज़ा सिद्दीक़ी, दिवंगत कुर्मी नेता बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा (बाराबंकी के कुर्सी), पूर्व सांसद तूफ़ानी सरोज (जौनपुर में केराकट), यादवों के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले शैलेंद्र यादव ललाई (शाहगंज) और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का नाम भी लिस्ट में है. पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह ग़ाज़ीपुर के जमनिया से चुनाव लड़ेंगे.

बिहार

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बिहार में 'ख़ान सर' समेत कुल 22 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रेलवे की परीक्षा के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के मामले में दर्ज हुए मुक़दमे की ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार के अनुसार, बुधावार को अलग-अलग निजी कोचिंग संस्थानों के छह शिक्षकों (जिनमें यूट्यूबर 'ख़ान सर' भी शामिल हैं) के अलावा 16 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.

'ख़ान सर' भी पटना में एक कोचिंग चलाते हैं. पत्रकार नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ मनोरंजन भारती ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा है कि ख़ान सर के अलावा पाँच शिक्षक एसके झा, नवीन, अमरनाथ, गगन प्रताप और गोपाल वर्मा शामिल हैं.

किशन कुमार, रंजन कुमार, रोहित कुमार और विक्रम कुमार नाम के प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया है. मनोरंजन भारती ने कहा कि सभी छह शिक्षकों पर अभ्यर्थियों को भड़काने का आरोप है.

सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आईपीसी की अलग-अलग धाराएं लगाई गई हैं. इनमें 147 (दंगा), 120बी (आपराधिक साज़िश), 506 (धमकी) और 353 (हमला) की धाराएं लगाई गई हैं. एफ़आईआर कुछ प्रदर्शनकारियों के बयान के आधार दर्ज की गई है. इन प्रदर्शनकारियों को राजेंद्र नगर टर्मिनल से सोमवार को गिरफ़्तार किया गया था.

कोरोना

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धीमी पड़ने लगी कोरोना की तीसरी लहर

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने की लीड ख़बर लगाई है- धीमी पड़ने लगी कोरोना की तीसरी लहर. अख़बार की ख़बर के अनुसार, कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमण दर में बढ़ोतरी थमती जा रही है और अगले हफ़्ते से इसमें तेज़ी से कमी आ सकती है.

सबसे बड़ी बात है कि संक्रमण दर की वृद्धि दर में गिरावट उस वक़्त देखी जा रही है, जब देश के 541 ज़िलों में संक्रमण दर पाँच प्रतिशत से अधिक पहुँच चुकी है. इनमें 400 ज़िले ऐसे हैं जिनमें संक्रमण दर 10 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है.

इससे संक्रमण के चरम तक पहुँचकर स्थिर होने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूरी दुनिया में ओमिक्रॉन का ट्रेंड देखने से पता चलता है कि एक से डेढ़ हफ़्ते तक यह धीरे-धीरे बढ़ता है और फिर एक से डेढ़ हफ़्ते तक तेज़ी से बढ़ता है.

एक से डेढ़ हफ़्ते तक बढ़ोतरी स्थिर रहती है और उसके बाद उसमें तेज़ी से गिरावट आती है. भारत के महानगरों में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है.

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